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बलिया में ठप्प पड़ी राशन वितरण योजना, आधा मई बीता, अभी तक अप्रैल का राशन ही नहीं बंटा

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सरकार के द्वारा महीने में दो बार गरीबों को राशन वितरण करने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन बलिया में आधा मई गुजरने के बाद भी लोगों को अभी तक अप्रैल का राशन नसीब नहीं हुआ। जिले के कोटेेदारों के पास उपभोक्ताओं को बांटने गेहूं व चावल तो है लेकिन चना और रिफाइंड उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में अप्रैल माह का राशन वितरण अटक गया है।

जिले में 5 लाख 85 हजार 406 राशन कार्ड धारक हैं। इसमें एक लाख एक हजार 701 अंत्योदय कार्ड धारक, जबकि 4 लाख 83 हजार 705 पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारक हैं। कार्ड धारकों को मौजूदा समय में महीने में दो बार नि:शुल्क राशन का वितरण किया जाता है। पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत उपभोक्ताओं को गेहूं चावल के साथ एक किलो चना, एक लीटर रिफाइंड और एक किलो नमक दिया जाता है।

कोटेदारों के पास गेहूं चावल की उपलब्धतता है लेकिन चना और रिफाइंड नहीं है। चूंकि नमक, रिफाइंड, चना, चावल, गेंहू सब एक साथ वितरित करना है, लिहाजा 5 लाख से ज्यादा लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा। बताया जाता है नमक, चना व तेल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नफेड) को दी गई है। सूत्रों की मानें तो नई सरकार के गठन के बाद कागजी औपचारिकता पूरी नहीं होने के कारण संस्था ने आपूर्ति नहीं की है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दरअसल, नामित संस्था नफेड ने इन सामग्रियों की आपूर्ति ही गोदामों तक नहीं की है। मई महीने के अंत तक राशन वितरण हो जाने की उम्मीद है। इस संबंध में जिलापूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय का कहना है कि नफेड से मार्च तक रिफाइन-चना के आपूर्ति का अनुबंध हुआ था। नयी सरकार के गठन के बाद नए सिरे से प्रक्रिया में थोड़ा विलम्ब हुआ है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में आपूर्ति शुरू हो जाएगी। गेहूं-चावल का उठान हो गया है लेकिन चूंकि सभी सामानों का वितरण एक साथ करना है, लिहाजा रिफाइंड-चना व नमक के साथ उपभोक्ताओं तक राशन पहुंचने में दस से 15 दिन का समय लग सकता है।

राशन वितरण न होने से कार्ड धारकों में काफी ज्यादा नाराजगी है। अप्रैल माह का दो राशन मई माह में तक नहीं बंटा, जिससे कार्डधारक परेशान हैं। कई बार कोटेदारों और उपभोक्ताओं में विवाद की स्थिति भी पैदा हो रही है। वहीं कोटेदारों का कहना है कि गेहूं-चावल तो उपलब्ध है लेकिन चना, रिफाइन व नमक की उपलब्धता नहीं होने के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वितरण नहीं हो रहा है। ई-पास मशीन बन्द पड़ी है। मशीन जब तक बन्द है, राशन वितरण नहीं किया जा सकता। वहीं राशन वितरण न होने से कई परिवार के लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं।

 

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अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

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भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।

इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

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बलिया

बलिया में रोजगार का सुनहरा अवसर: 23 जून को लगेगा एक दिवसीय रोजगार मेला

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बलिया। जिले के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पाने का बेहतरीन अवसर सामने आया है। जिला सेवायोजन कार्यालय, बलिया द्वारा 23 जून 2026 को एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह रोजगार मेला सतनी सराय स्थित तारा निवास गली, भृगु आश्रम के पास स्थित जिला सेवायोजन कार्यालय परिसर में आयोजित होगा।

मेले में निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी विजन इंडिया ग्लोबल एल्यूमिनियम द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। इस पद के लिए 10वीं एवं आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ₹17,500 प्रतिमाह तक का वेतन प्रदान किया जाएगा।

कंपनी द्वारा निर्धारित आयु सीमा 18 से 28 वर्ष रखी गई है, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का कार्यस्थल हैदराबाद (तेलंगाना) होगा। अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से उनकी योग्यता एवं क्षमता के आधार पर किया जाएगा।

जिला सेवायोजन कार्यालय ने बताया कि रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले सभी अभ्यर्थियों का रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। कैंपस चयन की पूरी प्रक्रिया रोजगार संगम पोर्टल के माध्यम से संपन्न कराई जाएगी।

जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ रोजगार मेले में उपस्थित होने की अपील की है।

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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?

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बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।

लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)

 

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