बलिया स्पेशल
लोकसभा चुनाव – क्या बलिया में जातीय समीकरण का है बोलबाला ?
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बलिया के निवासियों के विद्रोही तेवर के कारण इसे बागी बलिया के नाम से जाना जाता है। बलिया उत्तर प्रदेश में सबसे पूर्वी जिला है।
भोजपुरी भाषा इस जिले में बहुतायत से बोली जाती है। बलिया का नाम बलिया राक्षस राज बलि के नाम पर पड़ा। राजा बलि ने बलिया को अपनी राजधानी बनाया था।
बलिया संसदीय सीट पर छिड़े चुनावी संग्राम में उम्मीदवार वोटों की जोड़-तोड़ में जुट गए हैं। इसके लिए वही पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं, जो हमेशा से सियासतदार अपनाते रहे हैं।
कहीं जाति व धर्म की बात की जा रही है, तो कहीं धनबल व बाहुबल के आधार पर मत बटोरने की कोशिश जारी है। सभी दल इसके लिए गांव-गांव में सियासी गोटी बिछाने में जुटे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की बड़ी भूमिका रही है। खासकर पूर्वांचल में यह समीकरण हर चुनाव में अपना रंग दिखाता रहा है, लेकिन बलिया में 2014 का लोकसभा चुनाव इस मामले में अलग रहा।
केन्द्र में लगातार कांग्रेस की सत्ता के चलते उपजी नाराजगी के बीच नरेन्द्र मोदी के नाम का ऐसा जादू चला कि सारे समीकरण ध्वस्त हो गए।
उस वर्ष अपने मैराथन चुनाव अभियान का समापन नरेन्द्र मोदी ने बलिया में ही किया था। इसका ऐसा असर हुआ कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की इस परम्परागत सीट पर पहली बार बीजेपी ने जीत हासिल की। लेकिन इस बार हालात बदले-बदले से हैं।
बलिया जिले में मतदाताओं की संख्या में 23 लाख 58 हजार 606 हैं। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 12 लाख 93 हजार 860, महिला मतदाताओं की संख्या 10 लाख 64 हजार 676 और अन्य मतदाता 70 हैं। युवा मतदाता (18-19 साल) 13 हजार 437 हैं। साल 2014 में कुल मतदाता 22 लाख 21 हजार 951 थे।
अधिसूचना के साथ ही नामांकन 22 अप्रैल से
जिले की सात विधानसभा सीटें तीन लोकसभा क्षेत्रों में बंटी हैं। अधिसूचना 22 अप्रैल से जारी होगी। यानि उसी दिन से नामांकन शुरू हो जाएगा। मतदान सांतवें चरण यानी 19 मई को है।
इस बार भाजपा को कड़ी टक्कर
पिछली बार की तरह सपा-बसपा अलग-अलग चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, जबकि पूर्वांचल के मुस्लिम वोटों में मजबूत पैठ रखने वाले मुख्तार व अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का अस्तित्व खत्म हो चुका है और वे इस समय बसपा में हैं। ऐसे में अबकी चुनाव में भाजपा के सामने गठबंधन एक कड़ी चुनौती प्रस्तुत करने को पूरी तरह तैयार है। वर्ष 2014 के में भाजपा को 3 लाख 59 हजार 758 वोट मिले थे।
भरत नहीं ‘मस्त’ होंगे भाजपा प्रत्याशी
भाजपा ने बलिया के सांसद भरत सिंह को टिकट न देकर भदोही से तीन बार सांसद रहे वीरेंद्र सिंह ‘मस्त’ को बलिया लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त दूसरी बार बलिया लोकसभा से चुनाव लड़ेंगे।
इससे पहले वे तीन बार भदोही का सांसद रह चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की विरासत बलिया संसदीय सीट के लिए भी सपा ने प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। पिछली बार यहां से नीरज शेखर चुनाव लड़े थे, जो इस समय राज्यसभा सदस्य हैं। कांग्रेस ने भी प्रतायाशी घोषित नहीं किए।
बलिया
‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ महारैली की तैयारी तेज, बलिया में अबुल फैज़ को मिली जिला इंचार्ज की जिम्मेदारी
बलिया। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाली कांग्रेस की ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ महारैली को लेकर संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बलिया के कांग्रेस नेता अबुल फैज़ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जिला इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें जिले में संगठनात्मक समन्वय और महारैली की तैयारियों से जुड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के आह्वान पर आयोजित होने वाली इस महारैली के लिए पार्टी स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सक्रिय किया जा रहा है। अबुल फैज़ को मिली जिम्मेदारी के तहत जिले के कांग्रेसजनों से संपर्क स्थापित करने, संगठन के बीच तालमेल बनाने और महारैली में बलिया की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
अबुल फैज़ जिला कांग्रेस कमेटी, बलिया में वॉररूम प्रभारी के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। अब उन्हें अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जिला इंचार्ज का दायित्व मिलने के बाद महारैली की तैयारियों में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
नई जिम्मेदारी मिलने पर अबुल फैज़ ने कहा कि वह संगठन की ओर से जताए गए भरोसे पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर महारैली में बलिया से अधिक से अधिक कांग्रेसजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस महारैली के लिए जिले में संगठनात्मक स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। अबुल फैज़ ने सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने की बात कही।
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बेल्थरा रोड में टिकट से लेकर पार्टी तक, किसे पसंद कर रहे लोग? ऑनलाइन सर्वे में सामने आए चौकाने वालेआंकड़े
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विधायक हंसू राम को उनके कामकाज के लिए औसतन 10 में से 3.43 अंक मिले। वहीं, दोबारा टिकट देने के सवाल पर 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘नहीं’ कहा। पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी 39.8 प्रतिशत के साथ पहले और समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।
1. विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे अपने विधायक हंसू राम के काम को 1 से 10 के बीच कितने अंक देंगे। इस सवाल पर औसत रेटिंग 3.43 दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, दोबारा टिकट देने के सवाल पर ‘नहीं’ कहने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यह नतीजा ऑनलाइन सर्वे में शामिल लोगों की राय को दर्शाता है।
2. 2027 में किस पार्टी का विधायक चाहते हैं ?
अगले विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का विधायक बनना चाहिए, इस सवाल पर बीजेपी को सबसे अधिक 39.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।

पार्टी की पसंद के आंकड़ों में बीजेपी और सपा के बीच 3 प्रतिशत अंकों का अंतर दिखाई देता है। हालांकि, ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की पसंद पर आधारित हैं, न कि चुनाव परिणाम का अनुमान।
3. सुभासपा में प्रवीण प्रकाश पहली पसंद
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से कौन-सा नेता पहली पसंद है, इस सवाल पर प्रवीण प्रकाश को 54.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। मौजूदा विधायक हंसू राम को 25 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि 20.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना।

इस सवाल के आंकड़ों में प्रवीण प्रकाश को हंसू राम से 29.2 प्रतिशत अंक अधिक मिले।
4. बीजेपी में धनंजय कनौजिया को 34.4% समर्थन
बीजेपी से संभावित उम्मीदवार के सवाल पर धनंजय कनौजिया को 34.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पहली पसंद बताया। जबकि छठू राम को 21.9 प्रतिशत समर्थन मिला। गोरख पासवान को 18.8 और रीना राव को 15.5 प्रतिशत, 9.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं को चुना।

बीजेपी के विकल्पों में धनंजय कनौजिया को सबसे अधिक समर्थन मिला। वहीं, अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत भी 9.4 रहा।
5. समाजवादी पार्टी में राजेश पासवान को 35 .5% समर्थन
समाजवादी पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर राजेश पासवान को 35.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, संतोष गर्ग को 20.9 प्रतिशत ने अपनी पसंद बताया।

सपा के आंकड़ों में नामित नेताओं में राजेश पासवान को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। अन्य नेताओं का विकल्प 35.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा
6. बसपा में अनुज कुमार भारती को 26.9% समर्थन
बहुजन समाज पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर उपलब्ध आंकड़ों में अनुज कुमार भारती को 26.9 प्रतिशत और संतोष कुमार को 7.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, 42.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य विकल्प को प्राथमिकता दी।

इस सवाल के उपलब्ध आंकड़ों में शेष विकल्पों का पूरा विवरण नहीं है, इसलिए उनकी जानकारी अलग से नहीं जोड़ी गई है।
7. कांग्रेस में 69.2% ने चुना अन्य नेताओं का विकल्प
कांग्रेस पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर 69.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना। पारस वर्मा और अखिलेश कनौजिया को 15.4-15.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

कांग्रेस के आंकड़ों में किसी एक नामित नेता के बजाय अन्य नेताओं के विकल्प को सबसे अधिक प्रतिभागियों ने चुना।
बेल्थरा रोड में टिकट और पार्टी की पसंद पर क्या कहते हैं आंकड़े?
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में तीन प्रमुख पहलू सामने आए हैं। पहला, मौजूदा विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43 रही। दूसरा, 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने उन्हें दोबारा टिकट देने के पक्ष में राय नहीं दी। तीसरा, पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी को 39.8 प्रतिशत और सपा को 36.2 प्रतिशत समर्थन मिला।
उम्मीदवारों की पसंद के सवाल पर सुभासपा में प्रवीण प्रकाश, बीजेपी में धनंजय कनौजिया और सपा में राजेश पासवान को नामित विकल्पों में सबसे अधिक समर्थन मिला। बसपा और कांग्रेस के सवालों में अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वालों का प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा।
सर्वे के बारे में जरूरी जानकारी
यह सर्वे बलिया ख़बर द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कराया गया था। ऊपर दिए गए प्रतिशत सर्वे में शामिल प्रतिभागियों के जवाबों पर आधारित हैं। इन नतीजों को पूरी बेल्थरा रोड विधानसभा के सभी मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि सर्वे नहीं माना जाना चाहिए। ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले लोगों की पसंद और राय को सामने रखते हैं।
बलिया स्पेशल
बलिया विधानसभा सर्वे 2027
2027 का विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है और बलिया नगर सीट पर सियासी हलचल तेज़ है। विधायक दयाशंकर सिंह के कामकाज को आप कैसे आंकते हैं? क्या उन्हें फिर से मौका मिलना चाहिए, और 2027 में आप किस पार्टी और किस चेहरे को विधायक के रूप में देखना चाहते हैं? बलिया ख़बर के इस सर्वे में अपनी राय दर्ज करें।
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