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बलियाः नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल की जेल
बलिया में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को कोर्ट ने 10 साल की कैद की सजा सुनाई है, साथ ही 20 हजार का अर्थदंड लगाया है। करीब चार साल पहले घटित हुए मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।
जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2019 में रसड़ा थाने में एक नाबालिग बेटी के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म का मामला सामने आया। मामले में पीड़िता के पिता ने एक युवक पर बलात्कार का आरोप लगाया था। पीड़ित ने बताया था कि परिवार के लोग खेतों में फसल काटने गए, तभी आरोपियों ने घर में घुसकर शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
इसी बीच घर के लोग वापस लौटे तो आरोपी को पकड़ लिया। आरोपी ने उस वक्त लड़की से शादी करने का वादा किया लेकिन अगले दिन पीड़िता का परिवार जब आरोपी के घर पहुंचा तो आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी।
गांव में पंचायत हुई लेकिन आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस थाने में रिपोर्ट लिखवाई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपित रमेश राजभर के खिलाफ धारा 376, 504, 506 व पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया।
गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (पाक्सो कोर्ट संख्या 10) ओमकार शुक्ल ने आरोपित रमेश को 10 साल कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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