बलिया
Ballia : NH-31 अब भी बदहाल, फेफना के पास 9 महीने में दूसरी बार उखड़ी!
बलिया में सड़कों की बदहाली अब भी देखने को मिल रही है। करीब 9 महीने पहले बनी NH-31 में भी लापरवाही देखने को मिल रही है। कई जगह सड़क की परतें दरकने लगी हैं। खासकर फेफना से बलिया के बीच बनी सड़क की कलई खुलने लगी है। करीब एक किमी की दूरी में सड़क में जगह-जगह खराब हो गई। जिसे दुरुस्त करने का काम हो रहा है।
बता दें NH-31 कई सालों तक क्षतिग्रस्त रही। जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक 102 करोड़ का टेंडर जयपुर की कंपनी को दिया। लेकिन डेढ़ साल तक काम नहीं हुआ तो NHAI ने एजेंसी को टर्मिनेट कर नए सिरे से दिसंबर 2021 में 117 करोड़ का टेंडर निकाला। NHAI ने गाजीपुर से मांझी घाट तक की दूरी 115 किमी को 3 भाग में बांटते हुए गाजीपुर से फेफना तक 60 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर के काम को अलग-अलग 3 एजेंसियों को दिया।
लेकिन फेफना से चिरैयामोड़ तक आवंटित कार्य में मानक की अनदेखी के आरोप शुरू से ही लग रहे हैं। सड़क बनने के 2 माह बाद ही फेफना से कुछ दूरी पर उखड़ जाने पर हो हल्ला मचा तो दोबारा निर्माण हुआ। लेकिन अभी भी यही स्थिति है। फेफना से बलिया तक सड़क बनने के साथ ही कई जगह पैचिंग करनी पड़ रही है। बताया जाता है कि पहले की बनी सड़क पर ही लेपन करने के कारण यह स्थिति आई और सड़क की ऊपरी परत दरक जा रही है।
वर्तमान में पैबंद लगाने के लिए सड़क को कट किया गया है जो काफी खतरनाक साबित हो रहा है। रात के समय यह कट दिखते नहीं जिससे हादसे की संभावना बनी रहती है। इधर आजमगढ़ NHAI के पीडी एसपी पाठक ने बताया कि सड़क निर्माण के बाद 3 साल तक कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है कि कहीं भी क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत कराएं। क्षतिग्रस्त होने पर सड़क की पैचिंग के लिए कट किया जाता है, पैचिंग कार्य पूरा हो चला है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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