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ग्राउंड रिपोर्ट : बलिया में हुई किसान-मज़दूर महापंचायत का रूख क्या है?

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          किसान आंदोलन के समर्थन में सिकंदरपुर तहसील के चेतन किशोर में हुई किसान मज़दूर महापंचायत की ग्राउंड रिपोर्ट।

सिकंदरपुर । पूर्वांचल के बलिया में राकेश टिकैत ने किसान-मजदूर महापंचायत की। दिल्ली के बॉर्डरों पर जमें किसानों की खबरों के बाद पूर्वांचल के दोआब में संयुक्त किसान  मोर्चा का आंदोलन से जुड़ा हुआ यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। बलिया के तहसील सिकंदरपुर में आयोजित इस महापंचायत में हज़ारों की भीड़ जुटी।

बैठने के लिए लगाई गईं कुर्सियों और बाकी की खाली जगहों पर भी लोग मौजूद रहे। लोग राकेश टिकैत और बाकी नेताओं को सुनने आए थे। महापंचायत में आए लोगों को मालूम था कि यहां दिल्ली के किसान आंदोलन से जुड़े लोग आ रहे हैं। हमने वहां मौजूद लोगों से बात की। कृषि कानूनों को लेकर ठीक-ठाक समझ रखे वहां आए लोग इस बात से भी आश्वस्त थे कि जो बातें कही जाएंगी उसे सुनने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।

(किसान महापंचायत में 12 बजे तक पांडाल भर चुका था। )

80 साल की लीलावती भारती महिला दीर्घा में 60-70 महिलाओं के साथ बैठी थीं। पांचवी तक पढ़ी लीलावती चार दशकों से कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) से जुड़ी हुई हैं। लीलावती खेतहीन हैं। दो बेटों और तीन बेटियों के परिवार वाली लीलावती के परिवार का हरेक व्यक्ति मजदूरी करता है। तीनों कानूनों पर काफी विस्तृत बात करने के बाद लीलावती ने कहा,

‘इस कानून से किसान तो प्रभावित होंगे ही, भारी संख्या में मजदूर प्रभावित होंगे। लॉकडाउन में यह कानून लाकर किसानों की जमीन और जिंदगी के साथ धोखा किया जा रहा है। आज हम अपने गांव की महिलाओं के साथ यहां आए हैं, पूरी बात सुनेंगे और फिर आगे की लड़ाई लडे़ंगे।’

लीलावती के भीतर कमाल का आत्मविश्वास है, वो पांचवी तक पढ़े होने का जिक्र करके खुश हो जाती हैं।

पंजाब के पटियाला के मूल निवासी और 1979 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े सरदार केसर सिंह किसान-मजदूर महापंचायत में मौजूद थे। गंभीर हाव-भाव वाले सरदार केसर सिंह बलिया के बिल्थरा से मोटर पार्ट्स की दुकान संचालित करते हैं। अपने गृह जनपद में सरदार केसर सिंह छ: एकड़ की खेती भी करते हैं। किसान-मजदूर महापंचायत के सकारात्मक प्रभाव को लेकर आश्वस्त केसर सिंह कहते हैं,

‘पूर्वांचल में मजदूर-किसानों की समस्या पर अब देश के बाकी हिस्सों का भी ध्यान जाएगा। यहां MSP जितने जरूरी मुद्दे और भी हैं। जैसे, खाद-बीज की आपूर्ति, बिचौलियों का पूर्ण हस्तक्षेप वगैरह। पूर्वांचल की समस्याओं पर इस महापंचायत में आ रहे किसान नेताओं की आगे की रणनीति भी इस किसान आंदोलन को प्रभावित करेगी। इस सरकार की नीतियों से किसान, मजदूर और व्यापारी सभी परेशान है।‘अजीत राय; अपने आधे से अधिक खेतों में मछलीपालन करने लगे हैं।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा से पूर्वांचल के पदाधिकारी और आयोजनकर्ताओं में शामिल अजीत राय इस महापंचायत के प्रभाव को लेकर आश्वस्त दिखे। चार एकड़ की खेती कर रहे अजीत राय पूर्वांचल में बलिया को महापंचायत के लिए चुनने के पीछे का कारण बताते हुए कहते हैं, ‘चूंकि यह बिहार से सटा हुआ जिला है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे आखिरी छोर पर होने के कारण यहां से बिहार के सटे हुए जिलों में भी आंदोलन की सुगबुगाहट जाएगी। इसके अलावा भी  बलिया ‘बागी’ धरती है, यहां से शुरुआत हुई है तो लड़ाई लंबी चलेगी।’

11 बजे की तय समय तक लोगों का आना शुरू हो ही रहा था कि करीब 25-30 युवाओं का एक जत्था आया। उर्जा से भरे इन युवाओं ने राकेश टिकैत और जय जवान जय किसान का नारा लगाया और मंच के पास कुर्सियां ले लीं। इनमें दुरौंधा गांव के अजीत यादव भी थे। 22 साल अजीत ने बीए तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और प्रतियोगी परीक्षाएं दे रहे हैं। बलिया में संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यक्रम की जानकारी अजीत को सोशल मीडिया से मिली। अजीत ने बताया,

‘हम लोगों ने गांव में तय किया कि चला जाएगा और फिर किसान महापंचायत थी तो ट्रैक्टर-ट्राली से आने को सोचा। सब लोगों ने चंदा लगाकर तेल डलाया और आ गए’ आगे क्या करने है के सवाल पर अजीत ने कहा, ‘आज यहां जो सुना वो जाकर गांव में लोगों को बताएंगे’ अजीत के पिता दो एकड़ की खेती करते हैं। पिता के  साथ धान, गन्ना और गेंहू उपजा रहे अजीत नौकरी को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं। SSC और उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती परीक्षा के परिणामों का इंतज़ार कर रहे अजीत वर्तमान सरकार से नाराज़ हैं।

1985 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़े अहसन सहवर्ती सुबह 9 बजे से यहां मौजूद थे। चार बीघे की खेती वाले अहसन बिल्थरा के अकोप ग्रामसभा के ईकाई अध्यक्ष हैं। 1985 से संगठन के लिए काम कर रहे अहसन बताते हैं कि इस जनसभा की जिम्मेदारी भी थी इसलिए जल्दी आए।  धान और गेंहू की खेती करने वाले अहसन अपनी फसल MSP पर नहीं बेंच पाते हैं। उन्होंने बताया,

‘हम लोग के लिए फसल का उचित दाम पाना संभव नहीं है। क्रय केंद्र पर ले जाने से पहले ही बिचौलिये आ जाते हैं और कुछ मजबूरी किसान की भी होती है। हमारी मांग यही है कि एक रेट हो जाए। उसी पर बनिया भी खरीददारी करे और सरकार भी। हमारी बस यही मांग है कि छोटा-बड़ा किसान सब एक समान रेट पर बिक्री कर सकें।’

किसान महापंचायत में सिकंदरपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर से आईं अनीता देवी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। अनीता खेतहीन हैं लेकिन गांव की कुछ महिलाओं के साथ मिलकर स्वरोजगार में लगी थीं। अनीता ने हमसे बातचीत में बताया कि उनके समूह पर कर्ज है और लॉकडाउन की वजह से महिलाएं कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। अब उनके घरों पर बैंक नोटिस दे रहे हैं। सरिता ने कहा, ‘जब बड़े-बड़े पूंजिपतियों का कर्ज माफ हो जा रहा है तो हम समूह की महिलोओं का कुछ हज़ार का कर्ज मोदी जी क्यों नहीं माफ कर सकते हैं।’अनीता अपने पति के साथ आईं थीं, कर्ज न चुकने से चिंतित थीं

इसी सबके बीच छोटे-बड़े जत्थों में महापंचायत में लोग आते रहे। और करीब 1:30 पर राकेश टिकैत की गाड़ी आई। बनारस से सड़क मार्ग से गाज़ीपुर में प्रेसवार्ता करके सिकंदरपुर पहुंचे राकेश टिकैत के साथ 6-7 गाड़ियां थीं। उनके पहुंचते ही किसी समान्य राजनैतिक रैली में होने वाली भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई और मंच तक आते-आते सेल्फियों का दौर शुरू हो गया। पत्रकार दीर्घा में नौजवानों सहित तमाम लोग सेल्फियां लेते रहे। और फिर मंच से घोषणा की गई,

‘आप सब से अनुरोध है कि ऐसी स्थिति न लाएं, हम पुलिस को नहीं बुलाएंगे लेकिन आपलोगों को खुद पीछे जाना होगा’। मंच से कुछ लोगों ने पुलिस का हस्तक्षेप चाहा भी लेकिन संचालक दो टूक में मना कर दिया। भीड़ थोड़ी देर में सेल्फियों से थकी और राकेश टिकैत मंच पर ही एकदम पीछे चले गए। टिकैत आयोजनकर्ताओं से अपनी बारी आने तक बात करते रहे। अपने साथ आए लोगों को लगातार कुछ लिख कर देते रहे।राकेश टिकैत की इस एंट्री के बाद लगभग 15 मिनट तक माहौल में अफरातफरी रही

लोग शांत होते तब तक मंच पर चहलकदमी बढ़ चुकी थी। इसी बीच किसान नेता युद्धवीर सिंह अचानक से मंच पर आए और शांत रहने की एक भावुकता से भरी अपील की। इसके बाद युद्धवीर सिंह ने अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कांट्रेक्ट फार्मिंग को लेकर पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा,

इन प्राइवेट कंपनियों ने पंजाब के आलू किसानों के साथ कांट्रेक्ट किया और लिखा कि कंपनी आलू के साइज़ ठीक न होने पर कांट्रेक्ट रद्द कर सकती हैं। अब बताइये, घर के दो बच्चों के हाथ पैर एक जैसे नहीं होते, गेंहू कैसे एक जैसे पैदा कर देगा? फसल के दाने मौसम पर निर्भर करते हैं। ये कहते हैं कि कांट्रेक्टर किसान की जमीन पर कब्जा नहीं ली पाएगा, ठीक बात है। लेकिन कांट्रेक्टर किसान की जिस जमीन पर फसल उगवाएगा उसपर लोन ले सकता है। अब बताइए जब कांट्रेक्टर लोन लेगा तो वो चढ़ेगा कहां? वो किसान की जमीन के खाते में जाएगा। कांट्रेक्टर तो भाग जाएगा, लेकिन लेखपाल और पटवारी तो कहेगा कि ये लोन भरो, सरकार को क्या मतलब कांट्रेक्टर कौन था।’

(युद्धवीर सिंह के भाषण को वहां मौजूद लोगों ने काफी सराहा। उन्होंने बहुत प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी)

युद्धवीर सिंह ने अपने 15 मिनट के वक्तव्य में  किसान कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी सारी बातें बहुत आसान भाषा में समझायीं। लोगों ने बहुत जिम्मेदारी से सुना। पूरी बातचीत में किसान कानूनों और खेतहीन मजदूर-किसानों का जिक्र आता रहा। संघ और भाजपा पर सीधा टिप्पणी करते हुए युद्धवीर सिंह ने 26 जनवरी की लालकिला की घटना पर भी बात रखी।

इसके बाद दो तीन वक्ताओं ने अपनी बात रखी और राकेश टिकैत मंच पर आए। पत्रकार दीर्घा में फिर अफरातफरी मची लेकिन कुछ तस्वीरों के साथ मामला शांत हो गया। राकेश टिकैत ने ‘भिर्गु बाबा की जय’ का उद्घोष किया और अपने पहले ही वाक्य में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, शहीद मंगल पांडेय का जिक्र कर दिया। बलिया को एक विचारधारा बताते हुए राकेश टिकैत ने लगभग 16 मिनट का भाषण दिया। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने कहा, ‘अगर पॉलिटकल पार्टियों को भी अपनी मीटिंग करनी होगी तो किसान महापंचायत का नाम देना होगा। वो ऐसा करेंगे तो ही किसान उनकी पंचायत में जाएंगे। यह हमारी ताकत है और इसे बनाए रखना है।’ उन्होंने कहा, ‘आपके इस आंदोलन के चलते दुनिया भर में भारत के किसानों की  चर्चा है।

Pictures credit- Nirbhay Yadav

सरकार MSP पर कानून नहीं बना सकी लेकिन दुनिया में बात पहुंच रही है।’ जाते-जाते राकेश टिकैत ने क्षेत्रवाद से बचने की सलाह दी और पूर्वांचल को दिल्ली की तरफ चलने के लिए तैयार रहने को कहा, ये आंदोलन आपको चलाना है। 2021 आंदोलन का साल है। आप नहीं जगेंगे तो आपको भूमहीन होना होगा। जैसे आदिवासी जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं, हमारी स्थिति भी ऐसी हो जाएगी। बलिया आंदोलन की धरती है, यहां टिकैत साहब भी आ चुके हैं। यहां से बड़ी क्रांतियां हुई हैं। इसलिए जब जरूरत पड़ेगी अपने ट्रैक्टर-ट्राली के साथ में आपको निकलना पड़ेगा। जिस दिन दिल्ली से यहां संदेश आये और आपके बीच किसान यूनियनों के लोग दिल्ली चलने का आह्वान करने आएं, आप जो भी साधन मिले, उससे पहुंचें।’

अंतत: राकेश टिकैत का काफीला गुज़रा। लोग अपने घरों को लौटने लगे। यहां मौजूद लोग चुनावी दौर में भी रैलियों में आते रहे हैं लेकिन इस बार कुछ अलग रहा। जैसे, राजनैतिक रैलियों में राजनीतिक दलों के द्वारा भीतरखाने से लोगों को साधन और धन मुहैया कराया जाता है। मौजूद लोगों ने चंदा जुटाकर गाड़ीयां बुक की आयोजन स्थल के बाहर कार्यक्रम खत्म होने के बाद चाय या फल की दुकानों पर अफरातफरी नहीं थी। लोग घर जाते रहे, दुकानें आंख तकती रहीं। कोई सफेद कुर्ते में अपने साथ आए लोगों को नाश्ता पानी की चिंता में नहीं दिखा। यह सकारात्मक सी एक आखिरी बात थी।  इसके इतर इस महापंचायत का जिक्र मेन स्ट्रीम मीडिया में कहीं नहीं था जबकि पूर्वांचल की इस महापंचायत को इतना आसानी से नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता है।

बलिया की ग्राउंड रिपोर्ट ,जिले से जुड़े लोगों के इंटरव्यू  और तमाम ख़बरें , पढने के लिए हमें फेसबुक पेज @balliakhabar पर लाइक करें और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @BalliaKhabar पर क्लिक करें। 

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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

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बलिया। जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उमंग और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर धर्मात्मा नंद ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं ध्वजारोहण के साथ किया।

ध्वजारोहण के बाद विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी। बच्चों ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतीकात्मक रूप धारण कर उनके त्याग, संघर्ष और देशभक्ति की गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत नंदिनी मिश्रा की मधुर आवाज में प्रस्तुत गीत ‘चिट्ठी आई है’ से हुई। उनकी प्रस्तुति ने मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद ‘जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया’ और ‘भारत की जान है तिरंगा’ जैसे देशभक्ति गीतों ने पूरे विद्यालय परिसर को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया।

कक्षा 11 के शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों ने योग के विभिन्न आसनों का शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं प्री-प्राइमरी एवं प्राइमरी के बच्चों ने ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में देशभक्ति के रंग भर दिए। कक्षा 8 की छात्राओं द्वारा पारंपरिक कजरी गीत पर प्रस्तुत नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।

विद्यालय के प्रबंध निदेशक तुषार नंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। उन्होंने बच्चों से अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्य अतिथि, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीनियर कोऑर्डिनेटर अरविंद चौबे, जूनियर कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया।

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बलिया में विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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बलिया के नरही थाना गोलीकांड के शहीद विनोद राय की दसवीं पुण्यतिथि पर बुधवार को नरही में श्रद्धांजलि का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने शहीद विनोद राय को नमन किया। फेफना विधानसभा के विभिन्न गांवों से निकली विशाल तिरंगा यात्रा जब नरही पहुंची तो पूरा इलाका देशभक्ति के नारों और तिरंगों से पट गया। नरही खेल मैदान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी के नेतृत्व में फेफना विधानसभा के विभिन्न गांवों से तिरंगा यात्रा निकाली गई। मोटरसाइकिलों पर सवार हजारों कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लेकर नरही पहुंचे। इसके बाद खेल मैदान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम लोगों की मौजूदगी रही।

सभा में प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, बांसडीह विधायक केतकी सिंह, पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक संजय यादव समेत कई नेताओं ने विनोद राय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

वक्ताओं ने विनोद राय की शहादत को याद करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा ने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है। डॉ. महेंद्र सिंह ने बलिया की क्रांतिकारी धरती को नमन करते हुए कहा कि यहां की मिट्टी, पानी और जवानी में अद्भुत तेवर है।

पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने कहा कि विनोद राय जैसे कार्यकर्ताओं का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। बांसडीह विधायक केतकी सिंह ने कहा कि अपने संगठन और नेता के लिए जीवन का बलिदान देने वाले विनोद राय को हमेशा नमन किया जाएगा।

 12 अगस्त 2016 की काली रात कभी नहीं भूल सकता

कार्यक्रम संयोजक पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी ने भावुक होते हुए कहा कि 12 अगस्त 2016 की काली रात और विनोद राय की कुर्बानी को वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि विनोद राय के परिवार को हर कीमत पर न्याय मिलेगा और दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा कि कार्यकर्ता के सम्मान और उसकी शहादत को याद रखना संगठन की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में चौसा (बक्सर) ब्लॉक प्रमुख सुनीता राय, कोऑपरेटिव बैंक चेयरमैन विनोद शंकर दूबे समेत कई लोगों ने संबोधित किया। भोजपुरी कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम का संचालन भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने किया।

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तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह नहीं रहे, बलिया की राजनीति ने खोया अपना सबसे बड़ा जननेता

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बलिया। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन से पूरे बलिया जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार देर रात उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि होते ही उनके आवास पर समर्थकों, शुभचिंतकों और क्षेत्रीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर ओर गम और सन्नाटा पसरा रहा।

नगरा ब्लॉक के खनवर गांव निवासी उमाशंकर सिंह लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले कई महीनों से उनका इलाज चल रहा था। उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चर्चाएं थीं, लेकिन बुधवार रात उनके निधन की खबर ने पूरे पूर्वांचल को स्तब्ध कर दिया।

उमाशंकर सिंह केवल एक विधायक नहीं थे, बल्कि रसड़ा की राजनीति का ऐसा चेहरा थे जिनकी पहचान पार्टी से कहीं अधिक उनके जनसंपर्क, विकास कार्यों और सामाजिक सरोकारों से थी। यही वजह रही कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हर दल के नेताओं ने उनके निधन को क्षेत्र की अपूरणीय क्षति बताया।

छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर

सेवानिवृत्त सैनिक घुरहू सिंह के बड़े पुत्र उमाशंकर सिंह ने छात्र राजनीति से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया। वे सतीश चंद्र महाविद्यालय, बलिया के छात्रसंघ महामंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 2002-03 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा ने नई दिशा पकड़ी।

लगातार तीन चुनाव जीते

साल 2012 में बसपा के टिकट पर पहली बार रसड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने करीब 84 हजार वोट हासिल किए और सपा प्रत्याशी सनातन पांडेय को 52,825 वोटों के बड़े अंतर से हराकर पहली बार विधायक बने।

2017 में भाजपा के पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह को 33,885 वोटों से हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।

वहीं 2022 के चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन की चुनौती के बावजूद उन्होंने सुभासपा प्रत्याशी महेंद्र चौहान को करीब 5 हजार वोटों से हराकर जीत की हैट्रिक पूरी की। बसपा के कमजोर दौर में भी उनकी यह जीत पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी।

समाजसेवा से बनाई अलग पहचान

राजनीति में आने से पहले उमाशंकर सिंह सड़क निर्माण के व्यवसाय से जुड़े रहे। विधायक बनने के बाद इस कार्य की जिम्मेदारी उनके परिवार ने संभाली। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान समाजसेवी के रूप में रही। उन्होंने अपने जीवनकाल में 600 से अधिक निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह कराकर समाज में एक अलग मिसाल कायम की।

शोक में डूबा बलिया

उनके निधन की खबर मिलते ही रसड़ा, नगरा और पूरे बलिया जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचकर अंतिम दर्शन कर रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूर्वांचल ने आज अपना एक लोकप्रिय, जुझारू और जनसेवा के लिए समर्पित नेता खो दिया।

उमाशंकर सिंह के अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा के कार्यक्रम की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। उनका निधन केवल रसड़ा विधानसभा ही नहीं, बल्कि पूरे बलिया की राजनीति के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।

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