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बलियाः जुहू चौपाटी की तरह बनेगा कटहल नाला, 200 करोड़ खर्च कर बदलेगी तस्वीर
बलिया का कटहल नाला कुछ ही दिनों में जुहू चौपाटी की तरह दिखेगा। जी हां प्रशासन ने नाले को पिकनिक स्पॉट की तरह विकसित करने की तैयारी कर ली है। करीब 200 करोड़ रुपए खर्च कर नाले की तस्वीर को बदला जाएगा।
नाले की सफाई और किनारा बनाने का काम शुरु हो चुका है। अभी नाला पर सूरहा ताल की तरफ से काम हो रहा है। वहीं सिंचाई विभाग को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। शहर में सैर सपाटा के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में कटहल नाले की सूरत को पूरी तरह बदला जा रहा है। नाला के दोनों तरफ पाथवें तथा गंगा नदी के किनारे एसटीपी निर्माण की भी योजना है। इससे गंगा नदी को प्रदूषित होने से भी बचाया जायेगा।
बता दें कि कटहल नाले का सौंदर्यकरण नगर विधायक व मंत्री दयाशंकर सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करने हल्दी में पहुंचे सीएम योगी ने शहर के विकास का दावा किया था। इसके अलावा भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने भी मुंबई के जुहू चौपाटी की तरह जगह बनाने की बात कही थी।
चुनाव जीतने के बाद दयाशंकर ने कटहल नाला को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की योजना तैयार की गई। जिला प्रशासन की ओर से प्रोजेक्ट तैयार किया गया। शासन की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही दो सौ करोड़ रुपए आंवटित कर दिए गए। इसके बाद अब नाले के सौंदर्यकरण का काम शुरु हो चुका है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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