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मंत्री उपेंद्र तिवारी के पेट्रोल वाले बयान पर क्या है बलिया के लोगों की राय?

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बलिया के फेफना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं उपेंद्र तिवारी। उत्तर प्रदेश सरकार में युवा कल्याण मंत्री का पद उपेंद्र तिवारी के पास ही है। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे उपेंद्र तिवारी इन दिनों अपने एक बयाने के चलते सुर्खियों में बने हुए हैं। उपेंद्र तिवारी आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में उरई गए हुए थे। यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल आभी बहुत सस्ता है।

उपेंद्र तिवारी ने कहा कि योगी जी और मोदी जी के नेतृत्व में 2014 के बाद से प्रति व्यक्ति आय दोगुना हो गया है। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से देखा जाए तो पेट्रोल-डीजल बहुत महंगा नहीं है। लेकिन उपेंद्र तिवारी यहीं नहीं रुके। आसमानी दावों की बौछार करते हुए उन्होंने कहा कि 95 फीसदी लोग पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

बलिया से आने वाले मंत्री उपेंद्र तिवारी के इस बयान पर जमकर बवाल कटा हुआ है। बलिया खबर ने बलिया के स्थानिय नेताओं और लोगों से उपेंद्र तिवारी के बयान पर उनकी राय जानने के लिए बातचीत की।

बलिया के छात्र नेता अतुल पांडेय ने बलिया खबर से कहा कि “मंत्री जी का बयान पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। पेट्रोल-डीजल की महंगाई का सीधा असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। बलिया के अलग-अलग इलाकों से विद्यार्थी कोचिंग करने के लिए जिला मुख्यालय आते हैं। क्योंकि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर की कोचिंग यहीं है। बात की बांसडीह से जिला मुख्यालय तक के किराए की तो पहले किराया था दस रुपए। लेकिन अब तीस रुपए लगते हैं। इस तरह हर रोज पढ़ने-लिखने वालों की जेब से सौ रुपए जा रहा है।”

अतुल पांडेय समझाते हैं कि “पेट्रोल और डीजल की महंगाई का असर सिर्फ उन पर ही नहीं पड़ा है जिनके पास अपनी गाड़ी है। बल्कि इसका असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किराए पर भी पड़ा है। जो आम लोगों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।”

बलिया के शशांक तिवारी उपेंद्र तिवारी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि “मंत्री जी सही कह रहे हैं कि 95 फीसदी लोगों के पास वो मुफ्त वाली गाड़ी नहीं है। जो उनके पास है। इसलिए उनको दिक्कत नहीं है। लेकिन जनता को तो दिक्कत है।” शशांक तिवारी बलिया के बिलहरी से ब्लॉक प्रमुख हैं। उनके पास पेट्रोल से चलने वाली चार पहिया कार है। बताते हैं कि पेट्रोल की बढ़ी कीमत ने इन दिनों गाड़ी पर ब्रेक लगाया हुआ है।

बलिया के ही विकेश सिंह सोनू ने मंत्री उपेंद्र तिवारी के बयान पर कहा कि “मंत्री जी की दिमागी हालत ठीक नहीं है। आज के समय में 95 फीसदी लोग गाड़ियों से चल रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की महंगाई से लोग परेशान हैं। लेकिन मंत्री जी को दिख नहीं रहा है।” विकेश सिंह सोनू कहते हैं कि “पहले हमलोग दो हजार का तेल अपनी गाड़ी में डलवाते थे तो लखनऊ जाकर चले आते थे। अभी ये हालत है कि पांच हजार का तेल भरवाने पर सिर्फ एक तरफ से लखनऊ जा पाते हैं।”

समाजवादी पार्टी के नेता और बलिया से जिला पंचायत सदस्य राणा यादव ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि आज घर-घर में लोगों ने गाड़ी रखी है। चार पहिया नहीं तो दो पहिया तो होगा ही। लेकिन मंत्री जी को लग रहा है कि 95 फीसदी लोगों के पास गाड़ी नहीं। लोग महंगाई की मार से त्रस्त हैं। सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री की ओर से इस तरह की बयानबाजी गलत है। ये लोग अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

बलिया के बैरिया विधानसभा सीट से विधायक रह चुके सुभाष यादव ने मंत्री उपेंद्र तिवारी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि “ये शर्मिंदगी भरी बात है कि प्रदेश के मंत्री को पेट्रोल-डीजल की महंगाई नहीं दिख रही है।” सुभाष यादव ने कहा कि “कुछ लोगों की आदत होती है कि कुछ भी बयान देकर सुर्खियों में बने रहने का। मुझे लगता है कि उपेंद्र तिवारी ने ये बयान इसी इरादे से दिया गया है। मंत्री जी को बताना चाहिए कि क्या सिर्फ गाड़ी चलाने के लिए ही पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल होता है? खेती किसानी के काम में भी डीजल लगती है। जनता में हलकान मची है महंगाई को लेकर।”

गौरतलब है कि जब उपेंद्र तिवारी के बयान पर बखेड़ा खड़ा हुआ तब उन्होंने एक सफाई भी दी। उपेंद्र तिवारी पहले तो पत्रकारों पर ही भड़के। उन्होंने कहा कि “मेरे पूरे बयान को सुनिए। मैंने पेट्रोल से चलने वाली चार पहिया गाड़ियों की बात कही थी।” इसके बाद उपेंद्र तिवारी की टोन बदल गई। उन्होंने कहा कि “हम लोग बेबाक बोलते हैं। बेबाक समझ रखते हैं और कभी नशे में नहीं रहते हैं। नशा में रहकर लिखने वाले लोग हर वर्ग में हैं, पत्रकारिता क्षेत्र में भी हैं और राजनीतिक क्षेत्र में भी हैं।”

सवाल है कि क्या वाकई पेट्रोल और डीजल सस्ती है? बलिया जिले में 23 अक्टूबर यानी आज पेट्रोल 104.87 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। डीजल की कीमत जिले में आज 97.04 रुपए प्रति लीटर है।

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आवास योजना में लापरवाही पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश

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बलिया। जिले में राजस्व और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने भूमि आवंटन और आवासीय पट्टा वितरण में खराब प्रगति पर सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) का वेतन रोकने के आदेश दिए। साथ ही लंबित राजस्व वादों के 15 दिनों के भीतर निस्तारण और 90 दिन से अधिक पुराने मामलों को मिशन मोड में खत्म करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों से जुड़े 25 महत्वपूर्ण एजेंडों की समीक्षा करते हुए आईजीआरएस, डिजिटल क्रॉप सर्वे, स्वामित्व योजना, अंश निर्धारण, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, भूमि आवंटन, मत्स्य पट्टा, चकबंदी, बाढ़ प्रबंधन और अन्य राजस्व मामलों की प्रगति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

उन्होंने आईजीआरएस के लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। स्वामित्व योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष 1,286 गांवों में सर्वे कार्य शेष रहने पर नाराजगी जताते हुए सभी एसडीएम को अभियान चलाकर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

आगामी बाढ़ को देखते हुए डीएम ने रेड जोन के गांवों की पहचान, नावों की उपलब्धता, मेडिकल कैंप, पशुओं के चारे, राहत सामग्री और कंट्रोल रूम की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 183 संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए समुचित तैयारी रखने को भी कहा।

राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धारा 24, 33, 34, 67 और 116 से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति जानी और निर्देश दिया कि सभी लंबित वादों का 15 दिनों के भीतर निस्तारण किया जाए। 90 दिन से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्रवाई करने को कहा।

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत सभी तहसीलों में 16 प्रकरण लंबित मिलने पर उन्होंने संबंधित लेखपालों और कानूनगो के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

भूमि आवंटन की समीक्षा में रसड़ा, सिकंदरपुर और बैरिया तहसीलों में कृषि पट्टों का आवंटन नहीं होने पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। वहीं आवासीय पट्टा वितरण में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न मिलने पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश जारी किए।

मत्स्य पालन के लिए पट्टा आवंटन में बांसडीह, बलिया सदर और बैरिया तहसीलों की खराब प्रगति पर संबंधित तहसीलदारों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं चकबंदी विभाग में 4,969 मुकदमे लंबित मिलने पर संबंधित अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी करने और पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में अन्नपूर्णा भवनों के उद्घाटन, सस्ता गल्ला दुकानों के चयन, अवैध खनन पर कार्रवाई, भूमि अधिग्रहण, नदी कटान निरोधक कार्य, गंगा ऑडिटोरियम के जीर्णोद्धार, एसटीपी परियोजना तथा अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी गुलशन जी, सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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धूप में पसीने से तरबतर एक डॉक्टर! बलिया को सुषमा शेखर जैसे नेताओं की ज़रूरत क्यों है?

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सियासत में बड़े नामों की कोई कमी नहीं है। मंचों पर भाषण देने वाले नेता भी बहुत हैं और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले चेहरे भी। लेकिन कभी-कभी कुछ नज़ारे ऐसे सामने आते हैं जो राजनीति की पारंपरिक तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। वे केवल एक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि एक संदेश बन जाते हैं। बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जननायक चंद्रशेखर की जन्मशताब्दी वर्ष पर शुरू हुआ तीन दिवसीय फ्री मेडिकल कैंप ऐसा ही एक नज़ारा लेकर आया।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुत्रवधू, वरिष्ठ चिकित्सक एवं राज्यसभा सांसद नीरज शेखर की पत्नी डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में शुरू हुए इस स्वास्थ्य अभियान के पहले दिन एक हजार से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। वाराणसी और लखनऊ से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निःशुल्क परामर्श दिया और दवाएं वितरित कीं। लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा डॉक्टरों की संख्या या मरीजों की भीड़ नहीं रही, बल्कि स्वयं डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता रही।

तेज धूप थी। उमस इतनी कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल था। लेकिन डॉ. सुषमा शेखर लगातार मरीजों के बीच मौजूद रहीं। वे केवल मंच पर बैठी अतिथि नहीं थीं, बल्कि व्यवस्था संभाल रही थीं, मरीजों से बातचीत कर रही थीं, कई लोगों का स्वयं ब्लड प्रेशर (बीपी) जांच रही थीं, दवाइयों के वितरण पर नजर रख रही थीं और यह सुनिश्चित कर रही थीं कि कोई भी जरूरतमंद बिना इलाज के वापस न लौटे। उनके कपड़े पसीने से भीग चुके थे, लेकिन सेवा का उनका उत्साह कम नहीं हुआ।

शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखने को मिलता हो कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का कोई सदस्य स्वयं घंटों तक आम मरीजों के बीच खड़ा होकर स्वास्थ्य शिविर में इस तरह सक्रिय भूमिका निभा रहा हो। आमतौर पर बड़े राजनीतिक परिवारों के कार्यक्रम औपचारिकता तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन यहां तस्वीर कुछ अलग थी। यहां सेवा केवल भाषण का विषय नहीं थी, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रही थी।

यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. सुषमा शेखर केवल एक राजनीतिक परिवार का हिस्सा नहीं हैं। वे स्वयं एक वरिष्ठ चिकित्सक हैं। यही कारण है कि मरीजों के प्रति उनका व्यवहार किसी राजनीतिक औपचारिकता से अधिक एक डॉक्टर की संवेदनशीलता को दर्शाता है। चिकित्सा सेवा से जुड़े होने के कारण वे लोगों की जरूरतों को नजदीक से समझती हैं और शायद यही अनुभव इस पूरे अभियान में दिखाई दिया।

यह स्वास्थ्य शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है। 26 से 28 जून तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिनों तक यह अभियान चलेगा। हजारों लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क जांच, परामर्श और दवाओं का लाभ मिलेगा। यदि इस तरह के प्रयास नियमित रूप से होते रहें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती है।

पिछले कुछ समय से फेफना विधानसभा क्षेत्र में डॉ. सुषमा शेखर की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं। उन्हें संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीदवार कौन होगा, इसका निर्णय राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का आकलन भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता।

यदि राजनीति में ऐसे लोग आगे आएं जिनकी पहचान केवल भाषणों से नहीं बल्कि सेवा, शिक्षा और समाज के प्रति संवेदनशीलता से हो, तो निश्चित रूप से लोकतंत्र और मजबूत होगा। एक डॉक्टर जब जनप्रतिनिधि बनता है, तो वह केवल विकास योजनाओं की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय जरूरतों की भाषा भी समझता है।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानते थे। उनकी जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित यह स्वास्थ्य अभियान उसी विचार की एक झलक देता है। किसी भी महान नेता को सच्ची श्रद्धांजलि केवल माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारकर दी जाती है।

यह संपादकीय किसी राजनीतिक समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल की सराहना का प्रयास है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति बिना किसी सरकारी पद के, धूप की परवाह किए बिना, हजारों मरीजों के बीच खड़ा होकर सेवा करता है, तो वह दृश्य उम्मीद जगाता है।

शायद राजनीति की सबसे बड़ी ताकत भी यही है जब सत्ता की इच्छा से पहले सेवा का संस्कार दिखाई दे। और यदि जनप्रतिनिधित्व की कसौटी सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण हो, तो ऐसे चेहरों पर समाज का ध्यान जाना स्वाभाविक है।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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