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बलिया- ददरी मेला और छठ पर्व को लेकर बैठक, लंपी डिजीज के चलते नहीं लगेगा पशु मेला: डीएम

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बलिया में ददरी मेला और छठ पर्व की प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी है। जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने तैयारियों को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक की। पशुओं में चल रहे लंपी डिजीज के चलते ददरी मेले में पशु मेला नहीं लगाने का फैसला लिया गया। बता दें ददरी मेला पशु मेला और दूसरा मीना बाजार को लेकर ही जाना जाता है।

इस बार नहीं लगेगा पशु मेला- जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी तहसीलों के एसडीएम भी अपने-अपने तहसील क्षेत्र में घाटों पर साफ सफाई की व्यवस्था करवा लें और कहीं पर भी पशु मेला न लगने दें। जनपद से सटे तहसीलों के उप जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जनपद में कहीं से भी पशु बाहर से ना आने पाए। मेले में आने वाले दुकानदारों को दुकानें आवंटित करते समय पूरी पारदर्शिता बरतें।

जिलाधिकारी ने ईओ नगरपालिका को निर्देश दिया कि मेले की तैयारी पहले से ही कर ली जाए और वहां पर साफ सफाई की व्यवस्था करा ली जाए। घाटों की भी सफाई कर ली जाए क्योंकि ददरी मेले और छठ पर्व के दिन लोग भारी मात्रा में घाटों पर स्नान करने के लिए आते हैं। वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय, कपड़े बदलने के कैम्प आदि लगाए जाएं। साथ ही घाटों पर बैरिकेटिंग कर दी जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि मेले में स्वास्थ्य कैंप लगाए जाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए । विद्युत विभाग को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि मेले में प्रकाश की समुचित व्यवस्था हो लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि कहीं भी कटे-फटे तार पड़े ना हो क्योंकि इनसे लोगों को करंट लगने का डर बना रहता है।

वहीं पुलिस अधीक्षक राजकरण नैयर ने मेले की सुरक्षा को लेकर निर्देश दिया कि सभी सीओ अपने अपने क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दे। साथ ही मेले में पुलिस बल की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। लाउडस्पीकर से लोगों को सूचित किया जाता रहेगा। साथ ही खोया-पाया कैंप भी लगाया जाएगा। उन्होंने परिवहन विभाग से गाड़ियों की संख्या बढ़ाने को कहा।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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