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बलियाः हत्या के मामले में दो आरोपियों को 10 साल की सजा
बलियाः कोर्ट ने हत्या के मामले में दो आरोपियों को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों पर 10 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने यह फैसला सुनाया है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम बघेरा के दूधनाथ वर्मा ने सुखपुरा थाना में आवेदन दिया था कि बच्चों के विवाद में वीरेंद्र वर्मा, रामनाथ वर्मा, दमरी वर्मा ने हमला करके उसके भाई मौके को मार डाला। पीड़ित पक्ष की ओर से वीरेंद्र वर्मा, रामनाथ वर्मा व दमरी वर्मा के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
जहां फरियादी पक्ष की ओर से कोर्ट में साक्ष्य पेश किए गए, कुल 9 गवाहों को पेश किया। अभियोजन पक्ष के तरफ से विनय सिंह सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी व बचाव पक्ष की तरफ से दिनेश तिवारी ने दलीलें दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वीरेंद्र वर्मा व रामनाथ वर्मा को दोषी पाया और दस साल सश्रम कारावास व 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की सजा भुगतनी होगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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