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बलिया में भी ट्रैक्टर पॉलिटिक्स, समाजवादी पार्टी ने मारी एंट्री !
बलिया डेस्क : पिछले कुछ दिनों से कृषि विधेयकों के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी देहाती इलाकों में ट्रैक्टर पर सवार होकर खेती बचाओं किसान बचाओ का संदेश दे रहे हैं। जिसको सत्ता पक्ष ने ट्रैक्टर पॉलिटिक्स का नाम दिया है तो वहीँ बलिया भी अब ट्रैक्टर पॉलिटिक्स को लेकर समाजवादी पार्टी ने एंट्री मारी है। जिसके बाद चर्चाओं का बाज़ार गर्म है
इसी क्रम में गुरुवार को बलिया में पचासों गांव के हजारों किसानों ने समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मंत्री नारद राय के नेतृत्व में जलभराव की समस्या से निजात एवं उससे हुए नुकसान के मुआवजा की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर सैकड़ों ट्रैक्टर से पहुंचे और वहाँ प्रदर्शन किया।
अपनी मांगों से सम्बंधित महामहिम राज्यपाल को संबोधित पत्रक दिया। किसान ट्रैक्टर और ट्राली सहित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। जिससे कलक्ट्रेट चारों तरफ से ट्रैक्टर से ही घिर गया और कचहरी से टीडी कालेज चौराहा, ओवरब्रिज में ट्रैक्टर की लंबी कतार लग गई।
Former cabinet minister Narad Rai and his supporters in @samajwadiparty take out 🚜 march in UP's Ballia district in protest against hundreds of acres of farm land destroyed due to flooding and other farm woes. Demand relief package for farmers doubly hit by Covid-19. @UPGovt pic.twitter.com/zIUziuhtdQ
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) October 8, 2020
बलिया जनपद के लिए प्रदर्शन का यह एक अलग और अनोखा अन्दाज रहा। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी नहीं थे। जिस पर समाजवादियों का पारा चढ़ गया तथा घोषणा किया गया कि जिलाधिकारी स्वयं पत्रक लें या हम लोगों से वार्ता कर संतुष्ट करें। तब पत्रक दिया जाएगा। अन्यथा हम लोग यहीं ट्रैक्टर के साथ बैठेंगे।
जिसपर प्रशासन हरकत में आ गया और जिलाधिकारी को फोन पर नारद राय से बात की। जिसके उपरान्त पार्टी के जिला प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने उपस्थित जनसमूह के सामने पत्रक में उल्लेखित समस्याओं को पढ़ कर सुनाया तथा पत्रक में कही गयी बातों पर हाथ उठवा कर समर्थन लिया।
जिसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट को पत्रक दिया गया। पत्रक के माध्यम से किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके के किसान 2018 से प्रतिवर्ष जलभराव से जूझ रहे है और फसल बर्बाद हो रही है। जिससे हम लोगों का परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है और उक्त के सम्बंध में हम लोगों की तरफ से बार-बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से गुहार लगाई गई।
आज दिनांक 08-10-2020 को माननीय मंत्री @NARADRAIBALLIA जी के नेतृत्व में बोहा के जलनिकासी के संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में ,
साथ में राजमंगल यादव (जिलाध्यक्ष) जी। pic.twitter.com/5xaTUxY7fO— Dashrath Pradhan (@Dashrathjee04) October 8, 2020
लेकिन दुखद यह है कि उन लोगों द्वारा हमारे दर्द को हमेशा अनदेखा किया जाता रहा। जिससे मजबूर होकर हम लोगों को अब आन्दोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। जिसका यह प्रथम चरण है। अगर फिर भी हमारी बात नही सुनी जाएगी तो हम इस आंदोलन को और तेज करेंगे।
मुआवजा दिलाऊंगा, नहीं तो आर या पार होगा– वहीँ इस इस अवसर पर पूर्व मंत्री नारद राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के सरकार में नगर क्षेत्र सहित बोहा क्षेत्र एवं सुरहा ताल से जल निकासी के सुविधा को प्रस्तावित कर कुछ कार्य भी किया गया था,
लेकिन वर्तमान सरकार जिसे कि जनहित के कार्यों से कोई सरोकार नहीं है, उस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उस इलाके के किसान आज भूखमरी के शिकार हो रहे हैं। जिसे देखते हुए समाजवादी पार्टी ने निर्णय लिया है कि बोहा, सुरहा ताल एवं नगर क्षेत्र के जल निकासी के लिए पार्टी पूरी तरह से संघर्ष को तैयार है और किसानों को प्रति एकड़ 15000 हजार रु़ मुआवजा भी दिलाएगी अन्यथा अब आर या पर होगा।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।




