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बलिया

बलिया में 340 प्रधानाध्यापकों के वेतन रोकने के आदेश!

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बलिया के विभिन्न विद्यालयों के 340 प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने के आदेश जारी हुए हैं। BSA ने शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए यू-डायस पोर्टल पर स्टूडेंट डाटा की प्रगति 25 प्रतिशत से भी कम होने पर ये कार्रवाई की है।

बीएसए ने आदेश में साफ कहा है कि संबंधित अध्यापक का वेतन तभी देय होगा, जब उनके द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कार्य पूर्ण होने का प्रमाणपत्र बीएसए कार्यालय में उपलब्ध कराया जाएगा।

बीएसए ने कहा कि शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु यू-डायस के अन्तर्गत डाटा कैप्चर फार्मेट (डीसीएफ) पर शुद्ध एवं विसंगति सहित आंकड़े ऑनलाइन भरे जाने हेतु विकास खंड व विद्यालय स्तर पर कार्यवाही गतिमान है। कक्षा 1 से लेकर 12 तक सभी प्रबंधन के विद्यालयों का डाटा 17 अप्रैल 2023 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कराए जाने के लिए निर्देशित किया है। 26 अप्रैल 23 को रिपोर्ट देखने पर यह संज्ञान में आया कि 340 परिषदीय/ सहायता प्राप्त विद्यालयों द्वारा 25 प्रतिशत से भी कम इंट्री की गई है।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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