बलिया
जल परिवहन का हब बनेगा बलिया, लोगों को मिलेगा रोजगार- परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह
बलिया जल्द ही जल परिवहन का हब बनेगा। प्रदेश सरकार के परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी में वाराणसी से हल्दिया तक विकसित हो रहे राष्ट्रीय जनमार्ग नंबर एक के बीच बलिया का भी जल परिवहन में महत्वपूर्ण स्थान होगा।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों हुए कैबिनेट में वाराणसी से बलिया के बीच करीब 15 जेट्टी बनाए जाने का प्रस्ताव पारित भी कर दिया गया है। जेट्टी के निर्माण के साथ ही यहां जहाजों के ठहराव आदि का रास्ता साफ हो जाएगा। जहाजों से सामान उतारने-चढ़ाने का काम किया जा सकेगा। यह जल मार्ग बलिया के लिए मील का पत्थर साबित होगा और जनपद में पर्यटन के एक नए युग की शुरुआत होगी।
उन्होंने कहा कि जिले में गंगा नदी में नावों का संचालन होने से लोगों को रोजगार मिलेगा। जलपरिवहन से किसानों अपने उत्पाद सीधे वाराणसी भिजवा सकेंगे। यह सड़क मार्ग से काफी सस्ता होगा। साथ ही सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होगा तो हादसों पर भी विराम लगेगा। उन्होंने कहा कि जलमार्ग के विकसित होने के बाद कटहल नाला के रास्ते इसे सीधे सुरहा ताल से जोड़ा जाएगा। यह पर्यटन के लिहाज से बहुत बड़ा काम होगा। इसे देखते हुए ही सुरहा ताल में जल्द नावों के संचालन की योजना बनाई गई है सुरहा ताल में ईको टूरिज्म की व्यवस्था स्थापित की जाएगी। कहा कि सब कुछ ठीक रहा तो बलिया में भी जल्द ही बड़े जहाज व स्पीड बोट आदि का संचालन शुरू हो जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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