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EXCLUSIVE REPORT: सीएम योगी की ‘सीक्रेट रिपोर्ट’ में बलिया का नाम, जल्द नपेंगे ये अधिकारी !
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश के अधिकारियों की सीक्रेट लिस्ट बनवाई है। लिस्ट में जिला अधिकारी से लेकर थाना प्रभारी स्तर तक के अधिकारियों तक की रिपोर्ट है। शासन स्तर पर तैयार की गई इस लिस्ट में अलग-अलग विभागों का भी नाम है। सूत्रों के हवाले से सामने आई इस सीक्रेट लिस्ट में बलिया के फेफना थाने का भी नाम है। आखिर क्यों, आपको इस रिपोर्ट में आगे बताएंगे।
CM योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन और अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली जन शिकायतों के आधार पर एक लिस्ट तैयार करवाई है। इस काम की मॉनिटरिंग खुद CM योगी कर रहे हैं। इसमें थानों की भी लिस्टिंग हुई है। कौन से थानों पर जनता की शिकायतों का निस्तारण तेजी से होता है और किन थानों पर लापरवाही बरती जाती है, ये पैमाना है। इसी आधार पर टॉप-10 अच्छे और टॉप-10 लापरवाह या कहें कि बॉटम-10 थानों की लिस्ट बनी है।
बॉटम-10 थानों की लिस्ट में बलिया ज़िले के फेफना थाने का भी नाम है। यानी जो पैमाना है उसके मुताबिक फेफना थाना क्षेत्र में जनता की शिकायतों पर पुलिस तेजी से एक्शन नहीं लेती है। कार्रवाई करने में हीलाहवाली बरती जाती है। माना जा रहा है कि इस लिस्ट के आधार पर CM योगी जल्द कार्रवाई कर सकते हैं। यानी ऐसा हुआ तो फेफना थाने पर भी गाज गिर सकती है। थाने के अधिकारी नप सकते हैं।
फेफना में अपराध का ट्रैक रिकॉर्ड:
6 अप्रैल, 2022: फेफना में एक गांव है अगरसंडा। रात के अंधेरे में कुछ बदमाश आते हैं और धारदार हथियार से उमेश यादव नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या कर देते हैं। 20 जुलाई, 2022: फेफना के सागरपली चट्टी के पास सुधीर नाम के एक युवक का शव मिला। परिवार वालों ने कहा कि रात के वक्त गांव के ही वकील उर्फ बब्लू और रसड़ा के अरमान ने सुधीर को एक बर्थडे पार्टी में चलने के लिए बुलाया। सुधीर उनके साथ गया लेकिन फिर कभी ज़िंदा नहीं लौटा। आरोप है कि वकील और अरमान ने ही सुधीर की हत्या कर दी।
फेफना में एक गांव है मिड्ढ़ा। दो भाइयों परवेज अहमद और तबरेज अहमद के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था। एक दिन दोनों के बीच इसे लेकर कहासुनी हो गई। इसी बीच तबरेज की पत्नी अजरा खातून ने अपने ही देवर परवेज पर तेजाब फेंक दिया। परवेज को अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टर ने उसे वाराणसी रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अजरा खातून को गिरफ्तार कर लिया।
ये बीते कुछ महीनों में फेफना में हुई कुछ बड़ी वारदातें हैं। जिनके आधार पर फेफना थाना क्षेत्र में बेलगाम अपराध और सुस्त पुलिस व्यवस्था को समझा जा सकता है। CM योगी की सीक्रेट रिपोर्ट भी यही बात कह रही है।
रडार पर ये थाने भी:
कोतवाली, बांसडीह रोड, सहतवार, रेवती, सिकंदरपुर, उभावं, बैरिया, रसड़ा कोतवाली, मनियर, गडवार, चितबड़ागांव, नरही। सूत्रों की मानें तो ये बलिया के वो थाने हैं जिनपर ख़ास नज़र रखी जा रही है। क्योंकि इन थानों की भी रिपोर्ट सीएम योगी तक पॉजिटिव नहीं पहुंच रही है। माना जा रहा है कि अगली लिस्ट में कुछ और थानों के नाम भी शामिल हो सकते हैं।
बॉटम-10 थानों में कौन-कौन ?
बॉटम-10 थानों में फेफना के अलावा आगरा का बसई अरेला और मसुखपुरा थाना है। सोनभद्र का रामपुर बरकोनिया, गौतमबुद्धनगर का थाना सेक्टर 113, शाहजहांपुर का परौर, गाजीपुर का शादियाबाद, प्रयागराज का सिविल लाइंस, बहरिया और मउआइमा थाना भी इस लिस्ट में शामिल है। इन सभी थानों पर CM योगी की सीधी निगाह है।
अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले वक्त में योगी सरकार सबसे ख़राब रिस्पॉन्स वाले थानों पर क्या कार्रवाई करती है? साथ ही फेफना थाना के किन अधिकारियों पर गाज गिरती है ?
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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