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बलिया के एम्बुलेंस कर्मियों की दर्द भरी कहानी, कोरोना में सब दांव पर लगा सेवा की, अब नौकरी पर बन आई है

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बलिया। लखनऊ में 21000 ऐंबुलेंस ड्राइवरों के अनिश्चितकालीन धरने के समर्थन में जिले में भी हड़ताल जारी है। जिले के 300 से अधिक एंबुलेंस ड्राइवरों ने आरटीओ अधिकारी के माध्यम से ऐंबुलेंस की चाभी डीएम को सौंप दी है और करनई में हड़ताल पर बैठ गए हैं। एंबुलेंस ड्राइवरों का कहना है कि पूर्व की कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर नई कंपनी को दिया जा रहा है जिससे एंबुलेंस सेवा में लगे कर्मचारियों की नौकरी जाने का डर है। यह मामला 23 जुलाई से चर्चा में है फिलहाल इसके प्रभाव से प्रदेश सहित जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत दयनीय बनी हुई है।

क्या है मामला- उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान साल 2012 में इमरजेंसी सर्विस108 की शुरुआत की गई थी। तब इस ऐंबुलेंस सर्विस का संचालन निजी कंपनी GVK EMRI करती रही है। साल 2014 में जब इमरजेंसी सर्विस102 की शुरुआत हुई तो इसके संचालन का भी जिम्मा भी इसी कंपनी को मिला। 2017 में प्रदेश में योगी सरकार ने आते ही एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस ALS सेवाओं का शुभारंभ किया। इसके भी संचालन का जिम्मा GVK EMRI को ही दिया गया।

अब हुआ ये कि 25 जुलाई की रात GVK EMRI का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया और सरकार ने एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस (ALS) के संचालन का जिम्मा Ziqitza Healthcare Limited को दे दिया। एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के कर्मचारियों से संबंधित इस मामले ने तब और अधिक तूल पकड़ लिया जब 102 ओर 108 एंबुलेंस सर्विस के कर्मचारियों ने भी विरोध शुरू कर दिया। इस पूरे मामले पर बलिया ख़बर की बात ऐंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रामपाल चौधरी से हुई।

उन्होंने बताया, “हमने कोरोना काल में घर जाना छोड़ दिया। दिनरात एक करके काम किया और आज ये दिन देखना पड़ रहा है। हमारी मांग ही क्या है? ठेका मुक्त कर दीजिए। नौकरी सुरक्षित कर दीजिए। समान कार्य समान वेतन दीजिए। सरकार को ये बात भी नहीं माननी है” रामपाल ने बताया कि ऐंबुलेंस ड्राइवरों की सैलरी 12200/- रुपये है और वो भी काट ली जा रही है। उनका आरोप है कि सैलरी बढ़ने के बजाए नई कंपनी कई कर्मचारियों को 12734 की जगह 10700 रुपए देना चाहती है।

उन्होंने कहा, ‘कोरोना में कहां तक हमारे काम का सम्मान किया जाना चाहिए था तो सरकार ने सैलरी ही कम करने पर लग गई है। और अब तो नौकरी पर बन आई है।’ रामपाल ने बताया कि संतकबीरनगर के रहने वाले दो ड्राइवरों ने बलिया में ड्यूटी के दौरान जान गंवा दी। उन्होंने कहा, “बलिया में दो ऐंबुलेंस ड्राइवरों की जान गई है। उनके परिवार को कोई पूछने तक नहीं गया। हम चाहते हैं कि प्रदेश भर में कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले हमारे साथी कर्मचारियों को सरकार उचित सम्मान और मुआवजा दे।”

क्या है मुख्य मांगें– एंबुलेंस में ठेकेदारी प्रथा बंद की जाए, एंबुलेंस कर्मियों की नौकरी सुरक्षित की जाए, सभी कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन में शामिल किया जाए, कोरोना काल में जान गंवाने वाले एंबुलेंस कर्मियों के परिजनों को 50 लाख की बीमा राशि और आर्थिक सहायता दी जाए, समान कार्य-समान वेतन लागू किया जाए।

सरकार ने भी दिया कंपनी का साथ- इसी बीच धरना कर रहे ऐंबुलेंस ड्राइवरों के लिए 25 जुलाई को यूपी सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं पर एस्मा एक्ट लागू कर दिया। इस दौरान एंबुलेंस संगठन के 11 पदाधिकारियों पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। साथ ही 570 से ज्यादा कर्मचारियों पर एस्मा लगाया गया। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मीडिया में कहा है कि कर्मचारियों को बर्खास्त करने से सरकार का कोई लेना देना नहीं है। ये एंबुलेंस ड्राइवर उस प्राइवेट कंपनी के नियुक्त किए गए हैं। सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती।

जबकि हड़ताल पर गए 570 से अधिक ऐंबुलेंस ड्राइवरों को सरकार ने एस्मा के तहत बर्खास्त कर दिया। इस बीच मरीजों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए एंबुलेंस कर्मचारियों से चाभियां प्राशासन को सौंप दी हैं।फिलहाल जिले में हड़ताल पर गए एंबुलेंस कर्मचारियों का आरोप है कि ज्यादातर नए ड्राइवर अप्रशिक्षित हैं,उससे मरीजों को नुकसान हो सकता है। उनका आरोप है कि कंपनी मरीजो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी कर रही है।

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बलिया के जमुना राम मेमोरियल स्कूल में सफलता का जश्न, छात्रों ने रचा इतिहास

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सीबीएसई कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही जमुना राम मेमोरियल स्कूल में खुशी की लहर दौड़ गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शानदार सफलता हासिल कर नया इतिहास रच दिया।

गुरुवार की सुबह विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जब 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले दर्जनों विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे। इस दौरान विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद जी एवं प्राचार्य अजीत कुमार सिंह ने मेधावी छात्रों का माल्यार्पण कर स्वागत किया और मिष्ठान खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

परीक्षा परिणाम में चैतन्य कुमार ने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया। अर्पित मिश्रा ने 94.6 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि सजल शेखर तिवारी 92 प्रतिशत अंक के साथ तृतीय स्थान पर रहे।

इसके अलावा अविरल तिवारी, रोहन गिरी, शिवराज चौहान, अनन्या सिंह, आस्था गुप्ता, अंशुमान सिंह, शिवम सिंह, भूमि सिंह एवं प्रिया मौर्य सहित कई छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।

विद्यालय के संस्थापक प्रबंधक प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने सभी छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले चैतन्य कुमार के पिता अनिल कुमार (प्रधानाचार्य, जूनियर हाई स्कूल नरही) तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सजल शेखर तिवारी के पिता देवेश तिवारी को भी विद्यालय परिवार द्वारा सम्मानित किया गया।

विद्यालय परिवार ने इस सफलता को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताते हुए कहा कि छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग से यह उपलब्धि संभव हो पाई है।

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बलिया के जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय में धूमधाम से हुआ ‘नव आरंभ विदाई समारोह’

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बलिया के चित्तबड़ागांव स्थित श्री जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को भावनाओं, उत्साह और रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच “नव आरंभ विदाई समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। बीए चतुर्थ व एमए द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों ने अपने सीनियर्स (बीए VI व एमए IV सेमेस्टर) को यादगार विदाई दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंजि० तुषारनंद ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सरस्वती वंदना, स्वागत गीत और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भावुक और उत्साहपूर्ण बना दिया।

प्राचार्य डॉ० अंगद प्रसाद गुप्त ने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान अतिथियों द्वारा छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को सम्मानित किया गया, वहीं सीनियर छात्रों ने गुरुजनों को अंगवस्त्र भेंट कर आभार जताया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीत, नृत्य, भजन और कविता ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नए सफर के लिए आत्मविश्वास और प्रेरणा देते हैं।

समारोह में महाविद्यालय परिवार की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि संचालन बृजेश गुप्ता, अंकिता और सलोनी ने संयुक्त रूप से किया।

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बलिया की सियासत में नई हलचल: इंजीनियर विजय कांत तिवारी की एंट्री, 2027 पर नजर!

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बलिया– अपनी राजनीतिक चेतना और संघर्षों के लिए पहचान रखने वाले बलिया की राजनीति में अब एक नया नाम तेजी से चर्चा में है। पेशे से एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में इंजीनियर रहे विजय कांत तिवारी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखकर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर वे बलिया विधानसभा क्षेत्र से एक मजबूत और प्रबल दावेदार के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जाता है कि विजय कांत तिवारी लंबे समय तक कॉरपोरेट सेक्टर में अपनी सेवाएं देने के बाद अब अपने गृह जनपद के विकास और जनसमस्याओं के समाधान के उद्देश्य से राजनीति के मैदान में उतरे हैं। उनका कहना है कि बलिया जैसे ऐतिहासिक और गौरवशाली जिले में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है, जिसे दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी।

तिवारी का मुख्य फोकस जिले में बेहतर और सुलभ चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उनका मानना है कि बलिया के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए वाराणसी या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जो एक बड़ी समस्या है। इसके साथ ही वे सड़क, नाली और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं के स्थायी समाधान पर भी जोर दे रहे हैं।

युवाओं के रोजगार को लेकर भी उन्होंने अपनी स्पष्ट योजना बताई है। विजय कांत तिवारी का कहना है कि यदि बलिया में एक सशक्त औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाए और बाहरी निवेश को आकर्षित किया जाए, तो हजारों युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। उनका मानना है कि पलायन की समस्या को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार के अवसर पैदा करना बेहद जरूरी है।

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि होने के कारण वे विकास कार्यों में तकनीकी समझ, पारदर्शिता और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की बात करते हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और निगरानी सुनिश्चित कर विकास कार्यों को गति दी जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षित और युवा चेहरों की बढ़ती मांग के बीच विजय कांत तिवारी जैसे लोगों का राजनीति में आना आने वाले समय में बलिया की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। वहीं स्थानीय लोगों के बीच भी उनकी छवि एक शिक्षित, सुलझे हुए और विकासोन्मुखी नेता के रूप में धीरे-धीरे मजबूत होती दिखाई दे रही है।

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