बलिया
शराब माफिया का पता लगाने में पुलिस नाकाम, आबकारी विभाग नहीं दे रहे साथ !, 26 अक्टूबर को पकड़ी थी शराब
बलिया। अवैध शराब तस्करी रोकने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। भारी मात्रा में शराब जब्त भी की जा रही है, लेकिन माफियाओं को पकड़ने में नाकामयाब साबित हो रही है। जिससे पुलिस की किरकिरी हो रही है। पिछले 26 अक्टूबर को सुखपुरा पुलिस ने 135 पेटी (8 pm की 180 ml वाली 6480 शीशी ) शराब पकड़ी, लेकिन वास्तविक मालिक कौन है, अब तक पता नहीं चला।
सूत्रों की माने तो सुखपुरा पुलिस ने उस अनुज्ञापी का नाम जानने के लिए जिला आबकारी अधिकारी के पास पत्र पुलिस अधीक्षक के माध्यम से जिलाधिकारी के पास भेजा है। जहां से यह पत्र जिला आबकारी अधिकारी के पास पहुंचेगा। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया पुलिस ने तब अपनायी है ज़ब जिला आबकारी अधिकारी ने पुलिस के बार-बार पत्र भेजनें /फोन करने पर अनुज्ञापी का नाम नहीं बताया।
बता दे कि पुलिस ने 135 पेटी शराब को मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी करके पकड़ा गया था लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही तस्कर गाड़ी छोड़कर फरार हो गये थे। पुलिस ने शराब लदी गाड़ी को कब्जे में लेकर थाना परिसर में सीज करके खड़ा कर दिया और गाड़ी मालिक, चालक और अन्य के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करके विवेचना शुरू कर दी।
वहीं गाड़ी मालिक ने तो उच्च कोर्ट से जमानत भी करा ली है। लेकिन अब तक पुलिस न तो चालक का नाम जान पाई है, न ही किस अनुज्ञापी के यहां से यह शराब चली थी, यह जान पायी है। इन नामों को जानने के लिए स्थानीय पुलिस ने जिलाधिकारी के माध्यम से जिला आबकारी अधिकारी को पत्र भेज कर संबंधित अनुज्ञापी और चालक का नाम बताने का अनुरोध किया है।
शराब तस्करों को सजा दिलाने के लिए पुलिस आबकारी अधिकारी से उपरोक्त नामों को लिखित रूप से लेना चाहती है लेकिन आबकारी अधिकारी बलिया पता नहीं क्यों कन्नी काट रहे हैं। जनपद में तस्करी के माध्यम से बिहार शराब भेजनें मे अनुज्ञापियों का हाथ बताया जा रहा है। जिससे शराब की तस्करी रोकने में पुलिस को परेशानी हो रही है। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि अपराधियों के भागने में कहीं पुलिस की लापरवाही तो नहीं, इसकी जांच कराएंगे दोषी पाये जाने पर कार्रवाई होगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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