बलिया
बलिया- पुरानी रंजिश में जानलेवा हमला, खूनी संघर्ष में महिला की मौत
बलिया के बांसडीहरोड में दो पक्षों में खूनी संघर्ष के दौरान एक महिला की मौत हो गयी। जहां पुरानी रंजिश को लेकर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया। मारपीट में 6 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए। इसमें से एक महिला की मौत हो गई, जबकि उसके बेटे की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामले में पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।घटना मझौली चौहान बस्ती की है। जहां शनिवार रात को रामदेव चौहान और अंगराहित चौहान के परिवार अपने-अपने घरों में पूजा अनुष्ठान आदि में लगे थे।
इसी दौरान अचानक अंगराहित के परिवार के लोगों ने रामदेव के परिवार पर हमला बोल दिया। लाठी-डंडो से जमकर पिटाई की। इस मारपीट की घटना में रामदेव चौहान का परिवार बुरी तरह घायल हो गया है। रामदेव, पंचरत्नी देवी उम्र 55 साल, श्रवण, सरोज, सुनीत, श्रीभगवान घायल हो गए। घायल सरोज ने थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।

जिसके बाद फौरन पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले को शांत कराया। वहीं घटना में गंभीर रुप से घायल पंचरत्नी देवी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसके बेटे श्रवण की हालत गंभीर है, जिसे इलाज के लिए डॉक्टरों ने वाराणसी रेफर कर दिया। बाकी घायलों का उपचार जारी है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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