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कर्फ्यू रिपोर्ट : बलिया में सड़को पर पसरा रहा सन्नाटा लेकिन गुलजार रहा कलेक्ट्रेट
बलिया। कोरोना को हराने के लिए जिले में लगा वीकेंड लॉकडाउन शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गजब का असर दिखा। ग्रामीणों बाजारों में भी खामोशी दिखाई पड़ी। लोग चाय-पान को तरस गये। सुबह से दुकानें बंद रहने से पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि चुनाव चिह्न लेने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर व ब्लाकों में प्रत्याशियों तथा उनके समर्थकों की जबर्दस्त भीड़ देखी गई। कारोना कर्फ्यू का आलम यह रहा कि सुबह से ही सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
वहीं कुछ यात्री ऐसे भी देखे गए जो पैदल ही यात्रा करना मुनासिब समझे। नगर के चित्तू पांडेय चौराहा, मालगोदाम रोड, स्टेशन रोड, चौक रोड, ओवरब्रिज, मिड्डी चौराहा, कुंवर सिंह चौराहा चारो ओर सिर्फ सन्नाटा नजर आया। सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन के अलावा रोडवेज बस नजर आई।
जमकर हुई गुटखा की कालाबाजारी
लॉकडाउन के मद्देनजर शनिवार की शाम से ही एकाएक पान गुटखा वाले दामों में बढ़ोत्तरी कर दी। आलम यह रहा कि जो कमला पसंद पांच का मिलता है वह छह से सात रूपए मिला। वहीं १० रूपए में चार पुकार की जगह सिर्फ तीन ही मिला।
रेवती में अभूतपूर्व बंदी का दिखा नजारा
कोरोना के बढ़ते प्रकोप पर लगाम लगाने के उद्देश्य से 35 घंटे की बन्दी के सरकारी आदेश के अनुपालन में रविवार को नगर सहित क्षेत्र की दुकानों की अभूतपूर्व बन्दी रही। नगर बाजार,सुपर मार्केट,सब्जी मंडी सहित हमेशा गुलजार रहने वाला बस स्टैंड भी सूना रहा। कोरोना कर्फ्यू के शुरू होने के पूर्व की शाम दुकानों पर विभिन्न सामानों को खरीदने वालों की अच्छी खासी भीड़ रही।लोग आगामी बन्दी के दृष्टिगत सब्जियां,फल तथा अन्य सामानों को खरीदने में लगे हुए देखे गए।रविवार को सुबह से ही मेडिकल स्टोर की दुकानों को छोड़कर किराना, चाय, पान, मिठाई कपड़ा,मशीनरी पार्ट्सब, बिल्डिंग मैटीरियल, स्टूडियो आदि की छोटी बड़ी दुकानें पूर्ण रूप से बन्द रहीं। सड़कों पर वाहनों का आवागमन भी ठप्प रहा। इक्के दुक्के राहगीरों को छोड़ दें तो पैदल चलने वाले भी सड़कों पर लगभग नदारद रहे।प्रभारी निरीक्षक यादवेन्द्र पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस बल नगर सहित ग्रामीण इलाकों में चक्रमण करता रहा।
बिल्थरारोड में जबरदस्त असर
पूरे उत्तर प्रदेश के अन्दर कोरोना के तेज बढ़ते संक्रमण को लेकर रविवार को 35 घंटे का सरकार की ओर से लागू कोरोना कर्फ्यू को बिल्थरारोड नगर में प्रशासन की ओर से एसडीएम सर्वेश यादव व तहसीलदार जितेन्द्र कुमार सिंह ने पुलिस बल के साथ सख्ती से पालन कराया। आवागमन को पूरी तरीके से प्रतिबन्धित कराया। सिर्फ यात्रियों को आने-जाने में ढील दी गयी। सवारी को लेकर वे भी काफी समय तक परेशान दिखे। कड़ी चंकिंग में अनेक लोगों को मुंह की खानी पड़ी। बिल्थरारोड में चाय, पान व मिठाई की दुकानों से लेकर किसी प्रकार की कोई दुकान नही खुली। दवा के लिए कोई मेडिकल स्टोर तक बन्द रहा। प्रशासन ने बीमार लोगों को सीधे सरकारी अस्पताल की डगर दिखलाई। ट्रेन व रोडवेज बस के यात्रियों के लिए इक्का-दुक्का बैट्री रिक्सा यात्रियों के लिए कुछ सहारा बने। कितने यात्री अपने घरों के लोगों को फोन कर नीजी साधन से घरों को रवाना हुए। उभांव थाने के प्रभारी निरीक्षक ज्ञानेश्वर मिश्र व पुलिस चौकी प्रभारी आर के सिंह अपने हमराहियों के साथ सक्रिय दिखे। सीओ रसड़ा शिव नारायण वैस ने भी कोरोना कर्फ्यू का जायजा लिया।
चितबड़ागांव में दवा की दुकान छोड़ सब रहा बंद
जिला प्रशासन के 35 घंटे के कर्फ्यू का असर चितबड़ागांव मुख्य बाजार एवं मुख्य मार्ग पर रविवार की सुबह से ही देखने को मिला। बाजार मे सभी की दुकानें बंद मिली। मुख्य सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन चलते नजर आए। हालांकि जरूरी सेवा जैसे दवा इत्यादि की दुकानें खुली नजर आई।
लालगंज बाजार में चारों ओर पसरा रहा सन्नाटा
वैश्विक महामारी के नियमों का पालन करते हुए लालगंज बाजार में पूर्णतया बंदी नजर आया। कहीं-कहीं इक्का-दुक्का लोग रास्ते और सड़कों पर भ्रमण करते हुए दिखाई दे रहे थे।
नगरा में लोगों को याद आया साल २०२०
कोविड के फैलते स्वरुप को देखते हुए सरकार के रविवार को लाकडाउन की घोषणा के तहत नगरा क्षेत्र में कर्फ्यू जैसे हालात रहे। आवश्यक कार्य को छोड़कर लोगों का सड़कों पर आवागमन नहीं के बराबर रहा। नगरा नगर पंचायत कस्बा सहित क्षेत्र के परसिया, मालीपुर, विशुनपुरा, नरही, डिहवा, बछईपुर, भीमपुरा, कसेसर, ताड़ी बड़ागांव, पाण्डेयपुर, सिसवार, टंडवा मोड आदि चट्टी चौराहों की दुकानें पूर्ण रुप से बन्द रहीं जिससे लोगों की भीड़ बाजारों में नहीं जुटी।
कोविड से बचाव के हर सम्भव प्रयास के क्रम जिलाधिकारी अदिति सिंह के निर्देशानुसार पुलिस प्रशासन एलर्ट मोड मे चौकन्ना नजर से लोगों में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने के बजाय घरों में दुबके रहे। कोविड वायरस से बचाव के लिए बाजार के हनुमान चौक पर बकायदा पुलिस द्वारा हार्न बंधवाकर प्रचार कराया जा रहा है। थाना क्षेत्र में कमान सम्भाले प्रभारी निरीक्षक दिनेश पाठक अपने हमराहियों के साथ चारो तरफ चक्रमण करते रहे।
लाकडाउन की स्थिति सोमवार को सुबह सात बजे तक रहा। थानाध्यक्ष ने बाहर दिखाई देने वाले लोगों को समझाते हुए कहा कि आप अपने परिवार के साथ घरों मे रहें। अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलें अगर कोई विशेष आवश्यकता हो तो कोविड नियमों के पालन मे घरों से मास्क लगाकर निकले और कार्य होते तुरन्त घरों को चले जाये।
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2027 में रसड़ा की सियासत कैसी होगी? सर्वे में सामने आए आंकड़े
बलिया: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बलिया ख़बर की ओर से कराए गए ऑनलाइन विधानसभा सर्वे में रसड़ा सीट को लेकर प्रतिभागियों की राय सामने आई है। सर्वे में पूर्व विधायक उमाशंकर सिंह के कार्यकाल के कामकाज की रेटिंग, उनके पुत्र उकेश सिंह को राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का अवसर देने, पसंदीदा राजनीतिक दल और विभिन्न पार्टियों के संभावित उम्मीदवारों को लेकर सवाल पूछे गए।
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में उमाशंकर सिंह के कार्यकाल के कामकाज की औसत रेटिंग 10 में से 7.40 दर्ज की गई। वहीं, जब प्रतिभागियों से पूछा गया कि क्या 2027 में उकेश सिंह को अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का मौका मिलना चाहिए, तो 50.9 प्रतिशत ने इसके पक्ष में राय दी। 39.1 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें मौका नहीं मिलना चाहिए, जबकि 10 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘पता नहीं’ का विकल्प चुना।
उमाशंकर सिंह के कार्यकाल को मिले 7.40 अंक
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में प्रतिभागियों से उमाशंकर सिंह के कार्यकाल के दौरान कामकाज को 1 से 10 के बीच अंक देने के लिए कहा गया। इस सवाल पर औसत रेटिंग 7.40/10 रही।
यह रेटिंग सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिभागियों द्वारा दिए गए अंकों का औसत है।
उकेश सिंह को राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का मौका देने पर क्या राय?
सर्वे में पूछा गया कि क्या 2027 में उकेश सिंह को अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का मौका मिलना चाहिए। इस सवाल पर प्रतिभागियों की राय इस प्रकार रही

आंकड़ों के अनुसार, 50.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने उकेश सिंह को मौका देने के पक्ष में जवाब दिया, जबकि 39.1 प्रतिशत ने इसके विपरीत राय रखी। दोनों विकल्पों के बीच 11.8 प्रतिशत अंकों का अंतर रहा।
पार्टी की पसंद में बसपा 34.2%, सपा 32.1%
2027 में रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से किस पार्टी का विधायक होना चाहिए, इस सवाल पर बहुजन समाज पार्टी को 34.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। समाजवादी पार्टी को 32.1 प्रतिशत और बीजेपी को 25.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

सपा में महेंद्र चौहान को 26.2% समर्थन
समाजवादी पार्टी से संभावित उम्मीदवारों की पहली पसंद पूछे जाने पर 33.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना। महेंद्र चौहान को 26.2 प्रतिशत, आदित्य गर्ग को 21.9 प्रतिशत और मान सिंह सेंगर को 18.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

बीजेपी में राम इकबाल सिंह और महंत कौशलेन्द्र गिरी को लगभग बराबर समर्थन
बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों के सवाल पर राम इकबाल सिंह को 32.2 प्रतिशत और महंत कौशलेन्द्र गिरी को 31.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। हिमांशु प्रताप सिंह को 19.7 प्रतिशत और प्रवीण सिंह को 13.2 प्रतिशत समर्थन मिला।

दोनों प्रमुख नामों के बीच 0.3 प्रतिशत अंकों का अंतर रहा।
बसपा में प्रिंस उकेश सिंह को 78.3% प्रतिभागियों की पसंद
बलिया ख़बर के ऑनलाइन विधानसभा सर्वे 2027 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से संभावित दावेदारों को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रिंस उकेश सिंह को 78.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पसंद बताया। वहीं, 21.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी अन्य दावेदार का विकल्प चुना।

सुभासपा में शिवेंद्र बहादुर सिंह को 31.9% प्रतिभागियों ने चुना
बलिया ख़बर के ऑनलाइन विधानसभा सर्वे 2027 में रसड़ा सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के संभावित दावेदारों को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवेंद्र बहादुर सिंह को 31.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पहली पसंद बताया। वहीं, 68.1 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना।
कांग्रेस में ओम लता को 74.1% प्रतिभागियों ने चुना
बलिया ख़बर के ऑनलाइन विधानसभा सर्वे 2027 में रसड़ा सीट पर कांग्रेस के संभावित दावेदारों को लेकर पूछे गए सवाल पर ओम लता को 74.1 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पहली पसंद बताया।
सर्वे के नतीजों में क्या तस्वीर सामने आई?
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में उमाशंकर सिंह के कार्यकाल की औसत रेटिंग 7.40/10 दर्ज हुई। उनके पुत्र उकेश सिंह को राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का मौका देने के सवाल पर 50.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने समर्थन किया, जबकि 39.1 प्रतिशत ने इसका विरोध किया।
पार्टी की पसंद के सवाल पर बसपा को 34.2 प्रतिशत, सपा को 32.1 प्रतिशत और बीजेपी को 25.4 प्रतिशत समर्थन मिला। सपा के संभावित उम्मीदवारों में महेंद्र चौहान और बीजेपी में राम इकबाल सिंह तथा महंत कौशलेन्द्र गिरी को लेकर प्रतिभागियों की पसंद के आंकड़े भी सामने आए।
सर्वे के बारे में जरूरी जानकारी
यह सर्वे बलिया ख़बर की ओर से ऑनलाइन माध्यम से कराया गया था। इसके नतीजे सर्वे में शामिल प्रतिभागियों की राय पर आधारित हैं। इन नतीजों को पूरी रसड़ा विधानसभा के सभी मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
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बेल्थरा रोड में टिकट से लेकर पार्टी तक, किसे पसंद कर रहे लोग? ऑनलाइन सर्वे में सामने आए चौकाने वालेआंकड़े
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विधायक हंसू राम को उनके कामकाज के लिए औसतन 10 में से 3.43 अंक मिले। वहीं, दोबारा टिकट देने के सवाल पर 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘नहीं’ कहा। पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी 39.8 प्रतिशत के साथ पहले और समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।
1. विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे अपने विधायक हंसू राम के काम को 1 से 10 के बीच कितने अंक देंगे। इस सवाल पर औसत रेटिंग 3.43 दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, दोबारा टिकट देने के सवाल पर ‘नहीं’ कहने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यह नतीजा ऑनलाइन सर्वे में शामिल लोगों की राय को दर्शाता है।
2. 2027 में किस पार्टी का विधायक चाहते हैं ?
अगले विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का विधायक बनना चाहिए, इस सवाल पर बीजेपी को सबसे अधिक 39.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।

पार्टी की पसंद के आंकड़ों में बीजेपी और सपा के बीच 3 प्रतिशत अंकों का अंतर दिखाई देता है। हालांकि, ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की पसंद पर आधारित हैं, न कि चुनाव परिणाम का अनुमान।
3. सुभासपा में प्रवीण प्रकाश पहली पसंद
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से कौन-सा नेता पहली पसंद है, इस सवाल पर प्रवीण प्रकाश को 54.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। मौजूदा विधायक हंसू राम को 25 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि 20.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना।

इस सवाल के आंकड़ों में प्रवीण प्रकाश को हंसू राम से 29.2 प्रतिशत अंक अधिक मिले।
4. बीजेपी में धनंजय कनौजिया को 34.4% समर्थन
बीजेपी से संभावित उम्मीदवार के सवाल पर धनंजय कनौजिया को 34.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पहली पसंद बताया। जबकि छठू राम को 21.9 प्रतिशत समर्थन मिला। गोरख पासवान को 18.8 और रीना राव को 15.5 प्रतिशत, 9.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं को चुना।

बीजेपी के विकल्पों में धनंजय कनौजिया को सबसे अधिक समर्थन मिला। वहीं, अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत भी 9.4 रहा।
5. समाजवादी पार्टी में राजेश पासवान को 35 .5% समर्थन
समाजवादी पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर राजेश पासवान को 35.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, संतोष गर्ग को 20.9 प्रतिशत ने अपनी पसंद बताया।

सपा के आंकड़ों में नामित नेताओं में राजेश पासवान को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। अन्य नेताओं का विकल्प 35.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा
6. बसपा में अनुज कुमार भारती को 26.9% समर्थन
बहुजन समाज पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर उपलब्ध आंकड़ों में अनुज कुमार भारती को 26.9 प्रतिशत और संतोष कुमार को 7.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, 42.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य विकल्प को प्राथमिकता दी।

इस सवाल के उपलब्ध आंकड़ों में शेष विकल्पों का पूरा विवरण नहीं है, इसलिए उनकी जानकारी अलग से नहीं जोड़ी गई है।
7. कांग्रेस में 69.2% ने चुना अन्य नेताओं का विकल्प
कांग्रेस पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर 69.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना। पारस वर्मा और अखिलेश कनौजिया को 15.4-15.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

कांग्रेस के आंकड़ों में किसी एक नामित नेता के बजाय अन्य नेताओं के विकल्प को सबसे अधिक प्रतिभागियों ने चुना।
बेल्थरा रोड में टिकट और पार्टी की पसंद पर क्या कहते हैं आंकड़े?
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में तीन प्रमुख पहलू सामने आए हैं। पहला, मौजूदा विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43 रही। दूसरा, 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने उन्हें दोबारा टिकट देने के पक्ष में राय नहीं दी। तीसरा, पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी को 39.8 प्रतिशत और सपा को 36.2 प्रतिशत समर्थन मिला।
उम्मीदवारों की पसंद के सवाल पर सुभासपा में प्रवीण प्रकाश, बीजेपी में धनंजय कनौजिया और सपा में राजेश पासवान को नामित विकल्पों में सबसे अधिक समर्थन मिला। बसपा और कांग्रेस के सवालों में अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वालों का प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा।
सर्वे के बारे में जरूरी जानकारी
यह सर्वे बलिया ख़बर द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कराया गया था। ऊपर दिए गए प्रतिशत सर्वे में शामिल प्रतिभागियों के जवाबों पर आधारित हैं। इन नतीजों को पूरी बेल्थरा रोड विधानसभा के सभी मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि सर्वे नहीं माना जाना चाहिए। ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले लोगों की पसंद और राय को सामने रखते हैं।
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राम गोविंद चौधरी की विरासत संभालने को तैयार रंजीत चौधरी, फिर उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश क्यों?
बलिया। समाजवादी राजनीति में राम गोविंद चौधरी की पहचान और उनके लंबे राजनीतिक अनुभव की अपनी अहमियत रही है। अब उनके बेटे रंजीत चौधरी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है या फिर उनके अपने ही राजनीतिक खेमे के कुछ लोग उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में पार्टी के भीतर रंजीत चौधरी की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं स्वाभाविक हैं। अखिलेश यादव का यह आश्वासन राम गोविंद चौधरी के परिवार के प्रति पार्टी के रुख को दर्शाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि इस भरोसे का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है और रंजीत चौधरी को संगठन में किस तरह की भूमिका मिलती है।
राम गोविंद चौधरी की राजनीतिक विरासत केवल पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें उनका लंबा राजनीतिक संघर्ष समाजवादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और जनता के बीच बनाया गया आधार शामिल है। रंजीत चौधरी के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने के साथ अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की चुनौती भी है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि रंजीत चौधरी को लेकर कुछ लोग उन्हें अपेक्षित महत्व देने के बजाय उनकी भूमिका को सीमित करके पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया में उनकी राजनीतिक हैसियत और सक्रियता को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस तरह की चर्चाओं के पीछे किन लोगों की भूमिका है, इसे लेकर कोई ठोस तथ्य सामने आना जरूरी है।
राजनीतिक दलों में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संगठन की भी होती है। यदि पार्टी नेतृत्व किसी वरिष्ठ नेता के परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा देता है, तो उस भरोसे को व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। रंजीत चौधरी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देना और संगठन में उनकी भूमिका स्पष्ट करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अब निगाहें समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर हैं। अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रंजीत चौधरी को अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिए किस तरह का अवसर मिलता है। आखिरकार, विरासत को सम्मान देना केवल आश्वासन देने से नहीं, बल्कि योग्य अवसर और जिम्मेदारी देने से भी जुड़ा होता है।






