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बलिया- पूर्व मंत्री घूरा राम के बेटे आदित्य गर्ग बने चिलकहर के ब्लाक प्रमुख, 26 साल पुरानी याद हुई ताज़ा
बलिया । चिलकहर ब्लाक के चुनाव नतीजे से बलिया की राजनीति में कई सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। चिलकहर ब्लाक में छोटेलाल द्वारा अपना पर्चा वापस लेने से आदित्य गर्ग उर्फ़ सूर्यकान्त का निर्विरोध ब्लाक प्रमुख निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया। एक मात्र प्रतिद्वन्दी छोटेलाल ने अपना पर्चा वापस कर लिया। जैसे ही छोटेलाल के पर्चा वापस लेने की खबर बाहर फैली आदित्य गर्ग के समर्थको ने घूरा राम अमर रहे, सुभाष राम अमर रहे से ब्लाक मुख्यालय गुज गया।वहीं अब चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि पूर्व मंत्री घूरा राम के दुसरे बेटे संतोष कुमार को बेल्थरा रोड विधानसभा का टिकट मिल सकता है।
गौरतलब है कि पूर्व मंत्री घूरा राम की पिछले साल 16 जुलाई को कोरोना से केजीएमसी में इलाज के दौरान मौत हो गयी थी। इनकी मृत्यु के लगभग एक माह बाद इनके छोटे भाई सुभाष राम के छोटे पुत्र अजय गर्ग की 27 वर्ष की उम्र में असमामयिक मृत्यु हो गयी। अभी ये परिवार इन संकटों से अभी उबरा भी नहीं था कि सुभाष राम की भी पिछले साल 6 सितम्बर को लखनऊ में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। इस तरह इस परिवार मे पौने दो माह में तीन मौतों के होनो से ये पूरा परिवार एक तरह से उजड़ सा गया था।
लेकिन घूरा राम के बड़े पुत्र डा० संतोष कुमार ने जिस जिम्मेदारी से अपने पूरे परिवार को लेकर चलने का कार्य किया है आज उसकी चातुर्दिक प्रशंसा हो रही है। यही कारण है कि आज एक साल के अन्दर इस परिवार में सुभाष राम के लड़के जहां पहाडपुर का ग्राम प्रधान का चुनाव जीत कर बहुत कम उम्र में प्रधान बनने का खिताब अपने पक्ष में कर लिया है, वही पर आदित्य गर्ग आज ब्लॉक प्रमुख बनकर एक एतिहासिक कार्य ही नहीं किया है, बल्कि 1995 में सुभाष राम जहां

जीत की ख़ुशी मनाते समर्थक
एक वोट के चलते प्रमुख नहीं बन पाये थे, उन सपनों को भी आज पूरा कर दिया। जब 1995 में नयी पंचायती राज व्यवस्था में चिलकहर जब पहली बार प्रमुखी में अनुसूचित जाति के आरक्षित हुआ था तो उस समय घूराराम उत्तर प्रदेश की सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री थे । उसी समय इनके छोटे भाई सुभाष राम प्रमुखी का चुनाव लड़ो थे । लेकिन उस समय सभी दल इनको रोकने के लिए एक हो गये थे। ऐसी स्थिति में सुभाष राम मात्र एक वोट से चुनाव हार गये थे।
अब डा० संतोष कुमार का विधायक बनना रहा बाकी– जैसे ही आदित्य गर्ग के निर्विरोध प्रमुख बनने का समाचार आया, वैसे ही लोगों की जुबान पर बस एक ही चर्चा शुरू हो गयी। कि अब केवल डा० संतोष कुमार गर्ग का विधायक बनना बाकी रह गया है। सूत्रो की माने तो 357 विधान सभा बेल्थरा रोड में सपा से टिकट के दावेदारों में डा० संतोष कुमार का नाम सबसे आगे चल रहा है। सपा के एक बड़े नेता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डा० संतोष कुमार का टिकट चिलकहर की प्रमुखी पर ही निर्भर था। अब ये चुनाव जीत गये है तो एक तरह से इनका टिकट भी पक्का ही है।
वैसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव के इस बयान से भी अब लोगों को एक तरह से विश्वास हो गया हैं कि प्रमुख जिताओ और विधान सभा का टिकट पाओ। अगर ये बाते अंत तक ऐसे ही बनी रही तो अब डा० संतोष कुमार का विधायक बनना भी एक तरह से तय ही है। क्योकि पूरे जनपद मे एक तरह इस परिवार के प्रति सहानुभुति लहर चल रही है
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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