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बलिया स्पेशल

बलिया में पनीर के नाम पर बेचा जा रहा है ज़हर!

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बलिया डेस्क : सावधान! सेहत ठीक करने के लिए आप जो पनीर खा रहे हैं या फिर मेहमानों के लिए जो पनीर मंगवाकर आप उन्हें शाही पनीर का स्वाद चखवा रहे हैं वह दरअसल जहर है। यही हाल लगभग सभी होटलों, रेस्टूरेंट का है यहां जो आप पनीर के तरह-तरह के पकवान आर्डर करते हैं वह सब जहर है।

जिले में आज कल मिलावटी मावा-पनीर का धंधा जोरों से चल रहा है। मिलावटखोर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। बलिया में भी इन दिनों सप्रेटा दूध से पनीर तैयार कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। चूंकि जनपद में फूड विभाग निष्क्रिय है। लिहाजा इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहे हैं।

वहीँ इस मामले पर जब फूड इंस्पेक्टर संतोष कुमार का कहना है कि हम लोग समय-समय पर जांच करते हैं तथा कार्रवाई भी करते हैं, यदि इस तरह की बात है तो हमारे पास कोई शिकायत दर्ज कराएं, हम निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे।

ऐसे कर सकते हैं मिलावटखोरों की शिकायत
उपभोक्ताओं को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आफ इंडिया की वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट पर सिटीजन कनेक्ट के नाम से एक सिंबल बना हुआ है। वहां पर उपभोक्ता को क्लिक करना होगा। उससे नया पेज खुल जाएगा। उसके बाद दिए गए निदेर्शों के मुताबिक कॉलम भरना होगा। फोटो अपलोड कीजिए और उसे भेज दीजिए। 15 दिन के भीतर स्थानीय अफसर शिकायत पर कार्रवाई कर देगा। इसकी जानकारी भी शिकायतकर्ता को दी जाएगी।

ऐसे करें असली पनीर की पहचान
पनीर का एक छोटा सा टुकड़ा अपने हाथ पर मसल कर देख ले अगर यह टूट कर बिखरने लग जाए तो समझ लीजिए पनीर मिलावटी होता है क्योंकि इसके अंदर जो केमिकल होता है वह ज्यादा दबाव सह नहीं पाता और वह बिखरने लग जाता है। हमेशा एक बात और ध्यान रखें कि नकली पनीर हमेशा ही टाइट होगा वह एक रबर की तरह नहीं होता है।

अगर आप कभी भी गलती से पनीर घर ला चुके हैं तो उसको थोड़ा सा पानी में उबालकर ठंडा कर लें जब वह ठंडा हो जाए उसके बाद कुछ बूंदें उसके ऊपर आयोडीन की कूछ बूंदे डाल दें अगर पनीर का रंग नीला पडऩे लग जाए तो समझ लीजिए कि यह बहुत मिलावटी है। जब भी आप मिलावटी पनीर खाएंगे रबर की तरह खींचता चला जाएगा, इसलिए मिलावटी पनीर से बचें क्योंकि हमारे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

रिपोर्ट- तिलक कुमार 

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बलिया

अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

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भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।

इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

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जननायक की जन्मशताब्दी पर महाअभियान, बलिया में हजारों लोगों को मिलेगा निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ

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जननायक चन्द्रशेखर जी की जन्मशताब्दी को केवल समारोहों तक सीमित न रखकर जनसेवा के संकल्प से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में 26 से 28 जून तक बलिया के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप का आयोजन होगा, जिसमें वाराणसी और लखनऊ से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीणों और जरूरतमंदों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें परामर्श देंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में आयोजित इस स्वास्थ्य सेवा अभियान का उद्देश्य गांवों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। शिविर में नेत्र, अस्थि, श्वास एवं सामान्य रोगों की जांच के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।

स्वास्थ्य शिविर का पहला चरण 26 जून को करनई स्थित वृंदावन शिक्षण संस्थान, दूसरा 27 जून को रतसर स्थित डी.एस. मेमोरियल गर्ल्स डिग्री कॉलेज तथा तीसरा 28 जून को सोहांव क्षेत्र के पिपरा कला स्थित प्रभा मंडपम में आयोजित किया जाएगा। सभी शिविर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होंगे।

आयोजकों के अनुसार लखनऊ और वाराणसी के अनुभवी चिकित्सकों की टीम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच करेगी तथा आवश्यक चिकित्सकीय सलाह भी देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिल सकेगा।

डॉ. सुषमा शेखर ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने और इस जनहितकारी पहल का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जननायक चन्द्रशेखर के जनसेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।

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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?

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बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।

लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)

 

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