बलिया
बलिया- अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर बनेंगे बच्चों के आधार कार्ड
बलिया में अब बच्चों के आधार कार्ड बनवाना बहुत ही आसान हो जायेगा। क्योंकि अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी पंजीकृत बच्चों के आधार कार्ड बन सकेंगे। पहले चरण में सीडीपीओ कार्यालय से इसका शुभारंभ होगा। जिससे अब अभिभावकों को बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए बैंक और डाकघर के चक्कर लगाने नहीं लगाने पड़ेंगे।
जिले में बाल विकास पुष्टाहार विभाग 17 विकास क्षेत्रों में 3471 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित कर रहा है। इन केंद्रों पर करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। शासकीय योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होती है। वर्तमान में आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था डाकघर और बैंकों में ही लागू है, लेकिन न तो सभी बैंकों में आधार बन रहे और न ही डाकघरों में।
सीमित स्थानों पर व्यवस्था होने से बच्चों के आधार बनवाने के लिए अभिभावकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 6 साल तक के बच्चों के आधार केंद्रों पर ही बनवाने का फैसला लिया है। पहले चरण में ब्लॉक मुख्यालय पर संचालित सीडीपीओ कार्यालय पर यह व्यवस्था लागू होगी। इससे बच्चों के आधार कार्ड आसानी से बन जाएंगे और उनको योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा।
सीडीपीओ, दुबहड़, राम भवन वर्मा ने बताया कि शासन के निर्देश पर सीडीपीओ कार्यालय पर बच्चों के आधार कार्ड बनाने की तैयारियां चल रही हैं। उपकरण की उपलब्धता कराई गई है लेकिन ऑपरेटर के अभाव में व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। ऑपरेटर और यूआईडीएआई से आईडी और पासवर्ड मिलने के बाद इस व्यवस्था को शुरू कर दिया जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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