बलिया
परिषदीय विद्यालय में नहीं है रसोई गैस, धुएं के बीच चूल्हे पर बन रहा मिड-डे मील
बलिया। चूल्हे-लकड़ियों के धुएं से निजात दिलाने के लिए सरकार ने उज्जवला योजना की शुरुआत की थी ताकि हर जगह रसोई गैस पर खाना बन सके लेकिन जिले के सरकारी स्कूलों में आज भी मिट्टी के चूल्हे पर भोजना पकाया जा रहा है। जिसके चलते स्कूल परिसर में धुएं का गुबार इकट्ठा हो जाता है और छात्रों को परेशानी होती है।
बेरूआरबारी शिक्षा क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय शिवरामपट्टी में पारंपरिक चूल्हे पर मिड-डे-मील बनाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात तो यह है कि पिछले 15 सालों से यहीं हालात है, यानि कि विद्यालय में ऐसे ही मिट्टी के चूल्हे पर भोजन पकाया जाता है। स्कूल में गैस का चूल्हा नहीं होने से लकड़ी और सूखे पत्ते जलाकर भोजन बनाया जा रहा है।
यहां की रसोइया जमुनी ने बताया कि विद्यालय में गैस सिलेंडर और चूल्हा नहीं है। ऐसे में मिट्टी के चूल्हे से काम चलाना पड़ता है। सहायक अध्यापिका रितु सिंह ने बताया कि रसोई गैस के लिए कई बार अधिकारियों से कहा गया। गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है। चूल्हे पर खाना बनने से पूरे स्कूल में धुआं भर जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती।
वहीं मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवनारायण सिंह का कहना है कि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है, जांच की जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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