बलिया के सुरहा ताल में इन दिनों पक्षियों की चहचहाहट शुरु हो गई है। अब प्रवासी पक्षी सुरहा ताल की सैर पर निकले हैं। पक्षी विहार में अलग अलग प्रजाति के पक्षियों के झुंड देखे जा रहे हैं जो खुले आसमान सैर करने के साथ साथ ताल के किनारे आराम फरमा रहे हैं। बांसडीह के लगभग 10 किमी क्षेत्र में फैले इस सुरहा ताल में सर्दी शुरु होते ही हजारों की संख्या में लगभग विदेशी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरु हो जाता है। पहले लोग विदेशी पक्षियों को अठखेलियां करते देख खुश होते थे लेकिन अब पक्षियों के आनंद को शिकारियों की नजर लग गई है।
बीते कुछ वर्षों से स्थानीय लोग ताल आने वाले प्रवासी पक्षियों का शिकार कर उन्हें खाने और बेचने को अपना व्यवसाय बना चुके हैं। शिकारियों के खौफ से कुछ नस्ल के पक्षियों ने यहां आना छोड़ दिया है। इस साल भी हजारों मील की दूरी तय कर प्रवासी पक्षी पहुंच रहे हैं। लेकिन फिर से शिकारी सक्रिय हो गए हैं। गौरतलब है कि सुरहा के किनारे बसे गांवों फुलवरिया, बघौता, मैरीटार, कैथवली, सूर्यपुरा, दतिवड़, शिवपुर व बंसतपुर आदि गांवों को बीच से चीरते हुये बारहों मास बहने वाले सुरहा ताल में पैदा होने वाले ललका, सूर्यपंखी, टुड़ैला आदि धान
को खाने के लिये आने वाले प्रवासी मेहमानों को शौकीनों का निवाला बनने से रोकने के लिये कुछ साल पहले शासन ने ताल को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया। राजा सुरथ के नाम से जुड़े साथ ही इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर वाराणासी के हवाले कर दिया। बावजूद, उनके शिकार होने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है। लेकिन अब विदेशी मेहमानों में से कितने शिकारियों से बचकर सुरक्षित वापस लौटेंगे, यह स्थानीय लोगों व सुरक्षा के जिम्मेदारों पर निर्भर करेगा।
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