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बलिया- पूर्वांचल एक्सप्रेस का सुरेमनपुर स्टॉपेज फिर शुरू करने की मांग
बलिया से गोरखपुर जाने और आने वाले यात्रियों को इस वक्त काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि पूर्वांचल एक्सप्रेस का सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर निरस्त ठहराव अभी तक बहाल नहीं किया गया है। कई बार मांग करने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं अब मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।
कोलकाता से बलिया के रास्ते गोरखपुर जाने वाली 15049 अप पूर्वांचल एक्सप्रेस का सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर निरस्त ठहराव अभी तक बहाल नहीं किए जाने से यात्रियों को बहुत परेशानी हो रही है। बार-बार आग्रह के बावजूद रेलवे के अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। पूर्वाचल एक्सप्रेस पिछले एक दशक से सप्ताह में दो दिन गोरखपुर से वाया बलिया होकर कोलकाता जाती है। वहीं दो दिन वाया बलिया होकर कोलकाता से गोरखपुर जाती है।
बता दें इस ट्रेन का ठहराव सुरेमनपुर में परिचालन काल से ही हो रहा था लेकिन कोरोना काल में पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने अप पूर्वांचल एक्सप्रेस का ठहराव सुरेमनपुर में निरस्त कर दिया। कोलकाता से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन सुरेमनपुर में नहीं रुक रही है। जिसको लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार पूर्वोत्तर रेलवे मंडल प्रबंधक वाराणसी और गोरखपुर के महाप्रबंधक का ध्यान अपेक्षित करते हुए अप पूर्वांचल एक्सप्रेस का ठहराव सुरेमनपुर में बहाल करने की मांग की है। और अब तो मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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