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सिकंदरपुर

Ballia – सिकंदरपुर में बनेगा मुंसिफ न्यायालय, जिला जज ने किया निरीक्षण

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बलिया। जिले के सिकंदरपुर तहसील में लम्बे समय से मुंसिफ न्यायालय खोलने की मांग हो रही थी जो की अब पूरी होती दिख रही है। इसी क्रम में जिला जज हुसेन अहमद अंसारी तथा मुख्य न्यायिक दंण्डाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने सोमवार को स्थलीय निरीक्षण किया। बताते चलें कि सोमवार की दोपहर उपरोक्त दोनों अधिकारियों ने सिकंदरपुर तहसील प्रांगण में ग्रामीण न्यायालय को शुरू करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देश पर बन रहे भवन का निरीक्षण किया। उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए भवन एवं कार्यालय दोनों पूरी तरह से तैयार है।

जिनको देखकर उपरोक्त दोनों अधिकारी संतुष्ट दिखे।लेकिन शौचालय तथा विश्राम कक्ष के निर्माण को और अधिक परिमार्जित करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सिकंदरपुर अभय कुमार सिंह, तहसीलदार राम नारायण वर्मा,एसएचओ सिकंदरपुर राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। संबंधित प्रकरण में उक्त दोनों न्यायिक अधिकारियों के द्वारा अवगत कराया गया कि वादकारियों के हित में जल्द ही उक्त न्यायालय का गठन तहसील सिकंदरपुर पर कर दिया जाएगा।

बता दें की जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित सिकंदरपुर तहसील के पास मुंसिफ न्यायालय की स्थापना हो जाने से न केवल आसपास की जनता को छोटे मुकदमों के लिए जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इस न्यायालय के जरिए मारपीट, जमीन से जुड़े मुकदमों की सुनवाई होकर यहीं से निस्तारित किया जाएगा। इस न्यायालय से सिकंदरपुर तहसील के अलावा आसपास की तहसीलों के भी इस तरह के मुकदमों की सुनवाई होगी।

 

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सिकंदरपुर की सियासत में नया चेहरा, कौन हैं संजीव कुमार तिवारी? बिजनेस से राजनीति तक कैसे पहुंचा सफर?

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A New Face in Sikandarpur Politics: Who Is Sanjeev Kumar Tiwari? How Did His Journey From Business to Politics Begin?

बलिया। सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अब नए चेहरों की सक्रियता दिखाई देने लगी है। इसी बीच बिजनेस की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले संजीव कुमार तिवारी का नाम भी चर्चा में है। कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले संजीव कुमार तिवारी अब राजनीति के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को उठाने और विकास की नई सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं।

राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली? बिजनेस से राजनीति तक आने का विचार कैसे बना? सिकंदरपुर विधानसभा को ही राजनीतिक कर्मभूमि बनाने के पीछे क्या वजह है? इन सवालों के साथ संजीव कुमार तिवारी अपने राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर बात करते हैं।

सिकंदरपुर की समस्याओं को लेकर उनकी प्राथमिकताओं में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उनका मानना है कि क्षेत्र के विकास के लिए केवल सड़क और भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी विकास के केंद्र में रखना होगा।

बेरोजगारी और पलायन पर क्या है प्लान?

सिकंदरपुर समेत पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका जोर युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर है।

शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर क्या सोच?

संजीव कुमार तिवारी क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विधायक बनने की स्थिति में इन दोनों क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात वह कहते हैं।

क्या पुराने नेताओं से क्षेत्र के साथ न्याय नहीं हुआ?

राजनीति में नए चेहरे के तौर पर सामने आ रहे संजीव कुमार तिवारी से जब यह सवाल पूछा जाता है कि क्या अब तक के जनप्रतिनिधि क्षेत्र के साथ न्याय नहीं कर पाए, तो उनका फोकस आरोप लगाने के बजाय भविष्य की राजनीति पर दिखाई देता है। उनका कहना है कि जनता अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि काम का स्पष्ट रोडमैप चाहती है।

विधायक बने तो पहले 100 दिन में क्या करेंगे?

संजीव कुमार तिवारी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि अगर उन्हें जनता का समर्थन मिलता है तो सत्ता संभालने के शुरुआती 100 दिनों में उनकी प्राथमिकता क्या होगी। उनका कहना है कि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की पहचान, विभागवार समीक्षा और जनता से सीधे संवाद के जरिए प्राथमिकता तय की जाएगी।

क्या होगा विकास मॉडल?

संजीव कुमार तिवारी अपने विकास मॉडल को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, किसानों की समस्याओं और युवाओं के अवसरों से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि सिकंदरपुर का विकास किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विधानसभा के हर गांव और हर तबके तक विकास की पहुंच होनी चाहिए।

क्या चुनाव पैसे और जाति से जीते जाते हैं?

राजनीति में सबसे कठिन सवालों में से एक चुनाव में पैसे और जातीय समीकरण की भूमिका को लेकर भी है। संजीव कुमार तिवारी का मानना है कि चुनाव में जातीय और आर्थिक समीकरण अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन अंततः जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है। वह विकास और साफ छवि को अपनी राजनीतिक पूंजी के तौर पर पेश करते हैं।

जीतने के बाद बदल जाएंगे?

नए राजनीतिक चेहरे के सामने जनता का एक बड़ा सवाल यह भी होता है कि चुनाव से पहले किए गए वादे सत्ता में आने के बाद कितने पूरे होंगे। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार उपलब्ध रहना और अपने काम का हिसाब देना होना चाहिए।

राजनीतिक अनुभव नहीं, फिर भरोसा क्यों?

बिना लंबे राजनीतिक अनुभव के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर भी संजीव कुमार तिवारी से सवाल उठता है। उनका जवाब है कि राजनीति में अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की समस्याओं को समझने की इच्छा, ईमानदारी और काम करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उनका दावा है कि कारोबारी जीवन से मिले अनुभव को वह क्षेत्र के विकास में इस्तेमाल करना चाहते हैं।

टिकट नहीं मिला तो क्या करेंगे?

संजीव कुमार तिवारी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का एक और अहम सवाल टिकट को लेकर है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो उनकी अगली रणनीति क्या होगी? इस सवाल का जवाब ही यह तय करेगा कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित है या वह लंबे समय के लिए सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं।

क्या बलिया सदर पर भी नजर?

सिकंदरपुर से दावेदारी के बीच बलिया सदर सीट को लेकर भी उनसे सवाल किया गया। हालांकि उनकी मौजूदा राजनीतिक सक्रियता का केंद्र सिकंदरपुर दिखाई देता है, लेकिन भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर भी नजर रहेगी।

मौजूदा विधायक के काम को कैसे देखते हैं?

मौजूदा विधायक के काम को लेकर संजीव कुमार तिवारी का आकलन भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका कहना है कि जनता को जनप्रतिनिधि के काम का मूल्यांकन विकास और उपलब्धियों के आधार पर करना चाहिए। आने वाले चुनाव में जनता के सामने अपने-अपने काम और विजन के साथ विकल्प होंगे।

परिवार का कितना मिला साथ?

राजनीति में कदम रखने के फैसले में परिवार की भूमिका को भी संजीव कुमार तिवारी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन आसान नहीं होता और परिवार का सहयोग राजनीतिक सफर को मजबूती देता है।

राजनीति में आने के बाद क्या बदला?

बिजनेस से राजनीति में आने के बाद संजीव कुमार तिवारी के लिए सबसे बड़ा बदलाव लोगों के बीच लगातार रहना और उनकी समस्याओं को करीब से समझना रहा है। अब उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र के लिए काम करने का जरिया है।

युवाओं के नाम संदेश

युवाओं को लेकर संजीव कुमार तिवारी का संदेश है कि युवा राजनीति और समाज से दूरी बनाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझें और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनें। उनका मानना है कि क्षेत्र के भविष्य का सबसे बड़ा आधार युवा शक्ति है।

एक लाइन में क्यों जीतेंगे?

जब उनसे पूछा गया कि आखिर जनता उन्हें ही क्यों चुने, तो उनका जवाब विकास, बदलाव और जनता से सीधे जुड़ाव के इर्द-गिर्द है। संजीव कुमार तिवारी खुद को एक ऐसे नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो बिजनेस की दुनिया से निकलकर अब सिकंदरपुर की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि संजीव कुमार तिवारी की यह राजनीतिक पारी कितनी लंबी चलती है और सिकंदरपुर की जनता उनके विजन और दावेदारी को किस नजर से देखती है।

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सिकंदरपुर

सिकन्दरपुर चाकूबाजी मामला- आरोपी युवक ने वीडियो बनाकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से किया इंकार

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बलिया के सिकन्दरपुर में युवक को चाकू मारने का मामला सामने आया था। अब इस मामले में नई अपडेट सामने आई है। पुलिस ने जिस युवक पर हमला करने का आरोप लगाया था, अब उस युवक ने वीडियो बनाकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार कर दिया है।

युवक अभिषेक राय का कहना है कि मैं पुलिस से गुहार लगा रहा हूं कि मैं दिल्ली में हूं। मुझ पर आर्यन राय पर हमले का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। मेरे पिता को पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है। इस मामले में सही से जांच होनी चाहिए।

जानकारी के मुताबिक सिकन्दरपुर थाना क्षेत्र के रुद्रवार गांव निवासी 14 वर्षीय आर्यन कुमार राय रविवार की सुबह 8:30बजे घर से दूध लेने के लिए गांव में जा रहा था, वह जैसे ही गांव स्थित अपने डेरे के पास पहुंचा कि अचानक पुरानी रंजिश को लेकर उसके डेरे के बगल में रह रहे पटटीदारों ने उसके ऊपर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया।

आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे गंभीर हालत में सदर अस्पताल भेज दिया गया। घाल के पिता ने आरोप लगाया था कि उनके और विपक्षी के बीच सार्वजनिक रास्ते को लेकर 1 महीने पहले विवाद हुआ था जिसमें विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कारवाई नहीं की। इस मामले में अभिषेक राय पर जानलेवा हमला कराने के आरोप लगाए गए थे। अब अभिषक ने वीडियो जारी कर कहा है कि मैं दिल्ली में AGRISENSE LANDSCAPE PRIVATE LIMITED में ड्यूटी कर रहा हूं। मेरे बड़े पिता जी पर राजनैतिक रंजिश में फर्जी FIR दर्ज की गई है और उन्हें जेल में बंद किया गया है। पुलिस उन्हें बार-बार परेशान कर रही है।

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सिकंदरपुर

बलिया में नाबालिग युवक पर चाकू से हमला, जिला अस्पताल में इलाज जारी

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बलिया के सिकन्दरपुर में युवक को चाकू मारने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक रुद्रवार गांव के रहने वाले आर्यन कुमार   घर से दूध लेने निकले  थे तभी आधा दर्जन हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया,जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।

सिकन्दरपुर थाना क्षेत्र के रुद्रवार गांव निवासी 14 वर्षीय  आर्यन कुमार राय रविवार की सुबह 8:30बजे घर से दूध लेने के लिए गांव में जा रहा था वह जैसे ही गांव स्थित अपने डेरे के पास पहुंचा कि अचानक पुरानी रंजिश को लेकर उसके डेरे के बगल में रह रहे पटटीदारों ने उसके ऊपर धारदार हथियार से हमला कर दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया घटना के बाद उसे घायल अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकन्दरपुर ले जाया गया। जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर अवस्था को देखते हुए चिकित्सक ने सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

घायल  के बड़े पिता रत्नेश राय नें  बताया है कि  मुझे इस घटना की फोन पर सूचना मिली थी  जब मैं वहाँ पहुच तो मेरा भतीजा घायलवस्था में खून से लतपथ पड़ा था,

और आरोपी वहां से फरार हो चुके थे। हम लोग तत्काल उसे घायल अवस्था में निजी साधन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकन्दरपुर ले आए,  क्षेत्राधिकार ने कार्रवाई का आश्वाशन दिया है।
रत्नेश राय ने बताया है कि मेरे और विपक्षी के बीच सार्वजनिक रास्ते को लेकर 1 महीने पहले विवाद हुआ था जिसमें विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी दी थी।  लेकिन पुलिस ने कोई कारवाई नहीं की।

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