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बलिया से 2 म्यांमार नागरिक गिरफ्तार, बर्मा और बांग्लादेश से कराते थे घुसपैठ

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बलिया। आतंकवाद निरोधक दस्ता की वाराणसी इकाई ने पुलिस की मदद से भारत में अवैध रूप से रह रहे दो म्यांमार नागरिक को बलिया से गिरफ्तार किया। यूपी ATS की वाराणसी टीम और बलिया पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर   निवासी अरमान उर्फ अबू तल्हा और अब्दुल अमीन को गिरफ्तार किया। जो म्यांमार और बांग्लादेश से रोहिंग्याओं को भारत लाते थे। फिर उनको यहां से विदेश भेज देते थे।

अलग-अलग दस्तावेज बरामद हुए
मोहम्मद अरमान के पास से उसका और एक अन्य रोहिंग्या का भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, विदेशी करेंसी, सऊदी अरब का मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एक भारतीय सिम लगा आईफोन बरामद हुआ है। अब्दुल अमीन के पास से रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए जारी अलग-अलग दस्तावेज बरामद हुए हैं।

अरमान अब्दुल का भारतीय नागरिकता का कागज बनवाने बलिया आया था। जिसकी सूचना ATS की टीम को लगी फिर टीम ने बलिया के कोतवाली थाना क्षेत्र के गांधी नगर मैदान से दोनों को गिरफ्तार किया। ATS अफसरों का कहना है कि बलिया में फैले पूरे जाल का पता लगाने में जुटे हैं आखिर वो लोग कौन हैं, जो इस तरह के फर्जी कागज बना रहे हैं। उनके पास सरकारी मोहरें कहां से आईं। कौन-कौन इस काम में शामिल है। म्यांमार और बांग्लादेश से आने वाले रोहिंग्या कहां-कहां रुकते थे।
9 साल पहले भारत आया था आरोपी अरमान- पूछताछ में आरोपी मोहम्मद अरमान ने बताया है कि वह 9 साल पहले म्यांमार से भारत की सीमा में घुसा था। इसके बाद उसने बलिया में शरण ले ली। यहां वह काम भी करने लगा। इसके बाद कुछ लोगों की मदद से अपना नाम बदल लिया। साथ ही भारतीय नागरिकता के कागज बनवा कर अपना पासपोर्ट बनवा लिया। कुछ समय बाद वो भारत से सऊदी अरब चला गया। वहां काम भी करने लगा। सऊदी अरब में जो पैसा कमाया, उससे पश्चिम बंगाल में भारतीय दस्तावेज दिखाकर जमीन खरीद कर मकान बनवा लिया। वो सऊदी अरब से जब भी आता था तो अपने सहयोगियों से मिलने बलिया जरूर आता था।

कागज बनवाने के 2 लाख रुपए लेता है अरमान- साथ ही बताया कि अब तक वो कितने रोहिंग्या को भारत ला चुका है, उसे याद नहीं है। इस काम के लिए उसने पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक नेटवर्क फैला रखा है। इस काम के वो 2 लाख रुपए लेता है। अब तक वो 7-8 लोगों को भारतीय कागजात की मदद से पासपोर्ट बनवा कर सऊदी अरब भेज चुका है। लेकिन अब वो लोग कहां हैं, इसकी जानकारी नहीं है।

पुलिस से मांगे जिले के अपराधियों के रिकार्ड- ATS के अफसरों को कई जानकारियां हाथ लगी हैं। टीम उन्हीं के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। अरमान के खाते में काफी पैसा भी मिला है। वो जानकारी देने में सहयोग नहीं कर रहा है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के बाद बलिया में इस काम में शामिल लोग अंडरग्राउंड हो गए हैं। लोकल पुलिस से भी कह दिया गया है कि छापेमारी करें। किसी भी संदिग्ध को जिले से बाहर न जाने दे। पुलिस से ऐसे लोगों के रिकार्ड भी मांगे गए हैं जो पहले फर्जी कागज बनाने जैसे क्राइम में शामिल रहे हैं।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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