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बलिया- भागलपुर पुल 5 मई से फिर शुरू होने का दावा, पुल की वर्तमान स्थिति कुछ और कह रही..जानिए
बलिया। बलियावासियों के लिए राहतभरी खबर है, क्योंकि भागलपुर पर एक बार फिर आवागमन शुरू होने वाला है। जिससे अब लोगों को जाम से राहत मिलेगी। बलिया को देवरिया और बिहार से जोड़ने वाला सरयू नदी पर बना भागलपुर पुल पर वाहनों का आवागमन 5 मई को दोपहर बाद शुरू होगा। इस दौरान सिर्फ कार और बाइक को ही पुल से आवागमन की छूट होगी। यह दावा परियोजना प्रबंधक ने किया है लेकिन पुल की वर्तमान स्थिति देखकर उनके दावे पर भरोसा करना मुश्किल है।
आवागमन के लिए तैयार नहीं पुल!- दरअसल पुल की वर्तमान स्थिति देखकर ऐसा नहीं लगता कि 5 मई गुरुवार तक वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। क्योंकि पुल पर बहुत सारा मरम्मत कार्य अभी बाकी नजर आ रहा था। इस सम्बन्ध में जब परियोजना प्रबंधक एसपी सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया तो उनका कहना था कि 5 मई गुरुवार की दोपहर बाद पुल को छोटे वाहनों बाइक, कार, बोलेरो आदि के आवागमन लिए खोल दिया जाएगा। जानकारी दी कि अभी बड़े वाहनों को आवागमन के लिए दो-तीन दिन का और इंतजार करना होगा।
पुल बंद होने से गर्मी में बढ़ी परेशानी- बता दें देवरिया और बिहार से बलिया को जोड़ने वाला भागलपुर पुल पर मरम्मत की वजह से 4 महीने से आवागमन बंद है। इस दौरान उधर से गुजरने वालों को पैदल ही चलने को मजबूर होना पड़ रहा। एक तरफ भीषण गर्मी उस पर पैदल चलना लोगों के लिए कठिन साबित हो रहा है। बूढ़े, महिला, बच्चों और दिव्यांगों का बुरा हाल है। पुल पर आवागमन बंद होने से लोग मऊ जिले के दुबारी से बरहज होते हुए देवरिया जाने को मजबूर हैं। इससे ज्यादा दूरी तय करने से लोगों की जेब पर काफी असर पड़ रहा है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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