बलिया स्पेशल
Ballia- यहाँ देखें चिलकहर ब्लाक के किस गावं में कौन बना प्रधान, देखें पूरी सूची
| ग्राम पंचायत | पद का आरक्षण | उम्मीदवार | पिता/पति | उम्मीदवार की जाति/वर्ग | शैक्षिक योग्यता | लिंग | प्राप्त वैध मत | प्राप्त मत % | मतदान % | परिणाम | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 10 – चिलकहर | 3 – पहाडपुर | अनुसूचित जाति | अभय | सुभाष | अनुसूचित जाति | इंटर | पुरुष | 796 | 54.26 | 67.94 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 5 – अनदौर | अन्य पिछड़ा वर्ग महिला | पिंकी | अजय | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | महिला | 380 | 37.48 | 69.3 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 7 – मटिही | अनुसूचित जाति | संतोष | रामबचन | अनुसूचित जाति | हाईस्कूल | पुरुष | 664 | 45.86 | 63.54 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 8 – कल्यानीपुर | अन्य पिछड़ा वर्ग | सुनिल कुमार चौहान | रामजी चुहन | अन्य पिछडा बर्ग | जूनियर हाईस्कूल | पुरुष | 318 | 28.96 | 68.01 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 9 – सहदेश | अनुसूचित जाति | मुरली राम | रामलक्षण | अनुसूचित जाति | प्राईमरी | पुरुष | 534 | 48.55 | 59.1 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 10 – ज0 न0 मरगूपुर | महिला | शारदा | मुसाफिर | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 504 | 40.35 | 66.89 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 11 – सलेमपुर | अन्य पिछड़ा वर्ग महिला | कमला देवी | राम चन्द्र जायसवाल | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 581 | 46.22 | 72.95 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 13 – इसारी | अन्य पिछड़ा वर्ग | ओमप्रकाश यादव | श्रीकांत यादव | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | पुरुष | 403 | 49.09 | 67.73 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 15 – वीर भाटी | महिला | चिन्ता | धनन्जय | अनारक्षित | प्राईमरी | महिला | 246 | 29.96 | 68.92 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 16 – इन्दरपुर | अनारक्षित | शिवजी | गणेश | अनुसूचित जाति | प्राईमरी | पुरुष | 370 | 27.19 | 71.79 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 18 – गौरा | अनारक्षित | दिनेश | महीबर प्रसाद | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | पुरुष | 670 | 57.51 | 77.38 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 20 – खलीलपुर | अन्य पिछड़ा वर्ग | अनोद | जय नरायण | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | पुरुष | 619 | 59.86 | 64.98 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 21 – उचेड़ा | अन्य पिछड़ा वर्ग महिला | उर्मिला | गुलाब | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 804 | 46.72 | 63.65 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 22 – तद्दीपुर | अन्य पिछड़ा वर्ग महिला | नन्त्रा देवी | गोवर्धन | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | महिला | 326 | 34.87 | 61.69 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 23 – फत्तेपुर | अनारक्षित | रामाशीष | तेजबहादुर | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | पुरुष | 437 | 55.6 | 78.98 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 24 – गुरगुजपुर | अनारक्षित | दिनेश कुमार | सालिक | अनुसूचित जाति | इंटर | पुरुष | 263 | 35.49 | 69.87 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 25 – गोपालपुर | महिला | सुमन पाण्डेय | विन्देश्वरी पाण्डेय | अनारक्षित | इंटर | महिला | 788 | 50.74 | 65.54 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 26 – चिन्तामणिपुर | अनुसूचित जाति महिला | रिंकू | जीतेन्द्र | अनुसूचित जाति | स्नातक | महिला | 605 | 53.26 | 58.61 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 27 – नराछ | अन्य पिछड़ा वर्ग | मनोज | रामनारायण | अन्य पिछडा बर्ग | हाईस्कूल | पुरुष | 473 | 54.68 | 75 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 28 – कैथीकला | अनुसूचित जाति | हरीश कुमार | शिवदाश राम | अनुसूचित जाति | इंटर | पुरुष | 320 | 29.8 | 68.23 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 29 – मझौवा | अनुसूचित जाति महिला | सुमित्रा | गुरुचरण | अनुसूचित जाति | प्राईमरी | महिला | 230 | 28.12 | 70.3 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 30 – रामपुर | अनारक्षित | मुनेन्द्र प्रसाद चौहान | लहरी चौहान | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | महिला | 503 | 52.18 | 68.91 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 32 – रामपुर असली | अन्य पिछड़ा वर्ग महिला | उमरावति | सुरेन्द्र यादव | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 535 | 43.43 | 68.66 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 33 – जोगापुर | अनारक्षित | रिंकू | अजयशंकर | अन्य पिछडा बर्ग | स्नातक | पुरुष | 263 | 44.13 | 75.95 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 34 – बडसरी | अनुसूचित जनजाति | रामानंद | परमा | अनुसूचित जाति | प्राईमरी | पुरुष | 525 | 40.29 | 63.34 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 35 – थुम्भामोहन | अनारक्षित | पुष्पा | अनिरुद्ध यादव | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 497 | 41.21 | 75.17 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 40 – कुकुरहाँ | अनारक्षित | गौरीशंकर प्रसाद | सुचित प्रसाद | अन्य पिछडा बर्ग | इंटर | पुरुष | 445 | 34.39 | 67.78 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 42 – पखनपुरा | अनारक्षित | विक्की | राजेश यादव | अन्य पिछडा बर्ग | स्नातक | महिला | 576 | 72.27 | 80.12 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 43 – ताखा | महिला | शीला तिवारी | संतोष तिवारी | अनारक्षित | प्राईमरी | महिला | 350 | 29.31 | 63.16 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 44 – पाण्डेयपुर सवन | महिला | मोनिका | सुमेश्वर | अनारक्षित | स्नातक | महिला | 674 | 76.94 | 67.3 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 47 – बसनवार | अनुसूचित जाति | सुभाष | जनई | अनुसूचित जाति | स्नातक | पुरुष | 218 | 22.11 | 65.15 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 48 – रघुनाथपुर | अनारक्षित | विनय कुमार पाण्डेय | पारस नाथ पाण्डेय | अनारक्षित | स्नातक | पुरुष | 247 | 36.06 | 68.82 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 49 – पचहुआ | अनारक्षित | हरेराम | बलेसर | अन्य पिछडा बर्ग | हाईस्कूल | पुरुष | 472 | 41.11 | 68.78 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 50 – कझारी | अनारक्षित | अशोक कुमार यादव | कैलाश यादव | अन्य पिछडा बर्ग | स्नातक | पुरुष | 439 | 47.93 | 74.53 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 51 – कोड़रा | अनारक्षित | कंचन | हरिकेश | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | महिला | 416 | 29.84 | 71.79 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 52 – नफरेपुर | अनारक्षित | दीपक राजभर | जगलाल राजभर | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | पुरुष | 237 | 28.25 | 55.74 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 57 – वीरपुर | अनारक्षित | छोटेलाल | भीरगुनाथ | अन्य पिछडा बर्ग | परास्नातक | पुरुष | 544 | 49.28 | 72.72 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 59 – नदौली उर्फ पियरही | अन्य पिछड़ा वर्ग | योगेंद्र | राजवनसि | अन्य पिछडा बर्ग | प्राईमरी | पुरुष | 354 | 53.56 | 70.39 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 63 – महमूदपुर | अनुसूचित जाति | अरविन्द कुमार | उदय नारायण | अनुसूचित जाति | इंटर | पुरुष | 347 | 48.6 | 60.74 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 64 – भादपा | महिला | धनेसरा देवी | शमसेर सिंह | अनारक्षित | प्राईमरी | महिला | 356 | 38.07 | 67.29 | सविरोध |
| 10 – चिलकहर | 66 – गुरवा | अनारक्षित | दीनानाथ | भागीरथ | अनुसूचित जाति | स्नातक | पुरुष | 134 | 20 | 64 | सविरोध |
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आवास योजना में लापरवाही पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश
बलिया। जिले में राजस्व और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने भूमि आवंटन और आवासीय पट्टा वितरण में खराब प्रगति पर सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) का वेतन रोकने के आदेश दिए। साथ ही लंबित राजस्व वादों के 15 दिनों के भीतर निस्तारण और 90 दिन से अधिक पुराने मामलों को मिशन मोड में खत्म करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों से जुड़े 25 महत्वपूर्ण एजेंडों की समीक्षा करते हुए आईजीआरएस, डिजिटल क्रॉप सर्वे, स्वामित्व योजना, अंश निर्धारण, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, भूमि आवंटन, मत्स्य पट्टा, चकबंदी, बाढ़ प्रबंधन और अन्य राजस्व मामलों की प्रगति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया।
उन्होंने आईजीआरएस के लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। स्वामित्व योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष 1,286 गांवों में सर्वे कार्य शेष रहने पर नाराजगी जताते हुए सभी एसडीएम को अभियान चलाकर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
आगामी बाढ़ को देखते हुए डीएम ने रेड जोन के गांवों की पहचान, नावों की उपलब्धता, मेडिकल कैंप, पशुओं के चारे, राहत सामग्री और कंट्रोल रूम की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 183 संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए समुचित तैयारी रखने को भी कहा।
राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धारा 24, 33, 34, 67 और 116 से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति जानी और निर्देश दिया कि सभी लंबित वादों का 15 दिनों के भीतर निस्तारण किया जाए। 90 दिन से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्रवाई करने को कहा।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत सभी तहसीलों में 16 प्रकरण लंबित मिलने पर उन्होंने संबंधित लेखपालों और कानूनगो के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
भूमि आवंटन की समीक्षा में रसड़ा, सिकंदरपुर और बैरिया तहसीलों में कृषि पट्टों का आवंटन नहीं होने पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। वहीं आवासीय पट्टा वितरण में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न मिलने पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश जारी किए।
मत्स्य पालन के लिए पट्टा आवंटन में बांसडीह, बलिया सदर और बैरिया तहसीलों की खराब प्रगति पर संबंधित तहसीलदारों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं चकबंदी विभाग में 4,969 मुकदमे लंबित मिलने पर संबंधित अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी करने और पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में अन्नपूर्णा भवनों के उद्घाटन, सस्ता गल्ला दुकानों के चयन, अवैध खनन पर कार्रवाई, भूमि अधिग्रहण, नदी कटान निरोधक कार्य, गंगा ऑडिटोरियम के जीर्णोद्धार, एसटीपी परियोजना तथा अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी गुलशन जी, सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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धूप में पसीने से तरबतर एक डॉक्टर! बलिया को सुषमा शेखर जैसे नेताओं की ज़रूरत क्यों है?
सियासत में बड़े नामों की कोई कमी नहीं है। मंचों पर भाषण देने वाले नेता भी बहुत हैं और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले चेहरे भी। लेकिन कभी-कभी कुछ नज़ारे ऐसे सामने आते हैं जो राजनीति की पारंपरिक तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। वे केवल एक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि एक संदेश बन जाते हैं। बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जननायक चंद्रशेखर की जन्मशताब्दी वर्ष पर शुरू हुआ तीन दिवसीय फ्री मेडिकल कैंप ऐसा ही एक नज़ारा लेकर आया।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुत्रवधू, वरिष्ठ चिकित्सक एवं राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में शुरू हुए इस स्वास्थ्य अभियान के पहले दिन एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। वाराणसी और लखनऊ से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क परामर्श दिया और दवाएं वितरित कीं। लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा डॉक्टरों की संख्या या मरीजों की भीड़ नहीं रही, बल्कि स्वयं डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता रही।
तेज धूप थी। उमस इतनी कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल था। लेकिन डॉ. सुषमा शेखर लगातार मरीजों के बीच मौजूद रहीं। वे केवल मंच पर बैठी अतिथि नहीं थीं, बल्कि व्यवस्था संभाल रही थीं, मरीजों से बातचीत कर रही थीं, कई लोगों का स्वयं ब्लड प्रेशर (बीपी) जांच रही थीं, दवाइयों के वितरण पर नजर रख रही थीं और यह सुनिश्चित कर रही थीं कि कोई भी जरूरतमंद बिना इलाज के वापस न लौटे। उनके कपड़े पसीने से भीग चुके थे, लेकिन सेवा का उनका उत्साह कम नहीं हुआ।
शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखने को मिलता हो कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का कोई सदस्य स्वयं घंटों तक आम मरीजों के बीच खड़ा होकर स्वास्थ्य शिविर में इस तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा हो। आमतौर पर बड़े राजनीतिक परिवारों के कार्यक्रम औपचारिकता तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन यहां तस्वीर कुछ अलग थी। यहां सेवा केवल भाषण का विषय नहीं थी, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही थी।
यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. सुषमा शेखर केवल एक राजनीतिक परिवार का हिस्सा नहीं हैं। वे स्वयं एक वरिष्ठ चिकित्सक हैं। यही कारण है कि मरीजों के प्रति उनका व्यवहार किसी राजनीतिक औपचारिकता से अधिक एक डॉक्टर की संवेदनशीलता को दर्शाता है। चिकित्सा सेवा से जुड़े होने के कारण वे लोगों की जरूरतों को नजदीक से समझती हैं और शायद यही अनुभव इस पूरे अभियान में दिखाई दिया।
यह स्वास्थ्य शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है। 26 से 28 जून तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिनों तक यह अभियान चलेगा। हजारों लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क जांच, परामर्श और दवाओं का लाभ मिलेगा। यदि इस तरह के प्रयास नियमित रूप से होते रहें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है।
पिछले कुछ समय से फेफना विधानसभा क्षेत्र में डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं। उन्हें संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का आकलन भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता।
यदि राजनीति में ऐसे लोग आगे आएं जिनकी पहचान केवल भाषणों से नहीं बल्कि सेवा, शिक्षा और समाज के प्रति संवेदनशीलता से हो, तो निश्चित रूप से लोकतंत्र और मजबूत होगा। एक डॉक्टर जब जनप्रतिनिधि बनता है, तो वह केवल विकास योजनाओं की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय जरूरतों की भाषा भी समझता है।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानते थे। उनकी जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित यह स्वास्थ्य अभियान उसी विचार की एक झलक देता है। किसी भी महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारकर दी जाती है।
यह संपादकीय किसी राजनीतिक समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल की सराहना का प्रयास है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति बिना किसी सरकारी पद के, धूप की परवाह किए बिना, हजारों मरीजों के बीच खड़ा होकर सेवा करता है, तो वह दृश्य उम्मीद जगाता है।
शायद राजनीति की सबसे बड़ी ताकत भी यही है जब सत्ता की इच्छा से पहले सेवा का संस्कार दिखाई दे। और यदि जनप्रतिनिधित्व की कसौटी सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण हो, तो ऐसे चेहरों पर समाज का ध्यान जाना स्वाभाविक है।
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एक साल से धूल फांक रही करोड़ों की जांच सुविधा, बांसडीह सीएचसी में नहीं चालू हो सकी बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन
बांसडीह (बलिया)। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बांसडीह में स्थापित की गई बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निष्क्रिय पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग की यह महत्वपूर्ण मशीन अस्पताल परिसर तक पहुंचने के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जानकारी के अनुसार, मशीन के संचालन से लीवर फंक्शन टेस्ट, किडनी प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, कार्डियक प्रोफाइल, कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन और आयरन समेत करीब 30 प्रकार की महत्वपूर्ण जांचें सीएचसी स्तर पर ही उपलब्ध हो सकती हैं। फिलहाल इन जांचों के लिए मरीजों को जिला अस्पताल या निजी पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।
सीएचसी बांसडीह में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। सामान्य जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर बीमारियों से जुड़ी कई आवश्यक जांचों का अभाव बना हुआ है। ऐसे में मशीन का चालू होना क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अनुमान है कि इससे क्षेत्र की लगभग 40 हजार आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर एक अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण है, जिसे क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइजर भी कहा जाता है। यह रक्त, प्लाज्मा और सीरम जैसे जैविक नमूनों की रासायनिक जांच कर विभिन्न रोगों के सटीक निदान में मदद करता है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अभय नारायण राय ने कहा कि उन्हें मशीन के स्थापित न होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराकर मशीन को शीघ्र चालू कराने की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ ने कहा कि मशीन के संचालन से बांसडीह सीएचसी में कई महत्वपूर्ण जांचें शुरू हो जाएंगी, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। अब क्षेत्रवासियों को मशीन के जल्द शुरू होने का इंतजार है।


