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बलिया को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की सौगात, अधिकारी ने बताया NH-31 पर कार्य धीमी गति से क्यों
बलिया। बलिया सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त की पहल पर केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा बलिया को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की सौगात दी हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे गाजीपुर से मांझी तक बनेगा जो बिहार के रिवेलगंज वाईपास से जुड़ेगा।
बुधवार को बलिया पहुंचे एनएचएआई के आर ओ विपिनेश शर्मा, पीडी पंकज पवार एवं एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त के साथ लगभग एक घण्टे तक बैठक की उसके बाद मीडिया को इसकी जानकारी दी गई। एनएचएआई के आर ओ विपिनेश शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पर तेजी से कार्य आगे बढ़ रहा हैं।

इस मार्ग के लिये सर्वे का कार्य पूरा हो चुका हैं। इसी वर्ष जून से किसानों की जमीन का मुआवजा देने का कार्य शुरू हो जाएगा। सितम्बर तक इसकी निविदा हो जाएगी तथा नवम्बर से इस मार्ग के निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा। विपिनेश शर्मा ने बताया कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे कुल चार तहसीलों से होकर गुजरेगा जिसमें गाजीपुर सदर, मोहम्दाबाद, बलिया सदर व बैरिया तहसील शामिल है।
यह एक्सप्रेस वे माल्देपुर, जनाड़ी, तथा बलिया सदर के दक्षिणी छोर से निकलेगी जो सोनवानी होते हुए टेंगरही बिड़ला बंधे से वाईपास मठ योगेन्द्र गिरी, मांझी होते हुए बिहार के रिवेलगंज बाईपास में मिलेगी। एनएचएआई के आर ओ ने बताया कि सांसद श्री मस्त ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे से बलिया रेलवे ओभरवृज को जोड़ने का प्रस्ताव दिया था जो स्वीकृत हो गया हैं।
जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हो सका
एनएचएआई के अधिकारियों की मौजूदगी में सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त ने पत्रकारों को बताया कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नही हैं कि बलिया का अभी तक उतना विकास नहीं हो सका हैं जितना होना चाहिए था।
किसी भी जगह के विकास के लिये वहां की परिवहन सेवा सबसे महत्वपूर्ण होती हैं। मैंने केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर कहा कि बलिया आजादी की लड़ाई में सबसे अगली पंक्ति में खड़ा रहा। विकास में भी यह आगे रहे ये हम सबकी जिम्मेदारी हैं। मंत्री जी ने कहा मुझे प्रस्ताव दीजिए मैं उसे अभी स्वीकृति दे देता हूँ।
सांसद ने बलिया व गाजीपुर की जनता की ओर से केंद्रीय मंत्री गडकरी जी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने मेरी मांग पर गाजीपुर से मांझी तक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को न सिर्फ मंजूरी दिया बल्कि उसका बजट एलाट कर दिया। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बलिया लोकसभा के विकास का मार्ग प्रसस्थ करेगा।
एनएचएआई के अधिकारी ने बताया एनएच 31 पर कार्य इतनी धीमी गति से क्यों
भाजपा के संसदीय कार्यालय सोनबरसा पहुंचे एनएचएआई के आर ओ विपिनेश शर्मा व पीडी पंकज पवार से जब पत्रकारों ने सवाल किया कि एनएच 31 पर कार्य इतनी धीमी गति से क्यों हो रहा हैं तथा यह सड़क कब तक बनेगी। एनएचएआई के आर ओ ने बताया कि लगभग दो साल पहले इस मार्ग की टेंडरिंग प्रक्रिया हुई थी। लो रेट की वजह से कार्य मे ब्यवधान उत्पन्न हुआ था। अब रेट वेरियेशन एवं एक्स्ट्रा मेटेरियल के लिये प्रस्ताव गया था जो स्वीकृत हो चुका हैं। अब इस कार्य मे जो भी बाधा थी उसे दूर कर लिया गया हैं। ठेकेदार को निर्देश दिये गये हैं कि वे 30 जून के पहले हर हाल में मांझी से हल्दी तक सड़क का मरम्मत कार्य पुरा करें। विपिनेश शर्मा ने बताया कि अब एनएच 31 पर सड़क और चौड़ी बनेगी तथा माल्देपुर से कदम चौराहा तक डिवाइडर भी बनेगा।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


