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बलिया में एक बार फिर 2 महीने तक धारा 144 लागू
बलिया जिले में एक बार फिर 2 महीने तक धारा 144 लागू कर दी गई है। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल की रोक-थाम तथा परीक्षाएं शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराये जाने और आगामी त्यौहार रामनवमी, ईद-उफ-फितर को दृष्टिगत रखते हुए जनपद सीमा के भीतर निवास करने वाले तथा आने जाने वाले समस्त व्यक्तियों के लिये 22 मार्च से आगामी दो माह तक की अवधि के लिए धारा-144 लागू किया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट इन्द्र विक्रम सिंह ने बताया है कि कोई भी व्यक्ति/प्रत्याशी/राजनैतिक दल आदर्श चुनाव आचार संहिता की शर्तो का उल्लघंन नहीं करेगा और बिना अनुमति के रैली, जनसभा, नुक्कड़ सभा जुलूस आदि का आयोजन नहीं करेगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा निर्वाचन कार्य में लगे कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का अमर्यादित व्यवहार तथा उनके कार्यों में व्यवधान उत्पन्न नहीं किया जायेगा।
उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान कोई भी व्यक्ति धार्मिक स्थलों, मस्जिदों, गिरिजाघरों, मंदिरों व पूजा के अन्य स्थानों को निर्वाचन प्रचार हेतु उपयोग नहीं करेगा। साथ ही जनपद सीमा के अन्तर्गत किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर पांच या पांच से अधिक व्यक्ति एक समूह के रूप में एक साथ एकत्रित नहीं होगे और न ही कोई जुलूस निकालेगें और न ही कोई धरना प्रदर्शन करेगा और न ही कोई ऐसी अफवाह फैलायेगें, जिससे शान्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
जुलूस के लिए भी विशेष परमिशन की आवश्यकता होगी। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र जैसे लाठी, डण्डा, चाकू, भाला, फरसा, बन्दूक, राइफल रिवाल्वर, पिस्टल आदि आग्नेयास्त्र या अन्य धारदार हथियार एवं किसी प्रकार का विस्फोटक पदार्थ को लेकर नहीं चलेगा। न ही भड़काऊ पोस्टर, बैनर, कटआउट लगाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक तौर पर धरना प्रदर्शन, दुकान प्रतिष्ठान, कार्यालय और पेट्रोल-पंप आदि को जबरदस्ती बंद कराने की अनुमति नहीं है। पुतला दहन पर भी पूरी तरह रोक रहेगी।
वहीं परीक्षा के मद्देनजर विशेष सुरक्षा बरती जाएगी। परीक्षा केन्द्रों से न्यूनतम 01 किमी की परिधि में फोटो कॉपियर एवं स्कैनर का संचालन परीक्षा अवधि में पूर्णतया प्रतिबन्धित रहेगा। परीक्षा केन्द्रों के आस-पास परीक्षा अवधि में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग प्रतिबन्धित किया जाता है। परीक्षा केन्द्र पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार के शस्त्र आदि लेकर परीक्षा स्थल पर जाने की अनुमति नहीं होगी। किसी परीक्षा केन्द्र से सामूहिक नकल की सूचना प्राप्त होने पर अथवा संदेह होने पर उ0प्र0 सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 1998 के अन्तर्गत संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
परीक्षा केन्द्रों पर तैनात केन्द्र व्यवस्थापक/वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक द्वारा पूरी परीक्षा अवधि की वायस रिकार्डर युक्त सी0सी0टी0वी0 फूटेज/रिकार्डिंग सुरक्षित रखी जायेगी।परीक्षा केन्द्र परिसर के अन्दर किसी भी व्यक्ति को पाठ्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी। परीक्षा केन्द्र परिसर के अन्दर मोबाइल फोन या इलेक्ट्रानिक डिवाइस के उपयोग की मनाही है। इन निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्यवाही की जाएगी।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


