बलिया
6 साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ खरीद-दरौली पुल का निर्माण
बलिया। सरयू नदी पर खरीद-दरौली पुल का निर्माण 6 साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। कारण यह है कि पुल की लंबाई को लेकर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है। जिसके कारण पुल निर्माण में देरी हो रही है।
बता दें कि 114.06 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण चल रहा है। लेकिन अब पिलर संख्या बढ़ने पर इसकी लागत भी बढ़ जाएगी। पिलर संख्या बढ़ाने को लेकर लोक निर्माण विभाग ने लखनऊ प्रस्ताव भेजा था। जिसको लेकर पांच सदस्यीय राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। जिसके अध्यक्ष लखनऊ लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को बनाया गया था।
6 वर्ष पहले सरयू और गंगा पर तीन पुलों के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। अब कहा जा रहा है कि 2 साल में पुल बनकर तैयार हो जाएंगे। हालांकि निर्माण कार्य में देरी के चलते तीनों पुलों की बनने की लागत काफी बढ़ गई है। इसमें सरयू पर खरीद-दरौली के बीच पक्का पुल भी रहा। उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के खरीद एवं दरौली (बिहार) घाटों के मध्य सरयू नदी पर पक्का पुल की स्वीकृति वर्ष 2016 में मिली थी। 114.06 करोड़ रुपये की लागत से करीब 1500 मीटर लंबा बनने वाले इस पुल के लिए 31 पाए स्वीकृत हैं।
वहीं बीते वर्षों में नदियों के तेज बहाव से निर्धारित स्थान का कटान भी कापी हुआ है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने पिलर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। विभाग ने करीब 200 मीटर पुल की लंबाई बढ़ाने की बात कही थी। शासन की ओर से इसके लिए कमेटी भी बनी थी और अफसरों ने मौका मुआयना किया। लेकिन अभी तक निर्माण नहीं हो सका है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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