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रवीश कुमार को रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित करने पर देखिये आम लोगों ने राय दी …
कल का दिन NDTV और सभी पत्रकारों के लिए एक बड़ा दिन था क्योंकि पत्रकार जगत से एक व्यक्ति को एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह पत्रकार और कोई नहीं बल्कि सबके चहेते रवीश कुमार है जो एनडीटीवी के लिए काम करते हैं उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । रवीश कुमार के अलावा चार और बड़ी हस्तियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । दोस्तों रवीश कुमार का कहना है कि यह पुरस्कार उनके फैंस और जनता की देन है जिनके कारण आज वह सम्मानित हुए हैं ।
जिस समय रवीश कुमार को यह अवार्ड मिला तो ज्यूरी ने यह कहा कि रवीश उन लोगों की आवाज बने जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता है। वह लोगों की बातों को टीवी के जरिए आगे पहुंचाते है । रवीश कुमार का काम बहुत ही सम्मानजनक है क्योंकि एक ऐसे समय में सरकार के खिलाफ बोलना जिसमें उनके खिलाफ बोलने वालों के साथ कुछ भी हो सकता था या उनकी आवाज को आसानी से दवाया जा सकता था लेकिन रवीश कुमार पीछे नहीं हटे उन्होंने अपने हिम्मत और हौसले के साथ अपनी और आम जनता के दिल की बात को आगे तक पहुंचाया । उनकी बातों को कई लोग विरोधी के तौर पर ही लेते थे जबकि वे एक सक्षम पत्रकार है ।
दोस्तों एक पत्रकार का काम बहुत ही जिम्मेदारी भरा होता है उसके कंधों पर इस बात की जिम्मेदारी होती है कि वह किस तरह आम जनता की बात सरकार तक पहुंचाता है और सरकार की बात आम जनता तक पहुंचाने का यह एक माध्यम है जिसके द्वारा सरकार और आम जनता के बीच सामंजस्य बना हुआ है।
दोस्तों हमने रवीश कुमार के बारे में आम जनता से जब पूछा कि वह कैसे व्यक्ति है या कैसे पत्रकार हैं तो जनता ने सीधा जवाब दिया कि वे एक ऐसे पत्रकार है जो निष्पक्ष बात करते हैं अन्य मीडिया का तो यह हाल है कि वे या तो सरकार के पक्ष में बात करते हैं या तो अन्य किसी पार्टी के पक्ष में लेकिन रवीश कुमार एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सच की तरफ से बात करते हैं जो बेझिझक अपना पक्ष रखने में कभी पीछे नहीं हटे । उन्होंने आम जनता के लिए बहुत कुछ किया है।
दोस्तों अब बात करें अगर इस पुरस्कार की तो यह पुरस्कार अमूमन ऐसे लोगों को दिया जाता है जो सामाजिक कार्य करते हैं । रवीश कुमार ने इस पुरस्कार के लिए एक बहुत लंबा और कठिन सफर तय किया है । आपको बता दें कि 1996 से रविश कुमार एनडीटीवी से जुड़े और शुरुआती दिनों में वह एनडीटीवी में आने वाली चिट्ठियों को छाटने का काम करते थे।
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।
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