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“बुद्धि पर से मास्क हटाए, पर्यावरण के लिए आगे आए”
जब भी पर्यावरण संरक्षण के बात होगी तो उत्तराखंड में 70 के दशक में हुए ‘चिपको आंदोलन’ और सुंदरलाल बहुगुणा का जिक्र होना स्वभाविक है। उल्लेख इसलिए भी कि आजादी के बाद आधुनिकता और कथित विकास के होड़ में हमको पहली बार 80 के दशक में याद आया कि पर्यावरण को भी संविधान का हिस्सा होना चाहिए ।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ.शेखर पाठक के अनुसार, 1980 में वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण मंत्रालय का गठन भी ‘चिपको’ की वजह से ही संभव हो पाया।
70-80 के दशक में बहुगुणा जैसे कुछ योद्धाओ ने शहरों के प्रदूषण से लेकर गांव और जंगलों में जहरीली होती हवा के दर्द को आवाज दी थी। ये लोग उस निर्मम व्यवस्था के खिलाफ उठ खड़े हुए जो मानती थी जल,जंगल,जमीन,हवा,पहाड़, नदी मानव के बंधक है। उस दौर में उठे ऐसे तमाम प्राकृत प्रेमियों की आवाज़ अगर सुनी गई होती तो हमारा मुल्क कई सारी आपदा और विपदा से बच सकता था।
अगर ध्यान दे तो हमारे आस – पास के वातावरण में एक अजीब हलचल सुनने को मिलेगी। नष्ट होते पर्यावरण, बर्बाद होते जल, लुप्त होती चिड़िया-चुरूंग और हर तरफ ऑक्सीजन के लिए मची चीख-पुकार की हृदय विदारक वेदना को सुन पाएंगे।
आखिर क्यों लोग अस्पतालों के बाहर भगवान से ज्यादा ऑक्सीजन को पुकार रहे हैं? आखिर क्या हुआ उस आर्थिक उड़ान का जिसने पर्यावरण को ताक पर रख दिया? आखिर क्या वज़ह है कि हर तरफ प्राकृत अपना रौद्र रूप दिखा रहा है,और क्या हुआ उन आधुनिकता और कृत्रिमता पर विश्वास करने वाले विकसित राष्ट्रों का जो इनको नियंत्रण नही कर पा रहीं है।
अगर आपके बुद्धि पर मास्क नहीं लगा होगा तो आप सहजता से सोच पाएंगे कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है!
इसको समझने के लिए किसी राकेट साइंस की जरूरत नहीं है, बस अपने दिमाग़ पर थोड़ी सी जोड़ दीजिए कि आपको पर्यावरण विरासत में क्या मिला था और आप वरासत में क्या देंगे ?
दरअसल प्राकृतिक ने मनुष्य के आवश्यकताओं के पूर्ति के लिए मुफ्त में जंगल-झाड़, पेड़-पौधा हवा,पानी उपजाऊ भूमि के लिए जीव-जंतु, चिड़िया-चुरूंग मुफ्त में मुहैया कराया है। परंतु कथित विकास के प्रतिस्पर्धा में हमारी महत्वाकांक्षाओं ने इन्हें नष्ट करके अपने सपनों का हवा महल बना लिया । पर सवाल है किसके लिए ?
हिंदू धर्म के अनुसार, जीवन पाँच तत्त्वों- पृथ्वी, जल,अग्नि, गगन वायु से मिलकर बना है। मतलब मनुष्य की उत्पत्ति का आधार ही प्राकृत है। अगर ईश्वर जन्म देता है तो प्राकृत पालता है अगर ईश्वर पिता है तो प्राकृत माँ और इस बात की पुष्टि स्वयं भारतीय संस्कृति करता हैं जहाँ ‘माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या’ अर्थात पृथ्वी हमारी माँ है और हम पृथ्वी के पुत्र हैं।
लेकिन इसके विपरीत आज मनुष्य का आचरण कदापि भी धरती के प्रति मां के स्मरूप नहीं है। धरती तो आज भी मां के समान पालन पोषण कर रही है लेकिन बदले में मानव कलयुगी पुत्र बन कर उसके साथ धोखा ही करता जा रहा है। हमारे यहां एक कहावत है ‘जो बोयेंगे वही काटेंगे’ इस धोखे का दुष्परिणाम मनुष्य झेल रहा है।
आज भारत मे प्रतिवर्ष वायु प्रदूषण से लगभग 25 लाख लोगों की मौत होती है, तो 90 प्रतिशत जनसंख्या के पास स्वच्छ भू-जल उपलब्ध नहीं है। भारत मे पर्यावरण पर कानून होने के बावजूद WHO के रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 भारत के है।
पर्यावरणविद पदम श्री डॉक्टर अनिल जोशी के मुताबिक दुनिया में हर साल 10 मिलियन हेक्टेयर जंगल काटे जा रहे हैं जो कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। इन सब घटनाओं को आप मानव निर्मित आपदा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ?
आए दिन जंगलों में आग,भूकंप, बाढ़-सूखा, चक्रवात , बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि और ज्वालामुखी की खबरें आती रहती है। इसी वर्ष उत्तराखंड के चमोली में जो हुआ उसे प्राकृतिक आपदा कह कर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। शायद इतिहास में पहली बार ठंड में ग्लेशियर का पिघलना यह दर्शाता है की पृथ्वी पर सब कुछ ठीक नहीं है।
दुर्भाग्य देखिए इस आपदा के चपेट में वो रैणी गांव भी आ गया जहाँ पर्यावरणीय चेतना ‘चिपको’ का जन्मस्थान भी माना जाता है।
अब समय आ गया है कि हम संकल्प ले कि आज से प्रकृति भरण पोषण करेंगे। नदी – तालाब ,उद्यानों का सरंक्षण करेंगे। हम सभी ने बचपन मे स्कूली शिक्षा के दौरान किताबो में पर्यावरण के बारे में बहुत से रोचक तथ्यों को पढ़ा था। पर्यावरण – पारिस्थितिकी तंत्र , जीव जंतु , वनस्पति और इनसे मिलने वाली प्राणदायी ऑक्सीजन । बस अब समय आ गया है कि उस शिक्षा का सदुपयोग करते हुए ” हमारा हाँथ प्राकृत के साथ ” अभियान के साथ प्रकृति को सुरक्षित करे।
अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें, जल संरक्षण का उचित प्रबंधन करें और जन जागरूकता कार्यक्रम से स्वयं भी और सबको जागरूक करें । यही सच्चे मायने में धरती माँ के पुत्र होने का कर्त्तव्य है।
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CBSE ईस्ट जोन हॉकी प्रतियोगिता में जमुना राम स्कूल की बेटियों का कमाल, कांस्य पदक जीतकर बढ़ाया मान
गोरखपुर स्थित बी.एन. पब्लिक स्कूल में 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक आयोजित सीबीएसई ईस्ट जोन हॉकी प्रतियोगिता (सत्र 2026-27) में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव (बलिया) की अंडर-17 बालिका हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (तृतीय स्थान) अपने नाम किया। इस उपलब्धि से विद्यालय के साथ-साथ पूरे बलिया जिले का गौरव बढ़ा है।

प्रतियोगिता के दौरान टीम ने कई मजबूत विद्यालयों को कड़ी टक्कर देते हुए सेमीफाइनल तक का शानदार सफर तय किया और अंततः तीसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
कांस्य पदक जीतकर विद्यालय पहुंची टीम का ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा और तालियों की गूंज के बीच भव्य स्वागत किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि, “हमारे विद्यालय की बेटियां आज शिक्षा के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। सीबीएसई ईस्ट जोन प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतना उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। विद्यालय प्रबंधन खिलाड़ियों को भविष्य में भी विश्वस्तरीय सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।”
इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया। खिलाड़ियों की इस सफलता से विद्यालय में उत्साह का माहौल है और अन्य छात्र-छात्राओं को भी खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली है।
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‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जमुना राम पीजी कॉलेज में हुआ पौधरोपण, वन महोत्सव-2026 का आयोजन
बलिया। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को श्री जमुना राम पीजी कॉलेज, चितबड़ागांव में ‘वन महोत्सव-2026’ के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में आम के फलदार पौधे रोपकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, चितबड़ागांव शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक शक्ति कुमार ने पांच आम के पौधे लगाकर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मानंद, उप प्राचार्य डॉ. विपिन गुप्ता, शिक्षा संकायाध्यक्ष डॉ. उदयनारायण श्रीवास्तव, डॉ. विनोद यादव, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, बृजेश गुप्ता, आरती पांडे, मंदाकिनी सिंह, मदन सिंह सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण और उनकी नियमित देखभाल करने का संदेश दिया।
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आवास योजना में लापरवाही पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश
बलिया। जिले में राजस्व और विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने भूमि आवंटन और आवासीय पट्टा वितरण में खराब प्रगति पर सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) का वेतन रोकने के आदेश दिए। साथ ही लंबित राजस्व वादों के 15 दिनों के भीतर निस्तारण और 90 दिन से अधिक पुराने मामलों को मिशन मोड में खत्म करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों से जुड़े 25 महत्वपूर्ण एजेंडों की समीक्षा करते हुए आईजीआरएस, डिजिटल क्रॉप सर्वे, स्वामित्व योजना, अंश निर्धारण, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, भूमि आवंटन, मत्स्य पट्टा, चकबंदी, बाढ़ प्रबंधन और अन्य राजस्व मामलों की प्रगति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया।
उन्होंने आईजीआरएस के लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। स्वामित्व योजना के तहत लक्ष्य के सापेक्ष 1,286 गांवों में सर्वे कार्य शेष रहने पर नाराजगी जताते हुए सभी एसडीएम को अभियान चलाकर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
आगामी बाढ़ को देखते हुए डीएम ने रेड जोन के गांवों की पहचान, नावों की उपलब्धता, मेडिकल कैंप, पशुओं के चारे, राहत सामग्री और कंट्रोल रूम की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 183 संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए समुचित तैयारी रखने को भी कहा।
राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धारा 24, 33, 34, 67 और 116 से संबंधित लंबित मामलों की स्थिति जानी और निर्देश दिया कि सभी लंबित वादों का 15 दिनों के भीतर निस्तारण किया जाए। 90 दिन से अधिक पुराने मामलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्रवाई करने को कहा।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत सभी तहसीलों में 16 प्रकरण लंबित मिलने पर उन्होंने संबंधित लेखपालों और कानूनगो के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
भूमि आवंटन की समीक्षा में रसड़ा, सिकंदरपुर और बैरिया तहसीलों में कृषि पट्टों का आवंटन नहीं होने पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। वहीं आवासीय पट्टा वितरण में लक्ष्य के अनुरूप प्रगति न मिलने पर सभी एसडीएम का वेतन रोकने के आदेश जारी किए।
मत्स्य पालन के लिए पट्टा आवंटन में बांसडीह, बलिया सदर और बैरिया तहसीलों की खराब प्रगति पर संबंधित तहसीलदारों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं चकबंदी विभाग में 4,969 मुकदमे लंबित मिलने पर संबंधित अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी करने और पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में अन्नपूर्णा भवनों के उद्घाटन, सस्ता गल्ला दुकानों के चयन, अवैध खनन पर कार्रवाई, भूमि अधिग्रहण, नदी कटान निरोधक कार्य, गंगा ऑडिटोरियम के जीर्णोद्धार, एसटीपी परियोजना तथा अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी गुलशन जी, सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


