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बलिया – पेड़ से लटका मिला बुजुर्ग का शव, आत्महत्या का कारण अज्ञात
बलिया। दुबहड़ थाना क्षेत्र में एक ग्रामीण का शव पेड़ से लटका मिलने से सनसनी फैल गई। शव मिलने की सूचना लोगों ने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। ग्रामीण की शिनाख्त कर ली गई है। आत्महत्या का कारण अज्ञात है फिलहाल पुलिस जांच कर रही है।
दरअसल सोमवार को दुबहर थाना क्षेत्र के शिवरामपुर घाट स्थित मुक्तिधाम के पास पेड़ पर रस्सी के सहारे एक ग्रामीण का शव लटका मिला। ग्रामीण की शिनाख्त दुबहर थाना क्षेत्र के ही मोहनछपरा गांव निवासी शम्भू नाथ चौधरी (50) बेटा श्याम लाल चौधरी के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार शम्भूनाथ चौधरी सोमवार को तड़के 4 बजे ही घर से निकल गए थे।
जानकारी के मुताबिक़ दियारा क्षेत्र में फसल की कटाई करने जा रहे एक शख्स ने पेड़ से लटकते शव को देखा। जिसकी सूचना पुलिस और ग्रामीणों को दी। मौके पर दुबहड़ थाने के SI जयशंकर सिंह पुलिस टीम के साथ पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने शव की शिनाख्त के पोस्टमॉर्टम को भेजा। घटना से पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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