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बलिया – जमुना राम पीजी कॉलेज में 5 दिवसीय स्काउट गाइड का समापन
बलिया। चितबड़ागांव के जमुना राम पीजी कॉलेज में शिक्षक प्रशिक्षण संकाय के तहत बीएड के प्रशिक्षणार्थियों के 5 दिवसीय स्काउट/गाइड का वनोंपसेवन कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन के लिए भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। 
इसमें मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के प्रबंधक प्रोफेसर धर्मात्मा नंद और विशिष्ट अतिथि के रूप में जमुना राम मेमोरियल स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर तुषारनंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने टेंट का निरीक्षण किया गया। फिर मां सरस्वतीके चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
छात्र-छात्राओं ने नृत्य, कविता और बेरोजगारी पर नाटक प्रस्तुत किया इसमें सभी प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने स्काउट/ गाइड के महत्व पर प्रकाश डालें और इन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए छात्र/ छात्राओं को प्रेरित भी किया।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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