बलिया। जनपद के बसंतपुर व आसपास के क्षेत्रों में सालों से कुटीर उद्योग का रुप धारण कर चुके अवैध शराब (कच्ची) के धंधे को बंद कराने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही पहल की है। ग्रामीणों की एक सभा रविवार को गांव के ऐतिहासिक यज्ञशाला प्रांगण में हुई। सभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि गांधीवादी तरीके से तीन दिन तक बनाने वालो से निवेदन किया जायेगा।
उसके बाद पुलिस प्रशासन को अवैध शराब बंद कराने को सात दिन का समय दिया गया। अगर सात दिन के अंदर पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है तो सभी ग्रामीण जनपद पर धरना-प्रदर्शन व चक्का को बाध्य होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इसके पूर्व ग्राम की भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग गांव में घूम-घूम कर कच्ची शराब बंद कराने का आह्वान किया। बच्चों और महिलाओं के हाथों में तख्तियों पर नारे लिखे हुए थे। उसके बाद इस आक्रोशित जुलूस ने एक सभा का रूप ले लिया।
बैठक सभा को सम्बोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य डा. गजेन्द्रपाल सिंह ने कहा कि आजादी से लेकर अब तक बसंतपुर गांव का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां की प्रतिभाओं ने सभी क्षेत्रों में अपना लोहा मनवाया है। लेकिन आज हमारे गांव की पहचान कच्ची शराब निर्माण के रूप में हो रही है। जो काफी दुखद है। इस गोरखधंधे के दोषियों को पहचानने की जरूरत है।
ग्राम प्रधान विजय प्रताप सिंह ने कहा कि यह कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है और घर-घर बन रहा है। इसके आगोश में गांव के नौजवान आ चुके हैं। विगत में अवैध शराब का सेवन करने वाले करीब दो दर्जन लोग काल के गाल में समा चुके हैं। इसको बंद कराने के लिए लंबी लड़ाई ईमानदारी से लड़ने की जरूरत है।
अध्यापक अरविंद सिंह ने कहा कि इसमें पुलिस प्रशासन व आबकारी विभाग सीधे-सीधे सम्मिलित हैं। पुलिस को अवैध शराब बनवाने के एवज में मोटी रकम की कमाई होती है। ऐसी सूचना है कि लाखों रुपए महीने पुलिस को कमाई होती है।
पूर्व प्रधान नित्यानंद मिश्र ने कहा कि हमें स्थानीय लोगों से तो लड़ना ही है, हमारी लड़ाई पुलिस प्रशासन से भी है। अगर हम ग्रामीण एकजुट होकर लड़ें तो हम यह जंग जरूर जीतेंगे।
विश्राम बिंद ने कहा कि कच्ची शराब को बंद कराने को अगर एक-एक व्यक्ति कसम खा ले तो यह कुटीर उद्योग जरूर बंद होगा। नहीं तो गांव का सर्वनाश होने से कोई बचा नहीं सकता है। इस मौके पर हजारों की संख्या में महिलाएं बच्चे बुजुर्ग मौजूद रहे। अध्यक्षता दीनानाथ सिंह ने व संचालन कार्यक्रम के संयोजक इन्द्रजीत सिंह ने किया।
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