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बलिया शहर का इकलौता फ्लाइओवर बना जानलेवा, ज्वाइंट हिस्से में बना चार फीट गहरा गड्ढा

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बलिया. शहर स्थित जिले का एकमात्र ओवरब्रिज सड़क दुर्घटना को दावत दे रहा है. ब्रिज के दक्षिण छोर पर ज्वाइंट के हिस्से में लगभग तीन फीट चौड़ा और पांच फीट गहरा गड्ढा हो जाने से इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि किसी भी वक्त कोई वाहन दुर्घटना की चपेट में आ सकता है. ऐसा नहीं कि जिला प्रशासन का ध्यान इस पर नहीं जा रहा है, लेकिन शायद नजरें इनायत नहीं करना चाह रहे हैं. ऐसे में ओवरब्रिज के उपर से वाहन लेकर आने-जाने वाले लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर है.

सन् 1984 में तत्कालीन बलिया सांसद स्व. जगन्नाथ चौधरी के अथक प्रयास से बलिया जनपद को पहली बार फ्लाइओवर नसीब हुआ था और तभी से आज तक छह तहसीलयुक्त बलिया में यही एकमात्र ओवरब्रिज है जो रेल मार्ग और सड़क मार्ग के उपर से गुजरते हुए शहर के उत्तरी और दक्षिणी छोर को एक में मिलाए है. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय तत्कालीन उप रेल मंत्री महावीर प्रसाद ने पुल का शिलान्यास किया था, जिसके बाद 1986 में इसका उद्घाटन हुआ, तभी से ब्रिज निरंतर सेवा देता चला आ रहा है. लेकिन इधर बीते एक साल से लगातार पुल के दक्षिणी छोर स्थित ज्वाइंट के हिस्से में गड्ढा बन जाने से कहना गलत नहीं होगा कि पुल का ज्वाइंट हिस्सा अब पूरी तरह से डैमेज हो चुका है. चूंकि पुल के रास्ते ही जिला अस्पताल का रास्ता है, लिहाजा रोजाना सैकड़ों एंबुलेंस की आवाजाही के साथ ही 70 से 80 रोडवेज बस व अनगिनत ट्रक व अन्य वाहने पास करते हैं, दिन में तो ठीक, लेकिन रात के वक्त गड्ढा अंधेरे में छिप जाने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.

अभी जनवरी में ही हुआ था रिपेयरिंग
गौरतलब हो कि अभी बीते जनवरी 2020 में पुल के दक्षिणी छोर पर लगभग तीन से चार फीट चौड़ा व लगभग छह फीट गहरा गड्ढ बन गया था, लगभग एक पखवारे के बाद जब जिला प्रशासन की नजरें पड़ी तो रिपेयरिंग करके गड्ढे को भर दिया गया. लेकिन शायद उस वक्त रिपेयरिंग के नाम पर कोरम पूरा किया गया था, तभी तो छह महीना बीता नहीं कि एक बार उसी जगह पर फिर से गड्ढा बन गया है. ऐसे में समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया था कभी भी दुर्घटना घट सकती है.

क्या बोले एसडीएम

पुल के ज्वाइंट हिस्से में गड्ढे की बात मेरे संज्ञान में नहीं है, जल्द ही संबंधित विभाग से उसकी रिपेयरिंग कराई जाएगी.
अश्विनी श्रीवास्तव
उपजिलाधिकारी बलिया

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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एक साल से धूल फांक रही करोड़ों की जांच सुविधा, बांसडीह सीएचसी में नहीं चालू हो सकी बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन

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बांसडीह (बलिया)। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बांसडीह में स्थापित की गई बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निष्क्रिय पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग की यह महत्वपूर्ण मशीन अस्पताल परिसर तक पहुंचने के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मशीन के संचालन से लीवर फंक्शन टेस्ट, किडनी प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, कार्डियक प्रोफाइल, कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन और आयरन समेत करीब 30 प्रकार की महत्वपूर्ण जांचें सीएचसी स्तर पर ही उपलब्ध हो सकती हैं। फिलहाल इन जांचों के लिए मरीजों को जिला अस्पताल या निजी पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।

सीएचसी बांसडीह में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। सामान्य जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर बीमारियों से जुड़ी कई आवश्यक जांचों का अभाव बना हुआ है। ऐसे में मशीन का चालू होना क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अनुमान है कि इससे क्षेत्र की लगभग 40 हजार आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर एक अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण है, जिसे क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइजर भी कहा जाता है। यह रक्त, प्लाज्मा और सीरम जैसे जैविक नमूनों की रासायनिक जांच कर विभिन्न रोगों के सटीक निदान में मदद करता है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अभय नारायण राय ने कहा कि उन्हें मशीन के स्थापित न होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराकर मशीन को शीघ्र चालू कराने की कार्रवाई की जाएगी।

सीएमओ ने कहा कि मशीन के संचालन से बांसडीह सीएचसी में कई महत्वपूर्ण जांचें शुरू हो जाएंगी, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। अब क्षेत्रवासियों को मशीन के जल्द शुरू होने का इंतजार है।

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अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

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भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।

इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

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