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बलियाः नई जेल के लिए जमीन फाइनल, 10.40 करोड़ से खरीदी जाएगी 26 हेक्टेयर भूमि

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बलिया के जिला जेल को शहर के बाहर शिफ्ट कराने के लिए तैयारियां शुरु हो गई हैं। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बलिया – गड़वार मार्ग पर बरवा नहर पुल के पास घौसवती गांव में जमीन फाइनल कर दी गई है।

इस प्रोजेक्ट को लेकर मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र गंभीर है। लिहाजा नई जेल निर्माण के लिए कार्यों में तेजी आई है। नई जेल के लिए कुल 26 हेक्टेयर भूमि खरीदी जाएगी जिसके लिए शासन से 10.40 करोड़ रुपए मांगे गए हैं। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही प्रकिया में तेजी आएगी। सर्किल रेट का निर्धारण राजस्व परिषद करेगा, लेकिन जमीन की लागत प्रति हेक्टेयर 40 लाख रुपये निर्धारित कर दी गई है। करीब 109 किसानों को मुआवजा देकर उनसे जमीन की रजिस्ट्री कराई जाएगी।

प्रशासनिक पहल पर किसान पहले से ही जमीन देने को तैयार थे अब सिर्फ जमीनों की रजिस्ट्री होनी है। वर्तमान जेल शिफ्ट होने के बाद यहां खाली जमीन पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मारक बनाने की योजना है। बता दें कि वर्तमान जेल साल 1917 में बनी थी। इसकी क्षमता 350 बंदियों की थी लेकिन इस समय जेल में 834 बंदी है। जिसके कारण जेल की व्यवस्था चरमरा गई है। बारिश के समय जेल में जलभराव हो जाता है जिससे कैदियों को अन्य जनपदों में शिफ्ट करना पड़ता है। जेल की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं।

जिला कारागार के जेलर राजेंद्र सिंह का कहना है कि  अगले सौ वर्षों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक से जिला कारागार का निर्माण होगा। बंदियों को सहूलियत मिलेगी। सभी मार्गों से पहुंचना आसान होगा। चयनित स्थल सुखपुरा, फेफना व गड़वार थानों के बीच है।

सदर तहसीलदार सदानंद सरोज ने बताया कि  जमीन खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही जिला कारागार के लिए अधिग्रहण शुरू कर दिया जाएगा। प्रभावित किसानों को तय मापदंड के हिसाब से लाभ दिया जाएगा।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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