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बलिया के किस विधायक पर कितने मुकदमे दर्ज, इन दो पर नहीं है कोई केस?

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बलिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इन संस्थाओं ने प्रदेश के सभी वर्तमान विधायकों के आय से लेकर आपराधिक विवरणों तक का विश्लेषण किया है। इसमें बलिया जिले के भी सात विधायकों के नाम शामिल हैं। बलिया खबर ने एडीआर की रिपोर्ट के हवाले से जिले के विधायकों के आय पर रिपोर्ट की थी। अब बारी है अपराध का लेखाजोखा बताने की।

बलिया में सात विधानसभा सीटें हैं। बैरिया, फेफना, रसड़ा, बलिया सदर, सिकंदरपुर, बांसडीह। इन सात में से पांच सीटों पर सूबे की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। जबकि एक-एक सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के विधायक काबिज हैं। इन सात में से छह विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक बांसडीह से सपा के विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी पर एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार बेल्थरा रोड से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया के खिलाफ भी पुलिस के पास कोई मुकदमा दर्ज नहीं है।

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सुरेंद्र सिंह– बैरिया सीट से भाजपा के सुरेंद्र सिंह विधायक हैं। सुरेंद्र सिंह के खिलाफ कुल आठ मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आठ आईपीसी की गंभीर धाराओं में जबकि 15 अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। सभी मामले बैरिया पुलिस थाने में ही दर्ज किए गए हैं। सुरेंद्र सिंह पर दर्ज मुकदमे या तो पेंडिंग में हैं या फिर उच्च न्यायालय ने रोक लगा रखा है।

उपेंद्र तिवारी– फेफना विधानसभा सीट से उपेंद्र तिवारी भाजपा के विधायक हैं। उपेंद्र तिवारी के खिलाफ कुल छह मुकदमे दर्ज हैं। उनके खिलाफ 27 धाराएं लगाई गईं हैं। इनमें आईपीसी की गंभीर धाराएं हैं जबकि 21 अन्य धाराएं। उपेंद्र तिवारी के खिलाफ दो मामले फेफना पुलिस थाने में जबकि चार मामले इलाहाबाद के करनालगंज पुलिस थाने में दर्ज किए गए हैं।

उमा शंकर सिहं– बहुजन समाज पार्टी के उमा शंकर सिंह रसड़ा से विधायक हैं। उमा शंकर सिहं के खिलाफ आईपीसी की आठ धाराओं में एक मुकदमा दर्ज है। मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है। बलिया के कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज है।

आनंद स्वरूप शुक्ला -बलिया सदर सीट से आनंद स्वरूप शुक्ला विधायक हैं। भाजपा विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला के खिलाफ आईपीसी की दस धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं। कोतवाली नगर थाना में दर्ज इन दोनों मामलों में तीन आईपीसी की गंभीर धाराएं लगाई गईं हैं। जबकि सात धाराएं अन्य हैं।

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संजय यादव– भाजपा के संजय यादव बलिया के सिकंदरपुर सीट से विधायक हैं। संजय यादव के खिलाफ आईपीसी की चार धाराओं में एक मुकदमा दर्ज है। सिकंदरपुर पुलिस थाने में दर्ज इस एक मुकदमे में संजय यादव पर कोई भी गंभीर धारा नहीं लगाई गई है।

बता दें कि इलेक्शन वॉच और एडीआर का विश्लेषण उम्मीदवारों की ओर से 2017 और उसके बाद हुए उपचुनावों में निर्वाचन आयोग को दिए गए विवरण पर आधारित है। इस विश्लेषण में उत्तर प्रदेश के सभी विधायकों पर दर्ज मुकदमों का पूरा विवरण में दिया गया है। इलेक्शन वॉच और एडीआर जनप्रतिनिधियों पर इस प्रकार के विश्लेषण मतदाताओं को जागरूक करने के लिए करता है। ताकि अपना वोट देते हुए मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों के बारे में सूचनाओं के आधार पर निर्णय ले सकें।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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