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बलिया में कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाकर 59.25% मतदान
बलिया। हवाई फायरिंग, पत्थरबाजी व मारपीट के बीच जनपद के 17 ब्लाकों में कुल 1460 मतदान केंद्र अंतर्गत 3919 मतदान स्थलों में शाम छह बजे तक 59.25 प्रतिशत मतदान हुआ। इस दौरान जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ी। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी दो गज दूरी के हिसाब से लाइन लगाने में अक्षम दिखे।
मतदान के आगे बौना दिखा कोरोना
जिले में सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतार लग गई। आलम यह रहा कि महिलाओं की लंबी कतारों के चलते तेजी से मतदान होता रहा। शासन के कड़े फरमान के बाद भी कहीं भी सोशल डिस्टेंस नहीं दिखाई दिया। बूथों पर कहीं भी कोरोना का खतरा या दहशत नहीं देखा गया। बूथों पर आये मतदाताओं में कोरोना का खौफ नहीं दिखा। इस दौरान वोट गिरते रहे। बूथों पर सटकर महिलाओं ने मतदान किया।
क्षेत्र में कुछ बूथों को छोड़कर शांतिपूर्ण तरीके मतदान संपन्न हुआ। वहीं सभी थानों के एसओ अपने क्षेत्रों का भ्रमण करतें रहे। कोरोना गाइडलाइन व शांतिपूर्ण मतदान को लेकर अफसर दिशा-निर्देश देते रहे। लेकिन कहीं भी कोई सुनने को तैयार नहीं था। प्रशासन के उदासीनता के चलते कड़े धूप से बचने के लिए मतदाता बूथों पर एक दूसरे से इस कदर सटकर खड़े हो रहे थे। मानो उन्हें कोरोना का कोई भय ही न हो। उधर बड़े ही उत्सुक हो कर बड़े,बुजुर्गों में अपने मत का अधिकार पेश किया ।
चिलकहर में प्रधान प्रत्याशी को पीटा, पुलिस ने भांजी लाठियां
चिलकहर ब्लाक के रामपुर असली में हुये विवाद में प्रधान प्रत्याशी को लोगों ने पीट दिया। जानकारी होने पर पहुंची पुलिस ने लाठियां भांज कर लोगों को भगाया। चिलकहर ब्लाक के रामपुर गांव में वोटिंग प्रक्रिया के दौरान दो पक्षों में विवाद। प्रधान प्रत्याशी को जमकर पीटा गया। पहुंची पुलिस ने भांजी लाठियां। कई महिलाएं चोटिल हुई हैं। महिलाओं ने एक भाजपा नेता पर लगाया पुलिस से पिटवाने का आरोप। वहीं मामले में पुलिस ने 4 अराजक तत्वों को हिरासत में लिया ।
गड़वार में एजेंटों में जमकर झड़प
गड़वार क्षेत्र के नवादा गांव में मतदान केंद्र पर चुनावी रंजिश को लेकर दो प्रत्याशियों के दो एजेंटों में जमकर झड़प व विवाद हुआ। पुलिस एक पक्ष के एजेंट को हिरासत में लेकर थाने चली आयी। मिली जानकारी के अनुसार गड़वार थाना क्षेत्र के नवादा गांव में प्रधान पद प्रत्याशी के एजेंट अजय सिंह दूसरे पक्ष के प्रधान पद के प्रत्याशी के एजेंट आनन्द प्रकाश सिंह को पुराने चुनावी विवाद को लेकर मतदान केंद्र से गाली गलौज देकर भगाने लगे। जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद जमकर झड़प हुआ। देखते ही देखते विवाद काफी बढ़ गया। पुलिस ने किसी तरह से विवाद को शांत कराया और एक पक्ष के एजेंट अजय सिंह को हिरासत में लेकर थाने चली आयी।
मनियर के एलासगढ़ मतदान केंद्र पर हंगामा
मनियर ब्लाक के एलासगढ़ में पक्षों में फर्जी वोटिंग को लेकर ईंट पत्थर चलें जिससे भगदड़ मच गई । उसके बाद मतदान कर्मियों ने मतदान का कार्य ठप कर दिया । घटना 10बजे दिन की है। जिसमें स्थानीय पुलिस द्वारा मौके से दोनो पक्षों के 07 लोगो को गिरफ्तार किया जा चुका है ।
प्रत्याशियों को हिरासत में लेने पर भड़के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह
मुरलीछपरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सूर्यभानपुर बूथ संख्या 130 में सहायक पीठासीन अधिकारी पर खुद से मतपत्र पर मोहर मारकर डालने का आरोप लगाते हुए कई प्रत्याशी धरना पर बैठ गए। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें उठाकर थाने ले आयी और बक्सा सील कराकर भेज दिया। इसकी खबर मिलते ही
बैरिया विधायक सुरेन्द्र सिंह समर्थकों के साथ दोकटी थाने पहुंच गए और घेराव कर दिया। देर तक बंद कमरे में विधायक की एसडीएम व सीओ से बात होती रही। रात में करीब 9 बजे हिरासत में लिए गए सभी प्रत्याशियों को पुलिस ने रिहा कर दिया।
दिन भर डीएम-एसपी रहे गतिशील
जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी अदिति सिंह भी दल-बल के साथ लगातार चक्रमण करतीं रहीं। उनके साथ एसपी डाॅ विपिन ताडा भी थे। उन्होंने दो दर्जन से अधिक बूथों पर भ्रमण कर मतदान का जायजा लेती रहीं। पुलिस प्रशासन की चुस्ती व तत्परता की देन रही कि कहीं भी कोई बड़ा बवाल नहीं हुआ और शांतिपूर्ण ढ़ंग से चुनाव समाप्त हो गया। जिलाधिकारी ने सबसे पहले सोहांव की तरफ रूख किया। फेफना, नरहीं होकर सोहांव गयीं और उधर के कई बूथों का जायजा लिया, जिसमें संवेदनशील व अति संवेदनशील बूथ ज्यादा थे। फिर गड़वार क्षेत्र में उन्होंने भ्रमण किया। इसके बाद बैरिया क्षेत्र में गयीं और उधर के संवेदनशील बूथों पर जाकर शांतिपूर्ण ढंग से हो रहे मतदान को देखा।
बढ़ातीं रहीं मतदान व सुरक्षा कर्मियों का हौसला
अपने भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी अदिति सिंह मतदान की स्थिति का जायजा लेने के साथ मतदान कर्मियों व सुरक्षा में लगे जवानों का हौसला बढ़ाती रहीं। सबसे हालचाल लेती रहीं, जिससे मतदान कर्मी व सुरक्षाकर्मी भी काफी उत्साहित दिखे। जिलाधिकारी बूथों पर सबसे यह भी अपील करती रहीं कि शारीरिक दूरी बनाकर ही मतदान प्रक्रिया में भाग लें। मताधिकार का प्रयोग करने के साथ खुद को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
व्हाट्अप के जरिए बनाए रखी पूरे जिले पर नजर, देतीं रहीं निर्देश
पंचायत चुनाव को सकुशल सम्पन्न कराने में जिलाधिकारी अदिति सिंह की तत्परता की अहम भूमिका रहीं। मतदान केंद्रों पर स्वयं भ्रमण तो कीं ही, मोबाइल के जरिए उन्होंने पूरे जिले की व्यवस्था पर नजर बनाए रखीं। जहां भी छिटपुट बवाल आदि की सूचना मिली, तत्काल उस क्षेत्र में लगाए गए पुलिस अधिकारियों को निर्देशित कर भेजतीं रहीं। इसके अलावा मतदान से सम्बन्धित किसी बूथ पर थोड़ी बहुत दिक्कत की सूचना मिलने पर तत्काल सेक्टर व जोनल को व्हाट्अप व फोन के माध्यम से भेजकर ठीक कराती रहीं। इस प्रकार पूरे दिन जिलाधिकारी तत्पर रहीं, जिसका नतीजा रहा कि लाख चुनौती के बावजूद पंचायत निर्वाचन सकुषल सम्पन्न हो गया।
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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?
बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।
पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।
जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।
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सिकंदरपुर की सियासत में नया चेहरा, कौन हैं संजीव कुमार तिवारी? बिजनेस से राजनीति तक कैसे पहुंचा सफर?
बलिया। सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अब नए चेहरों की सक्रियता दिखाई देने लगी है। इसी बीच बिजनेस की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले संजीव कुमार तिवारी का नाम भी चर्चा में है। कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले संजीव कुमार तिवारी अब राजनीति के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को उठाने और विकास की नई सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं।
राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली? बिजनेस से राजनीति तक आने का विचार कैसे बना? सिकंदरपुर विधानसभा को ही राजनीतिक कर्मभूमि बनाने के पीछे क्या वजह है? इन सवालों के साथ संजीव कुमार तिवारी अपने राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर बात करते हैं।
सिकंदरपुर की समस्याओं को लेकर उनकी प्राथमिकताओं में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उनका मानना है कि क्षेत्र के विकास के लिए केवल सड़क और भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी विकास के केंद्र में रखना होगा।
बेरोजगारी और पलायन पर क्या है प्लान?
सिकंदरपुर समेत पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका जोर युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर है।
शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर क्या सोच?
संजीव कुमार तिवारी क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विधायक बनने की स्थिति में इन दोनों क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात वह कहते हैं।
क्या पुराने नेताओं से क्षेत्र के साथ न्याय नहीं हुआ?
राजनीति में नए चेहरे के तौर पर सामने आ रहे संजीव कुमार तिवारी से जब यह सवाल पूछा जाता है कि क्या अब तक के जनप्रतिनिधि क्षेत्र के साथ न्याय नहीं कर पाए, तो उनका फोकस आरोप लगाने के बजाय भविष्य की राजनीति पर दिखाई देता है। उनका कहना है कि जनता अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि काम का स्पष्ट रोडमैप चाहती है।
विधायक बने तो पहले 100 दिन में क्या करेंगे?
संजीव कुमार तिवारी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि अगर उन्हें जनता का समर्थन मिलता है तो सत्ता संभालने के शुरुआती 100 दिनों में उनकी प्राथमिकता क्या होगी। उनका कहना है कि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की पहचान, विभागवार समीक्षा और जनता से सीधे संवाद के जरिए प्राथमिकता तय की जाएगी।
क्या होगा विकास मॉडल?
संजीव कुमार तिवारी अपने विकास मॉडल को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, किसानों की समस्याओं और युवाओं के अवसरों से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि सिकंदरपुर का विकास किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विधानसभा के हर गांव और हर तबके तक विकास की पहुंच होनी चाहिए।
क्या चुनाव पैसे और जाति से जीते जाते हैं?
राजनीति में सबसे कठिन सवालों में से एक चुनाव में पैसे और जातीय समीकरण की भूमिका को लेकर भी है। संजीव कुमार तिवारी का मानना है कि चुनाव में जातीय और आर्थिक समीकरण अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन अंततः जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है। वह विकास और साफ छवि को अपनी राजनीतिक पूंजी के तौर पर पेश करते हैं।
जीतने के बाद बदल जाएंगे?
नए राजनीतिक चेहरे के सामने जनता का एक बड़ा सवाल यह भी होता है कि चुनाव से पहले किए गए वादे सत्ता में आने के बाद कितने पूरे होंगे। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार उपलब्ध रहना और अपने काम का हिसाब देना होना चाहिए।
राजनीतिक अनुभव नहीं, फिर भरोसा क्यों?
बिना लंबे राजनीतिक अनुभव के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर भी संजीव कुमार तिवारी से सवाल उठता है। उनका जवाब है कि राजनीति में अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की समस्याओं को समझने की इच्छा, ईमानदारी और काम करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उनका दावा है कि कारोबारी जीवन से मिले अनुभव को वह क्षेत्र के विकास में इस्तेमाल करना चाहते हैं।
टिकट नहीं मिला तो क्या करेंगे?
संजीव कुमार तिवारी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का एक और अहम सवाल टिकट को लेकर है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो उनकी अगली रणनीति क्या होगी? इस सवाल का जवाब ही यह तय करेगा कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित है या वह लंबे समय के लिए सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं।
क्या बलिया सदर पर भी नजर?
सिकंदरपुर से दावेदारी के बीच बलिया सदर सीट को लेकर भी उनसे सवाल किया गया। हालांकि उनकी मौजूदा राजनीतिक सक्रियता का केंद्र सिकंदरपुर दिखाई देता है, लेकिन भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर भी नजर रहेगी।
मौजूदा विधायक के काम को कैसे देखते हैं?
मौजूदा विधायक के काम को लेकर संजीव कुमार तिवारी का आकलन भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका कहना है कि जनता को जनप्रतिनिधि के काम का मूल्यांकन विकास और उपलब्धियों के आधार पर करना चाहिए। आने वाले चुनाव में जनता के सामने अपने-अपने काम और विजन के साथ विकल्प होंगे।
परिवार का कितना मिला साथ?
राजनीति में कदम रखने के फैसले में परिवार की भूमिका को भी संजीव कुमार तिवारी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन आसान नहीं होता और परिवार का सहयोग राजनीतिक सफर को मजबूती देता है।
राजनीति में आने के बाद क्या बदला?
बिजनेस से राजनीति में आने के बाद संजीव कुमार तिवारी के लिए सबसे बड़ा बदलाव लोगों के बीच लगातार रहना और उनकी समस्याओं को करीब से समझना रहा है। अब उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र के लिए काम करने का जरिया है।
युवाओं के नाम संदेश
युवाओं को लेकर संजीव कुमार तिवारी का संदेश है कि युवा राजनीति और समाज से दूरी बनाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझें और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनें। उनका मानना है कि क्षेत्र के भविष्य का सबसे बड़ा आधार युवा शक्ति है।
एक लाइन में क्यों जीतेंगे?
जब उनसे पूछा गया कि आखिर जनता उन्हें ही क्यों चुने, तो उनका जवाब विकास, बदलाव और जनता से सीधे जुड़ाव के इर्द-गिर्द है। संजीव कुमार तिवारी खुद को एक ऐसे नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो बिजनेस की दुनिया से निकलकर अब सिकंदरपुर की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि संजीव कुमार तिवारी की यह राजनीतिक पारी कितनी लंबी चलती है और सिकंदरपुर की जनता उनके विजन और दावेदारी को किस नजर से देखती है।
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मेजर ध्यानचंद जयंती पर जमुना राम मेमोरियल स्कूल में खेल सप्ताह का आगाज, कबड्डी में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम
चितबड़ागांव (बलिया)। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव में 29 अगस्त से खेल-कूद सप्ताह का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के तहत विद्यालय के चारों हाउस—रेड, ग्रीन, ब्लू और येलो—के बालक एवं बालिका वर्ग के बीच कबड्डी प्रतियोगिता कराई गई।
बालिका वर्ग में ग्रीन हाउस ने रेड हाउस को 12-10 के रोमांचक मुकाबले में हराया, जबकि येलो हाउस ने ब्लू हाउस को 20-15 से शिकस्त दी। बालिका वर्ग का खिताबी मुकाबला अगले दिन खेला जाएगा।
वहीं, बालक वर्ग में ब्लू हाउस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए येलो हाउस को 15-8 के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने जोश, अनुशासन और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन अनुशासन, समर्पण और देशप्रेम की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि खेल केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण और टीम भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों की प्रतिभा को निखरने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान इंचार्ज अरविंद चौबे, इंचार्ज नीतू मिश्रा और हैंडबॉल प्रशिक्षक मनोज कुमार पाण्डेय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
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