बलिया
ज़मीन विवाद- सीएम के पास पहुचे बैरिया विधायक, एसआईटी जांच की मांग की
बलिया. बैरिया तहसील क्षेत्र के इब्राहिमाबाद में लगने वाले सुदिष्ट बाबा पशु मेला की जमीन पर कब्जे का मामला अब-अब धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगा है। आरोप-प्रत्यारोप और नूराकुश्ती के बीच अब भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की है।
विधायक सुरेंद्र सिंह ने इस सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के संगठन प्रभारी सुनील बंसल के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मिलकर अपनी बात रखी है और उन्हें कागजात सौंपा है।
इतना ही नहीं उन्होंने प्रतिष्ठित समाचार पत्र अमर उजाला को दिए इंटरब्यू में विधायक ने कहा है कि वे इस मामले में पीछे नहीं हटेंगे और यदि मेला की जमीन से कब्जा नहीं हटा तो उसी जमीन पर बेमियादी अनशन करेंगे। इस जमीन के लिए अपनी जान तक दे देंगे।
अधिकारियों को भी लिया आड़ेहाथ
विधायक ने कहा कि जिस जमीन की रजिस्ट्री की बात की जा रही है उसमें पशु मेला लगता है ये सभी जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 200 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। यह पूरी जमीन पशु मेला की है।
विधायक ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में बताया है कि इब्राहिमाबाद ऊपरवार में भू माफियाओं द्वारा फर्जी तरीके से तहसील के भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग से 200 एकड़ जमीन पर अपना नाम अंकित करा लिया गया था।
बाद में जनता के प्रतिकार पर 1996 में पुनः वह जमीन ग्रामसभा के नाम से अंकित हो गई। इसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में भ्रस्ट तरीके से की गई चकबंदी की कार्रवाई भी निरस्त कर दी गई, लेकिन पुनः भू माफियाओं ने साजिश रचकर भ्रष्ट अधिकारियों के सहयोग से अपना नाम अंकित करा लिया। हांलाकि जनदबाव के कारण वे संबंधित भूमि पर कब्जा नहीं प्राप्त कर सके। ्बैर
मुझे नहीं है कोई आपत्ति
बैरिया विधायक ने बताया कि उन्होंने पत्र में कहा है कि सुदिष्ट बाबा का ऐतिहासिक पशु मेला सैकड़ो वर्षों से लगता चला रहा है। इसका वर्तमान में संचालन जिला पंचायत बलिया द्वारा होता है। उक्त जमीन पर जिला पंचायत द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बंधा एवं बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया है।
वहीं शासन द्वारा अग्निशमन केंद्र तथा जिला पंचायत बलिया द्वारा पशु पैठ सेड भी बनाया गया है। बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के भांजे विनय सिंह द्वारा रजिस्ट्री कराए जाने की शिकायत भी की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि रजिस्ट्री में बहुसंख्यक विक्रेताओं से फर्जी तरीके से बिना रजिस्टर्ड पावर आफ एटर्नी बनाकर रजिस्ट्री कराई गई है।
पूर्व में भू माफियाओं पर केस भी दर्ज किया गया है। मामले को लेकर जब सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के भांजे विनय सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पहली बात तो ये कि विधायक जी होते कौन हैं उनकी जमीन की रजिस्ट्री मामले में बोलने वाले। यदि कुछ गलत हुआ है तो संबंधित विभाग है, कोर्ट है, जांच कराई जा सकती है।
मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि इसे लेकर प्रशासन अपने स्तर से जांच करा ले, ताकि सबकुछ क्लीयर हो जाए। विधायक जी कि इच्छा है कि एसआईटी जांच हो, मैं उसका भी स्वागत करता हूं, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
बलिया
अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन
भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।
बलिया
बलिया में रोजगार का सुनहरा अवसर: 23 जून को लगेगा एक दिवसीय रोजगार मेला
बलिया। जिले के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पाने का बेहतरीन अवसर सामने आया है। जिला सेवायोजन कार्यालय, बलिया द्वारा 23 जून 2026 को एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह रोजगार मेला सतनी सराय स्थित तारा निवास गली, भृगु आश्रम के पास स्थित जिला सेवायोजन कार्यालय परिसर में आयोजित होगा।
मेले में निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी विजन इंडिया ग्लोबल एल्यूमिनियम द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। इस पद के लिए 10वीं एवं आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ₹17,500 प्रतिमाह तक का वेतन प्रदान किया जाएगा।
कंपनी द्वारा निर्धारित आयु सीमा 18 से 28 वर्ष रखी गई है, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का कार्यस्थल हैदराबाद (तेलंगाना) होगा। अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से उनकी योग्यता एवं क्षमता के आधार पर किया जाएगा।
जिला सेवायोजन कार्यालय ने बताया कि रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले सभी अभ्यर्थियों का रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। कैंपस चयन की पूरी प्रक्रिया रोजगार संगम पोर्टल के माध्यम से संपन्न कराई जाएगी।
जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ रोजगार मेले में उपस्थित होने की अपील की है।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?
बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।
अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)
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