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ट्रेन में हिंदी बोलने पर भड़’की लड़की, फिर जो हुआ उसे देख सब हैरा’न रह गये
अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हम कहीं ना कहीं आते जाते ही रहते हैं अधिकतर सफर के लिए हम ट्रेन बस या मेट्रो का सहारा लेते हैं। अक्सर इन बसों और ट्रेनों में कुछ ऐसे लोग भी चढ़ते हैं जो हमारे शहर के लिए नए होते हैं। आपके शहर की सभ्यता और बिग बाजार या मॉल से अनजान किसी गांव से ताल्लुक रखने वाले यह लोग बसों और ट्रेनों में बाल्टी टोकरी या अन्य किसी गठरी के साथ चढ़ जाते हैं और उस समय ऐसे लोगों के लिए बस में बैठे अन्य लोग एक विचित्र तरह का व्यवहार करते हैं तिरछी निगाहों से इन गांव वालों को देखने वाले बस यात्री उनका स्वागत नहीं करते हैं।
लेकिन कई बार हम यह बात भूल जाते हैं कि कभी हम भी किसी अनजान शहर के बस या ट्रेन के यात्री बने होंगे । कभी हमने भी ऐसे ही किसी अनजान बस में सफर किया होगा जहां के लोग हमारी सभ्यता से बिल्कुल अलग रहे होंगे । कई बार ऐसा होता है कि हम शहर के लोग किसी छोटे गांव से आने वाले लोगों से जल्दी ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि हमें उनके रहने रहने का तरीका पसंद नहीं आता है।

आज हम बात करने जा रहे हैं न्यूजीलैंड की एक ऐसी ही घटना के बारे में. मामला दरअसल यह है कि न्यूजीलैंड की एक ट्रेन में एक हिंदुस्तानी व्यक्ति अपनी बीवी से बात कर रहा था उन पति पत्नी के बगल में ही न्यूजीलैंड की रहने वाली एक लड़की बैठी हुई थी । पति पत्नी आपस में बात ही कर रहे थे कि अचानक से वह लड़की उस हिंदुस्तानी आदमी पर चीखने चिल्लाने लगी। उस लड़की ने तेज आवाज में कहा कि हिंदी में बात करना बंद करो और अपने देश वापस जाओ और अगर तुम यहां रहना चाहते हो तो तुम्हें अंग्रेजी में बात करनी होगी ।
लेकिन इसके आगे जो हुआ उसे जानकर आप सभी हैरान हो जाएंगे जिस समय वह लड़की हिंदुस्तानी आदमी पर तेजी से चिल्ला रही थी और उसे वहां से जाने के लिए कह रहे थे उस समय सभी पैसेंजर उस हिंदुस्तानी व्यक्ति के साथ खडे हो गये। यहां तक की ट्रेन के कोच जेजे फिलिप को भी यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं आई।

उस कंडक्टर ने लड़की की इस प्रकार की हरकत पर ट्रेन को रुकवा दिया और उस लड़की से तुरंत ट्रेन से उतर जाने के लिए कह दिया और आपको बता दें कि कंडक्टर के इस फैसले से ट्रेन में बैठा हर पैसेंजर सहमत था । ट्रेन में बैठे सभी पैसेंजर्स का यही मानना था कि न्यूजीलैंड एक ऐसा मुल्क नहीं है जो किसी और देश के नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार करने की इजाजत दें।
जिस समय लड़की से ट्रेन से उतर जाने के लिए कहा गया उस समय लड़की ट्रेन से उतरने को तैयार नहीं थी वह बार-बार यही कह रही थी कि मै ट्रेन से नहीं निकलूंगी लेकिन कंडक्टर ने उसके व्यवहार पर सख्ती दिखाते हुए पुलिस को बुलाया और उसे ट्रेन से उतार दिया ।
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।
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