बलिया
बलिया जेल में पति से मिलने पहुंची महिला ने पति के साथ खाया जहर!
बलिया में एक बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है। जहां जिला कारागार में पति से मिलने गई पत्नी ने अपने पति के साथ मिलकर जहरीला पदार्थ खा लिया। बेहोश होने पर जेल प्रशासन ने दंपति को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां पति की हालत नाजुक होने पर डॉक्टर्स ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया।
जानकारी के मुताबिक पति सूरज साहनी उम्र 25 से मिलने के लिए उनकी पत्नी नीलम साहनी उम्र 23 निवासी डुमरी थाना बांसडीहरोड बुधवार को जिला जेल पहुंची थी। नियमानुसार दोनों की मुलाकात हुई और दोनों बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान दोनों ने बिस्किट खाया, जिसके बाद उनकी स्थिति बिगड़ने लगी। और दोनों बेहोश हो गए।
दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हालत नाजुक होने पर डॉक्टर्स ने पति सूरज को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। इस घटना के बाद जेल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अब देखना होगा कि मामले की जांच में क्या कुछ सामने आता है। फिलहाल आत्महत्या की कोशिश का कारण भी पता नहीं चल पाया है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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