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बलिया- चेयरमैन प्रत्याशी मशीष कुमार ने निर्वतमान चेयरमैन से बताया जान को खतरा, पुलिस को लिखा पत्र
Kiबलिया। सुभासपा से चेयरमैन पद के प्रत्याशी मनीष कुमार जायसवाल ने निर्वतमान चेयरमैन और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाएं हैं। उन्होंने मारपीट का गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरे में बताया है। साथ ही पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है। मनीष कुमार ने बेल्थरारोड चौकी प्रभारी को पत्र लिखा है।
पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि वह अपने परिचित की मौत होने पर परिजनों से मिलने के लिए अस्पताल पर गए थे। और जब वह वापस लौट रहे थे तभी उनपर निवर्तमान चैयरमैन के समर्थकों ने गलत आरोप लगाते हुए हमला कर दिया। इस दौरान प्रशासन ने बीच बचाव किया। ऐसे में उन्होंने निवर्तमान चेयरमैन से अपनी जान को बताया।
उन्होंने पत्र में ये तक लिखा कि भविष्य में मुझे और मेरे परिवार के साथ कोई भी घटना घटती है तो उसकी जिम्मेदारी निवर्तमान चेयरमैन दिनेश कुमार की होगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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