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Lok Sabha Debates- कांग्रेस के नेता की तरफ गुस्से में क्यों दौड़े बलिया सांसद ?
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के भाषण के दौरान उस समय सदन में एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गई, जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार तीखा हमला बोल रहे थे। उनके भाषण के दौरान ही बलिया से भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त विरोध जताते हुए उनकी तरफ दौड़े पड़े।
सत्ता पक्ष की तरफ से केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, अर्जुन राम मेघवाल और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सहित अन्य कई सांसदों ने तुरंत दौड़ते हुए उन्हें अधीर रंजन चौधरी के पास जाने से रोका। इस बीच विपक्ष के भी कई सांसद गुस्से में वेल में आ गए।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने उन्हें रोका और शांत किया। प्रल्हाद जोशी ने इसके बाद विपक्षी बेंच की तरफ जाकर भी विपक्षी सांसदों से बात कर उन्हें शांत किया।
जिस समय सदन में यह स्थिति पैदा हुई, उस समय सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और सोनिया गांधी समेत दोनों पक्षों से कई दिग्गज नेता मौजूद थे।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बोले गए अधीर रंजन चौधरी के भाषण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अमित शाह और प्रल्हाद जोशी ने इसे कार्यवाही से निकालने और अधीर से माफी मांगने की मांग की। जिसके बाद वीरेंद्र सिंह ने माफी मांगते हुए कहा कि मैंने सदन के व्यवहार का हमेशा सम्मान रखा, मुझे जो भी हुआ है मैं आप से क्षमा चाहता हूँ , मैं अपने नेता का अपमान बर्दाश्त नहीं कर पाया इस लिए आप से क्षमा चाहत हूँ
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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BHU छात्र नेता योगेश योगी के प्रयास से एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को मिली मंजूरी!
बलिया। फेफना जंक्शन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी हो गई है। बीएचयू छात्र नेता योगेश योगी के लगातार प्रयास और पहल से रेलवे ने एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को स्वीकृति दे दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 जनवरी से इन ट्रेनों का फेफना स्टेशन पर ठहराव शुरू हो जाएगा। इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दयानंद मिश्रा ‘दयालु’ को दिया जा रहा है,
छात्र नेता योगेश योगी ने यात्रियों, छात्रों और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के समक्ष लगातार मांग उठाई थी। उनके प्रयासों के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिससे क्षेत्र के हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
ट्रेन ठहराव से विशेष रूप से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले मरीजों को सुविधा होगी। स्थानीय लोगों ने इसे जनहित में लिया गया निर्णय बताते हुए योगेश योगी के प्रति आभार जताया है।
योगेश योगी ने कहा कि यह केवल शुरुआत है, आगे भी क्षेत्र और छात्रों के हित में संघर्ष जारी रहेगा।
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