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दुनिया के 7 सबसे अजीब रेलवे ट्रैक-भूलकर भी मत जाना, नंबर 1 देख हैरान रह…
हेलो दोस्तों, आप लोगों ने कई बार ट्रेन का सफर किया होगा, कभी किसी रिश्तेदार के घर जाने के लिए तो कभी किसी बिजनेस के सिलसिले में बाहर जाने के लिए । कई बार यह ट्रेनें पहाड़ियों और घाटियों से होकर गुजरती है । लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसी ट्रेन से सफर किया है जो आपको सीधा मौत के मुंह तक ले जाए ।
आज हम ऐसे ही कुछ रेलवे ट्रैक के बारे में बात करेंगे जो बहुत ही ज्यादा खतरनाक है । हम आपको यह जानकारी इसलिए दे रहे हैं ताकि आगे जब भी आप सफर करें तो इन जगहों से थोड़ा सा संभल कर रहे और कोशिश करें कि इन रास्तों से जाना ना पड़े ।
“द ट्रेन टू द क्लाउड्स” के नाम से जाना जाने वाला ट्रेक 130 मील लंबा है ।यह ट्रैक अर्जेंटीना की सबसे खतरनाक और अजीब जगहों से होकर गुजरता है ।इस ट्रैक को बनाने में 27 साल का समय लगा।इस लंबे अरसे में कम से कम 400 मजदूरों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा ।इस रेलवे लाइन का निर्माण इतना मुश्किल था कि जिस समय इसे बनाया जा रहा था तो ज्यादा ऊंचाई होने के कारण मजदूरों को अक्सर चक्कर आ जाया करता था . यहां तक की सुरक्षा व्यवस्था सही ना होने की वजह से कई मजदूरों की गिरकर मौत हो गई । इतनी मेहनत और कई जानों को गांवाने के बाद जब यह ट्रैक बनकर तैयार हुआ तब तक हवाई सफर और बाकी सारे साधन इतनी तरक्की कर चुके थे इस ट्रैक की जरूरत और महत्व कुछ खास नहीं रह गए ।

“नेपियर गिसबों”
दोस्तों अगर हम आपसे कहे कि दुनिया में एक एयरपोर्ट ऐसा भी है जहां की हवाई पट्टीयों से पूरी की पूरी ट्रेन रोज गुजरती है तो शायद आप हमारी बातों पर यकीन ना करें । न्यूजीलैंड के एक रेलवे लाइन को गिसबों कि हवाई पट्टियों को पार करके जाना पड़ता है हालांकि ट्रेन के रेलवे पट्टियों से गुजरने से पहले ट्रेन ड्राइवर को एयरलाइन कंट्रोल ऑफिस से परमिशन लेनी पड़ती है यदि ऐसा ना किया जाए तो यहां पर थोड़ी सी भी गलती पर एक भयानक हादसे का सामना करना पड़ सकता है ।

“बर्मा रेलवे थाईलैंड या द डेथ रेलवे”
इस रेलवे ट्रैक के निर्माण के समय कम से कम 94000 मजदूरों की मौत नदी में गिरने के कारण हो गई।यह रेलवे ट्रेक 415 किलोमीटर लंबा है यह रेलवे ट्रैक बहुत ही पतला है कई मोड़ पर तो ऐसा लगता है कि ट्रेन हवा में उड़ रही है इतने खतरनाक रास्ते के कारण इस रेलवे ट्रैक को बंद कर दिया गया था ।
“मैक्लांग रेलवे ट्रैक”
यह भी थाईलैंड में स्थित है यह एक ऐसा रेलवे ट्रैक है जो बीचो-बीच मार्केट से गुजरता है जब ट्रेनें आती हैं तब यहां की सभी दुकानों को हटा लिया जाता है और जैसे ही ट्रेन गुजर जाती है सभी दुकानों को लगा दिया जाता है ड्राइवर या दुकानदारों से होने वाली एक छोटी सी गलती एक बड़ी दुर्घटना करा सकती है।
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।
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