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केंद्रीय खेल मंत्री ने दी बलिया को बड़ी सौगात, बनेगा मिनी स्टेडियम
केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर बलिया जिले के नरहीं में खेल मैदान में खेल निदेशालय उप्र की ओर से आयोजित फुटबाल प्रतियोगिता के पुरुस्कार वितरण व समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने जिले को बड़ी सौगातें देने की घोषणा की। उन्होंने जिले की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए सदर तहसील क्षेत्र के नरहीं व कथरिया में मिनी स्टेडियम बनवाने की घोषणा की। नरहीं में मिनी स्टेडियम के लिए 12 जनवरी से पहले धनराशि भी स्वीकृत कर देने की बात कही।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने सबसे पहले पहली बार जनपद की धरती पर आए केंद्रीय खेल मंत्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जनपद ऋषि व कृषि एवं किसानों व जवानों का इलाका है। किसानों के हित में सरकारी स्तर का जो बेहतर काम मोदी सरकार में हुआ, वह कभी नहीं हुआ था। उन्होंने उपेंद्र तिवारी को उनके क्षेत्र फेफना में दो करोड़ रुपये सांसद निधि से देने की बात कही।
इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कई बाते कहीं। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी यूपी में बनने जा रही है। कई खेल मैदान व इंडोर स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में यूपी खेल की ऊंचाइयों पर होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सुदूर क्षेत्र में, गांव-गिरांव में ऐसे बड़े स्तर की खेल प्रतियोगिता का आयोजन प्रशंसनीय है।
इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया और कहा कि खेल और खिलाड़ी के लिए मैं हमेशा उपलब्ध रहूंगा। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में भाग लिए और जीत कर आए खिलाड़ियों का अपार सम्मान पीएम मोदी व सीएम योगी ने किया। साथ ही सीएम योगी की तारीफ करते हुए कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में गुंडागर्दी नहीं चलने दी। अपराधियों के घर बुलडोजर चलवाए। लोग शांति चाहते हैं। कोरोना महामारी के समय 80 करोड़ लोगों को दुगना राशन दिया गया। हर जरूरतमंद को निःशुल्क सिलेंडर, पक्का मकान व अन्य मूलभूत सुविधाएं दी गई।
सम्बोधन के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सभी खिलाड़ियों व आयोजकों से मिले और गांव में इस तरह की शानदार प्रतियोगिता कराने के लिए धन्यवाद दिया। क्रीड़ाधिकारी अतुल सिन्हा के अलावा आयोजक मण्डल के नीरज राय, पवन राय आदि की पीठ भी थपथपाई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि खेल के क्षेत्र में इस इलाके के लिए उनकी ओर से हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
वहीं कार्यक्रम में खेल मंत्री उपेंद्र तिवारी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी के स्नेह की बदौलत देश-प्रदेश का चहुँमुखी विकास का सिलसिला जारी है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने व उनका ख्याल रखने की देन है कि खेल के क्षेत्र में प्रदेश लगातार ऊंचाइयों पर जा रहा है। यहां के खिलाड़ी अपनी खेल से प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
समारोह में सहकारी बैंक के चेयरमैन विनोद शंकर दुबे, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी एके पांडेय, क्रीड़ाधिकारी अतुल सिन्हा, मेजर दिनेश सिंह, अरविंद सिंह, अजय सिंह, अजय प्रताप साहू, मुकेश अग्रवाल, सुरेंद्र नाथ राय, विनय राय, ग्राम प्रधान रामनारायण पासवान सहित भारी संख्या में दर्शन मौजूद थे। संचालन नीरज राय ने किया। अध्यक्षता सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त व संचालन नीरज राय ने किया।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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