बलिया
गोंड जाति का संघर्ष सफल, बलिया समेत 13 जिलों में मिलेगा अनुसूचित जन जाति प्रमाण पत्र
बलियाः लंबे समय से आंदोलनरत गोंड जाति का संघर्ष आखिरकार सफल हो ही गया। बलिया समेत पूर्वांचल के 13 जिलों में गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र मिल गया है।
उन्हें अनुसूचित जनजाति का सर्टिफिकेट मिला लेकिन इस सर्टिफिकेट के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। दशकों से गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठारी व राजगोंड जाति के लोगों ने आंदोलन किए। अपने आप को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रुप में साबित करने कई लाठियां खाई। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार ने अब इन जातियों को बड़ी राहत दी है। अब बलिया समेत पूर्वांचल के 13 जिलों पर डीएम को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने के आदेश जारी हुए हैं। प्रदेश के 62 जिलों में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कहा गया है।
जिन जिलों में अनुसूचित जन जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे उनमें वाराणसी, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, सोनभद्र, मीरजापुर, देवरिया, गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बस्ती में अब गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठारी व राजगोंड शामिल हैं। बलिया में गोंड जाति के लोग सदर तहसील में सर्वाधिक हैं, यहां करीब 45 हजार लोगों को फायदा मिलेगा। हालांकि सिकंदरपुर, बिल्थरारोड, रसड़ा और बैरिया तहसील में भी इनकी संख्या काफी है।
बता दें कि प्रमुख सचिव के रविद्र नायक ने दो दिन पहले जिला प्रशासन को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किया है। डीएम को इसका कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए कहा है। समाज कल्याण विभाग को भी समन्वय स्थापित करना होगा। इन जातियों से ताल्लुक रखने वाले जिले में करीब 1.30 लाख लोग हैं। उन्हें एसटी (शिड्यूल ट्राइव) सर्टीफिकेट के लिए तहसीलों की गणेश परिक्रमा नहीं करनी पड़ेगी।
आंदोलनरत गोंड जाति के लोग अपने जाति प्रमाण पत्र की मांग लंबे समय से कर रहे थे। उनके प्रमाण पत्र जारी करने के लिए राजस्व अधिकारी व कर्मचारी गोंड जाति के लोगों से 1950 में निर्गत राष्ट्रपति के आदेश मांगते थे। उनकी फाइलों पर जाति सही नहीं है। साक्ष्य स्पष्ट नहीं है। भूमिहीन गोंड जाति के लोगों से भू-राजस्व अभिलेख में नाम नहीं दर्ज होने की आपत्ति लगाई जाती थी। वहीं सोहांव के बादल कुमार व नरही के रमेश कुमार ने बताया कि वे गोंड जाति से हैं। प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया तो तहसील कर्मचारियों ने उसे खारिज कर दिया। सहतवार के छात्र अजीत कुमार ने बताया कि स्कूल में प्रमाण पत्र की जरूरत थी। आवेदन किया लेकिन नहीं बनाया गया। लेकिन अब लंबी चली लड़ाई के बाद आखिरकार गोंड जाति की जीत हुई और बलिया समेत पूर्वांचल के 13 जिलों पर डीएम को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने के आदेश जारी हुए हैं।
बलिया
शिक्षा पदम सम्मान 2025 से सम्मानित हुए हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित हिलटॉप पब्लिक स्कूल में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी को “शिक्षा पदम सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके 10 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवा और अभिनव प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. अंसारी की नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने स्कूल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उनके मार्गदर्शन में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. परवेज अंसारी ने कहा —
“यह सम्मान मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है। मैं शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और सुधार के लिए प्रयासरत रहूँगा।”
उनकी इस उपलब्धि से न केवल स्कूल परिवार बल्कि पूरे जनपद में गर्व की भावना व्याप्त है।
फेफना
दिखाया जज़्बा: जमुना राम मेमोरियल स्कूल के कराटे वीरों ने जीते 22 पदक, बलिया में बजाया अपना डंका
बलिया के बापू भवन में आयोजित 2nd Gyanti Devi Memorial Cup District Karate Championship 2K25 में जिले के लगभग 15 विद्यालयों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव के 22 छात्रों ने प्रतिभाग कर दमखम दिखाया।
शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कूल के 12 छात्रों ने स्वर्ण पदक , 6 ने रजत पदक और 4 ने कांस्य पदक हासिल किए। छात्रों की इस उपलब्धि ने न केवल विद्यालय का नाम रोशन किया बल्कि माता-पिता और क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अबरी के.बी. एवं प्रबंध निदेशक तुषार नंद जी ने विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक स्फूर्ति को बढ़ावा देती हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने यह भी आश्वस्त किया कि भविष्य में भी छात्र ऐसे आयोजनों में भाग लेकर और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
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बलिया की राजनीति में हलचल: भानु दुबे जल्द कर सकते हैं सपा जॉइन, अटकलों का बाजार गर्म
बलिया।
बलिया के प्रमुख सामाजिक नेता भानु दुबे जल्द ही समाजवादी पार्टी (सपा) जॉइन कर सकते हैं। हाल ही में उनके सोशल मीडिया पोस्ट और गतिविधियों से इस बात के कयास तेज हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से भानु दुबे लगातार सपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी इन मुलाकातों और नेताओं के काफिलों में देखे जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि वे जल्द ही सपा का दामन थाम सकते हैं।
भानु दुबे को ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है। सामाजिक स्तर पर उनकी लोकप्रियता भी युवाओं में काफी मजबूत है। अगर वे सपा में शामिल होते हैं तो न केवल बलिया में पार्टी को मजबूती मिलेगी, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में बलिया सदर सीट से उनकी दावेदारी भी बेहद मजबूत मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भानु दुबे के सपा में आने से बलिया की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। और यह फैसला पूरे जिले के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भानु दुबे कब और किस मंच से सपा की सदस्यता ग्रहण करते हैं और इसके बाद जिले की राजनीति कौन सा नया मोड़ लेती है।


