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मिलिए, इस बार UPPCS एग्जाम में परचम लहराने वाले बलिया के नौजवानों से!

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बलिया डेस्क : हर बार की तरह इस बार भी यूपीपीएससी के एग्जाम में बलिया के युवाओं ने अपना परचम फहराया है और जिले का नाम रौशन किया है. पीसीएस- 2018 का फाइनल रिज़ल्ट आ चुका है. यहाँ हम आपको बलिया के यूपीपीएससी में चयनित युवाओं के बारे में बताने जा रहे हैं.

शशि सिंह: बलिया सहतवार के गाँव कुसौरी कला की रहने वाली शशि ने यूपीपीएससी के एग्जाम में सफलता हासिल की है और उनका चयन क्ष्रम प्रवर्तन अधिकारी के तौर पर हुआ है.

अरविंद कुमार यादव: यूपीपीएससी के एग्जाम में अरविंद कुमार यादव का चयन बाटमाप विभाग में नियंत्रक विधिक के पद पर हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि अरविन्द पहले से ही राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. हालाँकि पिता की नौकरी की वजह से इनका परिवार चला गया.

अमर्त्य विक्रम सिंह: नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर पांच के रहने वाले अमर्त्य विक्रम ने अपने पहले प्रयास में यह एग्जाम पास कर लिया है और अब उनका चयन कार्य अधिकारी पंचायती राज में हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि अनुज के भाई अमित कुमार सिंह भी पी सी एस अधिकारी हैं. अमर्त्य विक्रम सिंह ने मनियर इंटर कॉलेज के छात्र रहे हैं, इसके बाद उन्होंने रामस्वरूप मेमोरियल कॉलेज लखनऊ से बीटेक किया.

सौरभ सिंह: बलिया के तारडीला के रहने वाले सौरब का चयन इस बार श्रम अधिकारी के पद पर हुआ है. आपको बता दें कि अभी फिलहाल सौरभ कोलकाता में एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं. इसके अलावा सौरभ मुंबई में मुम्बई में बतौर ऑडिट ऑफिसर भी अपनी सेवा दे चुके हैं. सौरब हाईस्कूल कैथवली के प्रधानाचार्य अंजनी कुमार सिंह हरिओम सिंह के बेटे हैं.

अभिनव कुमार यादवः बलिया के नगरा थाना के मेहराव गांव के रहने वाले अभिनव कुमार यादव जिन्होंने, पीसीएस-2018 में टॉप 100 में जगह बनाई है। 84वीं रैंक हासिल करने वाले अभिनव का चयन एसडीएम के पद पर हुआ है। अभिनव ने एमएलएनआईटी से बीटेक की पढ़ाई की है। अपनी सफ़लता के बारे में बात करते हुए अभिनव ने बताया की धैर्य, निरंतरता और सटीक गाइडेंस से उन्होंने यह सफलता हासिल की।

नमिता शरणः बलिया की बहू नमिता शरण ने यूपीपीएससी पीसीएस- 2018 की परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की है। उन्हें डीएसपी पद के लिए चयनित किया गया है। इससे पहले 2017 की पीसीएस परीक्षा में भी उन्हें कामयाबी मिली थी। तब उन्हें ज़िला खाद्य विपणन अधिकारी के पद पर चयनित किया गया था।

2008 में स्नातक कंप्लीट करने वाली नमिता पीसीएस बनने से पहले इलाहाबाद बैंक में अपनी सेवा दे चुकी हैं। नमिता का ससुराल बलिया के आनंद नगर इलाके में है। उनके पति का नाम शिशिर कुमार सिन्हा है, जो कैनरा बैंक में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। एक बेटी की मां नमिता का कहना है कि उनकी सफलता में उनके पति की बड़ी भूमिका है।

इरम–  विशुनीपुर मुहल्ला निवासी सेवानिवृत्त पेशकार मिर्जा नजमुदौला की बेटी इरम ने पीसीएस एग्रीकल्चर परीक्षा 2018 सामान्य वर्ग में 11वां रैंक हासिल कर जनपद का नाम रोशन किया। इरम ने बताया कि उनका आगामी लक्ष्य आईएएस परीक्षा में टॉप करना है। इरम राजकीय बालिका इण्टर कालेज बलिया  से शुरवाती पढाई की है ।

आगे की पढ़ाई उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बीएसएसी एजी एवं चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर से एमसी एजी की परीक्षा पास की है। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता-माता तथा बडे़ भाई रेहान, बड़ी बहन को देेते हुए कहा कि लगन और कठिन परिश्रम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जमुना राम पीजी कॉलेज में हुआ पौधरोपण, वन महोत्सव-2026 का आयोजन

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बलिया। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को श्री जमुना राम पीजी कॉलेज, चितबड़ागांव में ‘वन महोत्सव-2026’ के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में आम के फलदार पौधे रोपकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, चितबड़ागांव शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक शक्ति कुमार ने पांच आम के पौधे लगाकर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मानंद, उप प्राचार्य डॉ. विपिन गुप्ता, शिक्षा संकायाध्यक्ष डॉ. उदयनारायण श्रीवास्तव, डॉ. विनोद यादव, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, बृजेश गुप्ता, आरती पांडे, मंदाकिनी सिंह, मदन सिंह सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण और उनकी नियमित देखभाल करने का संदेश दिया।

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आवास योजना में लापरवाही पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश

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बलिया। जिले में राजस्व और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने भूमि आवंटन और आवासीय पट्टा वितरण में खराब प्रगति पर सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) का वेतन रोकने के आदेश दिए। साथ ही लंबित राजस्व वादों के 15 दिनों के भीतर निस्तारण और 90 दिन से अधिक पुराने मामलों को मिशन मोड में खत्म करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों से जुड़े 25 महत्वपूर्ण एजेंडों की समीक्षा करते हुए आईजीआरएस, डिजिटल क्रॉप सर्वे, स्वामित्व योजना, अंश निर्धारण, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, भूमि आवंटन, मत्स्य पट्टा, चकबंदी, बाढ़ प्रबंधन और अन्य राजस्व मामलों की प्रगति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

उन्होंने आईजीआरएस के लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। स्वामित्व योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष 1,286 गांवों में सर्वे कार्य शेष रहने पर नाराजगी जताते हुए सभी एसडीएम को अभियान चलाकर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

आगामी बाढ़ को देखते हुए डीएम ने रेड जोन के गांवों की पहचान, नावों की उपलब्धता, मेडिकल कैंप, पशुओं के चारे, राहत सामग्री और कंट्रोल रूम की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 183 संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए समुचित तैयारी रखने को भी कहा।

राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धारा 24, 33, 34, 67 और 116 से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति जानी और निर्देश दिया कि सभी लंबित वादों का 15 दिनों के भीतर निस्तारण किया जाए। 90 दिन से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्रवाई करने को कहा।

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत सभी तहसीलों में 16 प्रकरण लंबित मिलने पर उन्होंने संबंधित लेखपालों और कानूनगो के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

भूमि आवंटन की समीक्षा में रसड़ा, सिकंदरपुर और बैरिया तहसीलों में कृषि पट्टों का आवंटन नहीं होने पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। वहीं आवासीय पट्टा वितरण में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न मिलने पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश जारी किए।

मत्स्य पालन के लिए पट्टा आवंटन में बांसडीह, बलिया सदर और बैरिया तहसीलों की खराब प्रगति पर संबंधित तहसीलदारों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं चकबंदी विभाग में 4,969 मुकदमे लंबित मिलने पर संबंधित अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी करने और पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में अन्नपूर्णा भवनों के उद्घाटन, सस्ता गल्ला दुकानों के चयन, अवैध खनन पर कार्रवाई, भूमि अधिग्रहण, नदी कटान निरोधक कार्य, गंगा ऑडिटोरियम के जीर्णोद्धार, एसटीपी परियोजना तथा अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी गुलशन जी, सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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धूप में पसीने से तरबतर एक डॉक्टर! बलिया को सुषमा शेखर जैसे नेताओं की ज़रूरत क्यों है?

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सियासत में बड़े नामों की कोई कमी नहीं है। मंचों पर भाषण देने वाले नेता भी बहुत हैं और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले चेहरे भी। लेकिन कभी-कभी कुछ नज़ारे ऐसे सामने आते हैं जो राजनीति की पारंपरिक तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। वे केवल एक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि एक संदेश बन जाते हैं। बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जननायक चंद्रशेखर की जन्मशताब्दी वर्ष पर शुरू हुआ तीन दिवसीय फ्री मेडिकल कैंप ऐसा ही एक नज़ारा लेकर आया।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुत्रवधू, वरिष्ठ चिकित्सक एवं राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में शुरू हुए इस स्वास्थ्य अभियान के पहले दिन एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। वाराणसी और लखनऊ से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क परामर्श दिया और दवाएं वितरित कीं। लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा डॉक्टरों की संख्या या मरीजों की भीड़ नहीं रही, बल्कि स्वयं डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता रही।

तेज धूप थी। उमस इतनी कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल था। लेकिन डॉ. सुषमा शेखर लगातार मरीजों के बीच मौजूद रहीं। वे केवल मंच पर बैठी अतिथि नहीं थीं, बल्कि व्यवस्था संभाल रही थीं, मरीजों से बातचीत कर रही थीं, कई लोगों का स्वयं ब्लड प्रेशर (बीपी) जांच रही थीं, दवाइयों के वितरण पर नजर रख रही थीं और यह सुनिश्चित कर रही थीं कि कोई भी जरूरतमंद बिना इलाज के वापस न लौटे। उनके कपड़े पसीने से भीग चुके थे, लेकिन सेवा का उनका उत्साह कम नहीं हुआ।

शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखने को मिलता हो कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का कोई सदस्य स्वयं घंटों तक आम मरीजों के बीच खड़ा होकर स्वास्थ्य शिविर में इस तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा हो। आमतौर पर बड़े राजनीतिक परिवारों के कार्यक्रम औपचारिकता तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन यहां तस्वीर कुछ अलग थी। यहां सेवा केवल भाषण का विषय नहीं थी, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही थी।

यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. सुषमा शेखर केवल एक राजनीतिक परिवार का हिस्सा नहीं हैं। वे स्वयं एक वरिष्ठ चिकित्सक हैं। यही कारण है कि मरीजों के प्रति उनका व्यवहार किसी राजनीतिक औपचारिकता से अधिक एक डॉक्टर की संवेदनशीलता को दर्शाता है। चिकित्सा सेवा से जुड़े होने के कारण वे लोगों की जरूरतों को नजदीक से समझती हैं और शायद यही अनुभव इस पूरे अभियान में दिखाई दिया।

यह स्वास्थ्य शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है। 26 से 28 जून तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिनों तक यह अभियान चलेगा। हजारों लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क जांच, परामर्श और दवाओं का लाभ मिलेगा। यदि इस तरह के प्रयास नियमित रूप से होते रहें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है।

पिछले कुछ समय से फेफना विधानसभा क्षेत्र में डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं। उन्हें संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का आकलन भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता।

यदि राजनीति में ऐसे लोग आगे आएं जिनकी पहचान केवल भाषणों से नहीं बल्कि सेवा, शिक्षा और समाज के प्रति संवेदनशीलता से हो, तो निश्चित रूप से लोकतंत्र और मजबूत होगा। एक डॉक्टर जब जनप्रतिनिधि बनता है, तो वह केवल विकास योजनाओं की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय जरूरतों की भाषा भी समझता है।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानते थे। उनकी जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित यह स्वास्थ्य अभियान उसी विचार की एक झलक देता है। किसी भी महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारकर दी जाती है।

यह संपादकीय किसी राजनीतिक समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल की सराहना का प्रयास है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति बिना किसी सरकारी पद के, धूप की परवाह किए बिना, हजारों मरीजों के बीच खड़ा होकर सेवा करता है, तो वह दृश्य उम्मीद जगाता है।

शायद राजनीति की सबसे बड़ी ताकत भी यही है जब सत्ता की इच्छा से पहले सेवा का संस्कार दिखाई दे। और यदि जनप्रतिनिधित्व की कसौटी सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण हो, तो ऐसे चेहरों पर समाज का ध्यान जाना स्वाभाविक है।

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