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धूप में पसीने से तरबतर एक डॉक्टर! बलिया को सुषमा शेखर जैसे नेताओं की ज़रूरत क्यों है?
सियासत में बड़े नामों की कोई कमी नहीं है। मंचों पर भाषण देने वाले नेता भी बहुत हैं और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले चेहरे भी। लेकिन कभी-कभी कुछ नज़ारे ऐसे सामने आते हैं जो राजनीति की पारंपरिक तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। वे केवल एक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि एक संदेश बन जाते हैं। बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जननायक चंद्रशेखर की जन्मशताब्दी वर्ष पर शुरू हुआ तीन दिवसीय फ्री मेडिकल कैंप ऐसा ही एक नज़ारा लेकर आया।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुत्रवधू, वरिष्ठ चिकित्सक एवं राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में शुरू हुए इस स्वास्थ्य अभियान के पहले दिन एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। वाराणसी और लखनऊ से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क परामर्श दिया और दवाएं वितरित कीं। लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा डॉक्टरों की संख्या या मरीजों की भीड़ नहीं रही, बल्कि स्वयं डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता रही।
तेज धूप थी। उमस इतनी कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल था। लेकिन डॉ. सुषमा शेखर लगातार मरीजों के बीच मौजूद रहीं। वे केवल मंच पर बैठी अतिथि नहीं थीं, बल्कि व्यवस्था संभाल रही थीं, मरीजों से बातचीत कर रही थीं, कई लोगों का स्वयं ब्लड प्रेशर (बीपी) जांच रही थीं, दवाइयों के वितरण पर नजर रख रही थीं और यह सुनिश्चित कर रही थीं कि कोई भी जरूरतमंद बिना इलाज के वापस न लौटे। उनके कपड़े पसीने से भीग चुके थे, लेकिन सेवा का उनका उत्साह कम नहीं हुआ।
शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखने को मिलता हो कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का कोई सदस्य स्वयं घंटों तक आम मरीजों के बीच खड़ा होकर स्वास्थ्य शिविर में इस तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा हो। आमतौर पर बड़े राजनीतिक परिवारों के कार्यक्रम औपचारिकता तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन यहां तस्वीर कुछ अलग थी। यहां सेवा केवल भाषण का विषय नहीं थी, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही थी।
यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. सुषमा शेखर केवल एक राजनीतिक परिवार का हिस्सा नहीं हैं। वे स्वयं एक वरिष्ठ चिकित्सक हैं। यही कारण है कि मरीजों के प्रति उनका व्यवहार किसी राजनीतिक औपचारिकता से अधिक एक डॉक्टर की संवेदनशीलता को दर्शाता है। चिकित्सा सेवा से जुड़े होने के कारण वे लोगों की जरूरतों को नजदीक से समझती हैं और शायद यही अनुभव इस पूरे अभियान में दिखाई दिया।
यह स्वास्थ्य शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है। 26 से 28 जून तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिनों तक यह अभियान चलेगा। हजारों लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क जांच, परामर्श और दवाओं का लाभ मिलेगा। यदि इस तरह के प्रयास नियमित रूप से होते रहें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है।
पिछले कुछ समय से फेफना विधानसभा क्षेत्र में डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं। उन्हें संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का आकलन भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता।
यदि राजनीति में ऐसे लोग आगे आएं जिनकी पहचान केवल भाषणों से नहीं बल्कि सेवा, शिक्षा और समाज के प्रति संवेदनशीलता से हो, तो निश्चित रूप से लोकतंत्र और मजबूत होगा। एक डॉक्टर जब जनप्रतिनिधि बनता है, तो वह केवल विकास योजनाओं की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय जरूरतों की भाषा भी समझता है।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानते थे। उनकी जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित यह स्वास्थ्य अभियान उसी विचार की एक झलक देता है। किसी भी महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारकर दी जाती है।
यह संपादकीय किसी राजनीतिक समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल की सराहना का प्रयास है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति बिना किसी सरकारी पद के, धूप की परवाह किए बिना, हजारों मरीजों के बीच खड़ा होकर सेवा करता है, तो वह दृश्य उम्मीद जगाता है।
शायद राजनीति की सबसे बड़ी ताकत भी यही है जब सत्ता की इच्छा से पहले सेवा का संस्कार दिखाई दे। और यदि जनप्रतिनिधित्व की कसौटी सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण हो, तो ऐसे चेहरों पर समाज का ध्यान जाना स्वाभाविक है।
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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?
बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।
पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।
जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।
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मेजर ध्यानचंद जयंती पर जमुना राम मेमोरियल स्कूल में खेल सप्ताह का आगाज, कबड्डी में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम
चितबड़ागांव (बलिया)। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव में 29 अगस्त से खेल-कूद सप्ताह का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के तहत विद्यालय के चारों हाउस—रेड, ग्रीन, ब्लू और येलो—के बालक एवं बालिका वर्ग के बीच कबड्डी प्रतियोगिता कराई गई।
बालिका वर्ग में ग्रीन हाउस ने रेड हाउस को 12-10 के रोमांचक मुकाबले में हराया, जबकि येलो हाउस ने ब्लू हाउस को 20-15 से शिकस्त दी। बालिका वर्ग का खिताबी मुकाबला अगले दिन खेला जाएगा।
वहीं, बालक वर्ग में ब्लू हाउस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए येलो हाउस को 15-8 के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने जोश, अनुशासन और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन अनुशासन, समर्पण और देशप्रेम की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि खेल केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण और टीम भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों की प्रतिभा को निखरने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान इंचार्ज अरविंद चौबे, इंचार्ज नीतू मिश्रा और हैंडबॉल प्रशिक्षक मनोज कुमार पाण्डेय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
बलिया। जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उमंग और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर धर्मात्मा नंद ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं ध्वजारोहण के साथ किया।

ध्वजारोहण के बाद विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी। बच्चों ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतीकात्मक रूप धारण कर उनके त्याग, संघर्ष और देशभक्ति की गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत नंदिनी मिश्रा की मधुर आवाज में प्रस्तुत गीत ‘चिट्ठी आई है’ से हुई। उनकी प्रस्तुति ने मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद ‘जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया’ और ‘भारत की जान है तिरंगा’ जैसे देशभक्ति गीतों ने पूरे विद्यालय परिसर को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया।
कक्षा 11 के शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों ने योग के विभिन्न आसनों का शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं प्री-प्राइमरी एवं प्राइमरी के बच्चों ने ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में देशभक्ति के रंग भर दिए। कक्षा 8 की छात्राओं द्वारा पारंपरिक कजरी गीत पर प्रस्तुत नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक तुषार नंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। उन्होंने बच्चों से अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्य अतिथि, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीनियर कोऑर्डिनेटर अरविंद चौबे, जूनियर कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया।
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