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कृषि कानून वापस लिए जाने के फैसले पर क्या है बलिया के नेताओं की राय?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का बलिया के नेताओं की प्रतिक्रिया क्या है?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। लगभग पंद्रह मिनट तक चले प्रधानमंत्री के इस भाषण का मुख्य हिस्सा अंत के कुछ मिनटों में सुनने को मिला। अपनी सरकार को किसान हितैषी बताते हुए प्रधानमंत्री ने मोदी ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। बलिया जिले में इस फैसले का स्वागत किसान संगठन के नेताओं से लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं तक कर रहे हैं। साथ ही कृषि कानून को वापस लेने की वजह भी बता रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी और 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही समाजवादी पार्टी के बलिया अध्यक्ष ने इस मौके पर बलिया खबर से बात की। सपा के बलिया अध्यक्ष राजमंगल यादव ने कहा कि “भाजपा जो भी करती है चुनाव को देखकर ही करती है। देशभर के किसान लगभग साल भर से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। किसानों की मांग जायज थी। अब जाकर प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है। लेकिन इसे अब सदन में समाप्त करके अमली जामा भी पहनाना होगा।”

किसान यूनियन के बलिया अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने इस ऐताहिसक मौके पर बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “आखिरकार सरकार ने किसानों की कुर्बानी लेने के बाद कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कही है। देर आए दुरुस्त आए। लेकिन संसद में जब तक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ये कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक आंदोलन जारी रहेगा।” उन्होंने आगे कहा कि “सिंघू बार्डर पर किसान संगठनों की बैठक के बाद अंतिम निर्णय होगा। भले ही चुनाव के दबाव में ही सरकार ने ये फैसला लिया हो लेकिन इसका स्वागत है।”

बलिया से बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह ने फेसबुक पर लिखा है कि “गुरुनानक जयंती एवं कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर देश के किसानों के लिए इतनी बड़ी खुशखबरी आई है। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के सरकार के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। लेकिन दुख इस बात का है कि ये फैसला पहले ले लिया गया होता तो इस आंदोलन में जो 700 किसान शहीद हुए हैं उन्हें बचाया जा सकता था। किसानों के बलिदान को इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा।”

उमाशंकर सिंह ने सरकार से मांग की है कि “किसानों के उपज का एमएसपी देने के लिए कानून बनाई जाए। ताकि किसानों की आय स्थिर की जा सके। क्योंकि हर बार फसल का भाव गिर जाता है जिससे किसान अपनी उपज खेत में ही छोड़ देने के लिए मजबूर हो जाता है।”

बलिया जिले में किसानों के मुद्दों पर लगातार सक्रिया रहने वाले बलवंत यादव ने कहा कि “किसानों ने कानून मांगा था और ना ही अब तक ये कानून लागू किए गए थे। कृषि कानून वापस लेने का कोई फायदा किसानों को तब तक नहीं मिलेगा जब तक कि MSP लेकर कानून नहीं बन जाता। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक MSP को लेकर सरकार कानून नहीं बनाती है तब तक आंदोलन चलता रहेगा।”

बलवंत यादव ने कहा कि “प्रधानमंत्री ने आज जो भाषण दिया उसमें साफ दिख रहा है कि वो कृषि कानूनों को गलत नहीं मान रहे हैं। बल्कि उन्हें अफसोस है कि वो किसानों के एक वर्ग को नहीं मना सके। दुनिया भर में छीछालेदर हो जाने की वजह से ये कानून वापसी का निर्णय हुआ है। यूपी चुनाव में तो अभी समय है लेकिन सरकार ने देखा है कि उनकी पार्टी के नेता किसान आंदोलन से प्रभावित क्षेत्रों में जा नहीं पा रहे हैं तो चुनाव कैसे जीतेंगे इसलिए कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया गया है।”

बलिया के ही वामपंथी पार्टी के युथ विंग के अतहर ने बताया कि “कृषि कानूनों का असर किसानों के साथ मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर भी पड़ने वाला था। किसान आंदोलन के दबाव में सरकार ने इन काले कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। लेकिन प्रधानमंत्री के भाषण से नहीं लगता है कि उन्हें ये कानून गलत लग रहा है। क्योंकि प्रधानमंत्री तो पूंजीपतियों के हितैषी हैं। पूंजीपतियों के लिए ये कानून फायदेमंद था।”

युवा चेतना के रोहित सिंह ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “बड़ी देर कर दी हूजूर आते-आते। प्रधानमंत्री को देशाटन के बाद यह एहसास हुआ कि न सिर्फ पंजाब बल्कि पूरे देश और खासकर उत्तर प्रदेश में उनके पैर के नीचे से राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है। तब उन्हें जागृती हुई है। लेकिन किसानों पर जो जुल्म और अत्याचार हुआ उसका हिसाब अब कौन देगा? इस बात से यह साबित हो गया है कि किसानों की बात सत्य थी कि कहीं न कहीं मोदी सरकार अंबानी और अडानी को लाभ पहुंचाना चाहती थी।”

समाजवादी पार्टी के नेता अनिल राय ने कहा है कि “लाखों किसानों की आवाज, सैकड़ों किसानों की शहादत, देश की सभी विपक्षी पार्टियों के आक्रामक तेवर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को आज एहसास करा दिया कि वर्तमान सरकार किसान विरोधी है। आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री जी देश से माफी मांग रहे हैं मगर यूपी की जनता भाजपा को माफ करने की मूड में नही है। यूपी की जनता भाजपा को खदेड़ कर समजवादी सरकार बनाने का मन बना चुकी है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का स्वागत करते हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रदेश अध्यक्ष नीरज सिंह गुड्डू ने कहा कि “कृषि कानूनों को वापस लेना स्वागतयोग्य कदम है। इन कानूनों की कोई जरूरत नहीं थी। किसानों के आंदोलन के दबाव के बाद सरकार ने कानून वापसी का ऐलान किया है। मैं किसानों के संघर्ष को नमन करता हूं। साथ ही प्रधानमंत्री को इसके लिए बधाई देता हूं।”

किसान आंदोलनों मे सक्रिय छात्र नेता प्रवीण कुमार सिंह  कहते हैं “आज सिर्फ भारत का किसान ही नहीं जीता है। बल्कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मे लोक की महत्ता की भी जीत है। विशेष तौर पर उन युवाओं को सीख मिलेगी जो सत्ता और सुविधा को ही लोकतंत्र मानते रहे हैं। आज युवाओं मे संघर्ष और आंदोलनों के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वो भविष्य मे लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बनेंगे।”

गौरतलब है कि लगभग एक साल से किसान देशव्यापी आंदोलन कर रहे थे। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान शुरू से ही आरपार की लड़ाई का मन बनाए हुए बैठे थे। दिल्ली की सीमाओं पर किसान धरना कर रहे थे। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच इसे लेकर कई दौर की बैठकें भी हुईं। लेकिन किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस कानून को वापस लेने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री ने आज राष्ट्र के नाम संबोधन में इसे लेकर ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस कानून को किसानों के हक में बताया। कहा कि हम किसानों के एक वर्ग को नहीं समझा सके। इस फैसले की टाइमिंग ने इसे एक नया रंग दे दिया है। कुछ ही महीनों बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। सियासी टिप्पणीकारों का साफ कहना है कि किसान आंदोलन भाजपा को चुनाव में नुकसान पहुंचाएगी। तो सवाल है कि क्या चुनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है?

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सिकंदरपुर की सियासत में नया चेहरा, कौन हैं संजीव कुमार तिवारी? बिजनेस से राजनीति तक कैसे पहुंचा सफर?

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A New Face in Sikandarpur Politics: Who Is Sanjeev Kumar Tiwari? How Did His Journey From Business to Politics Begin?

बलिया। सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अब नए चेहरों की सक्रियता दिखाई देने लगी है। इसी बीच बिजनेस की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले संजीव कुमार तिवारी का नाम भी चर्चा में है। कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले संजीव कुमार तिवारी अब राजनीति के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को उठाने और विकास की नई सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं।

राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली? बिजनेस से राजनीति तक आने का विचार कैसे बना? सिकंदरपुर विधानसभा को ही राजनीतिक कर्मभूमि बनाने के पीछे क्या वजह है? इन सवालों के साथ संजीव कुमार तिवारी अपने राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाओं को लेकर खुलकर बात करते हैं।

सिकंदरपुर की समस्याओं को लेकर उनकी प्राथमिकताओं में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के लिए बेहतर अवसर जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उनका मानना है कि क्षेत्र के विकास के लिए केवल सड़क और भवन निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी विकास के केंद्र में रखना होगा।

बेरोजगारी और पलायन पर क्या है प्लान?

सिकंदरपुर समेत पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवाओं का रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका जोर युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर है।

शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर क्या सोच?

संजीव कुमार तिवारी क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर देते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विधायक बनने की स्थिति में इन दोनों क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात वह कहते हैं।

क्या पुराने नेताओं से क्षेत्र के साथ न्याय नहीं हुआ?

राजनीति में नए चेहरे के तौर पर सामने आ रहे संजीव कुमार तिवारी से जब यह सवाल पूछा जाता है कि क्या अब तक के जनप्रतिनिधि क्षेत्र के साथ न्याय नहीं कर पाए, तो उनका फोकस आरोप लगाने के बजाय भविष्य की राजनीति पर दिखाई देता है। उनका कहना है कि जनता अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि काम का स्पष्ट रोडमैप चाहती है।

विधायक बने तो पहले 100 दिन में क्या करेंगे?

संजीव कुमार तिवारी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि अगर उन्हें जनता का समर्थन मिलता है तो सत्ता संभालने के शुरुआती 100 दिनों में उनकी प्राथमिकता क्या होगी। उनका कहना है कि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की पहचान, विभागवार समीक्षा और जनता से सीधे संवाद के जरिए प्राथमिकता तय की जाएगी।

क्या होगा विकास मॉडल?

संजीव कुमार तिवारी अपने विकास मॉडल को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, किसानों की समस्याओं और युवाओं के अवसरों से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि सिकंदरपुर का विकास किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विधानसभा के हर गांव और हर तबके तक विकास की पहुंच होनी चाहिए।

क्या चुनाव पैसे और जाति से जीते जाते हैं?

राजनीति में सबसे कठिन सवालों में से एक चुनाव में पैसे और जातीय समीकरण की भूमिका को लेकर भी है। संजीव कुमार तिवारी का मानना है कि चुनाव में जातीय और आर्थिक समीकरण अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन अंततः जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है। वह विकास और साफ छवि को अपनी राजनीतिक पूंजी के तौर पर पेश करते हैं।

जीतने के बाद बदल जाएंगे?

नए राजनीतिक चेहरे के सामने जनता का एक बड़ा सवाल यह भी होता है कि चुनाव से पहले किए गए वादे सत्ता में आने के बाद कितने पूरे होंगे। संजीव कुमार तिवारी का कहना है कि राजनीति में आने का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के बीच लगातार उपलब्ध रहना और अपने काम का हिसाब देना होना चाहिए।

राजनीतिक अनुभव नहीं, फिर भरोसा क्यों?

बिना लंबे राजनीतिक अनुभव के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर भी संजीव कुमार तिवारी से सवाल उठता है। उनका जवाब है कि राजनीति में अनुभव महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की समस्याओं को समझने की इच्छा, ईमानदारी और काम करने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उनका दावा है कि कारोबारी जीवन से मिले अनुभव को वह क्षेत्र के विकास में इस्तेमाल करना चाहते हैं।

टिकट नहीं मिला तो क्या करेंगे?

संजीव कुमार तिवारी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का एक और अहम सवाल टिकट को लेकर है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो उनकी अगली रणनीति क्या होगी? इस सवाल का जवाब ही यह तय करेगा कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित है या वह लंबे समय के लिए सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं।

क्या बलिया सदर पर भी नजर?

सिकंदरपुर से दावेदारी के बीच बलिया सदर सीट को लेकर भी उनसे सवाल किया गया। हालांकि उनकी मौजूदा राजनीतिक सक्रियता का केंद्र सिकंदरपुर दिखाई देता है, लेकिन भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर भी नजर रहेगी।

मौजूदा विधायक के काम को कैसे देखते हैं?

मौजूदा विधायक के काम को लेकर संजीव कुमार तिवारी का आकलन भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका कहना है कि जनता को जनप्रतिनिधि के काम का मूल्यांकन विकास और उपलब्धियों के आधार पर करना चाहिए। आने वाले चुनाव में जनता के सामने अपने-अपने काम और विजन के साथ विकल्प होंगे।

परिवार का कितना मिला साथ?

राजनीति में कदम रखने के फैसले में परिवार की भूमिका को भी संजीव कुमार तिवारी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन आसान नहीं होता और परिवार का सहयोग राजनीतिक सफर को मजबूती देता है।

राजनीति में आने के बाद क्या बदला?

बिजनेस से राजनीति में आने के बाद संजीव कुमार तिवारी के लिए सबसे बड़ा बदलाव लोगों के बीच लगातार रहना और उनकी समस्याओं को करीब से समझना रहा है। अब उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र के लिए काम करने का जरिया है।

युवाओं के नाम संदेश

युवाओं को लेकर संजीव कुमार तिवारी का संदेश है कि युवा राजनीति और समाज से दूरी बनाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझें और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनें। उनका मानना है कि क्षेत्र के भविष्य का सबसे बड़ा आधार युवा शक्ति है।

एक लाइन में क्यों जीतेंगे?

जब उनसे पूछा गया कि आखिर जनता उन्हें ही क्यों चुने, तो उनका जवाब विकास, बदलाव और जनता से सीधे जुड़ाव के इर्द-गिर्द है। संजीव कुमार तिवारी खुद को एक ऐसे नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो बिजनेस की दुनिया से निकलकर अब सिकंदरपुर की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि संजीव कुमार तिवारी की यह राजनीतिक पारी कितनी लंबी चलती है और सिकंदरपुर की जनता उनके विजन और दावेदारी को किस नजर से देखती है।

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मेजर ध्यानचंद जयंती पर जमुना राम मेमोरियल स्कूल में खेल सप्ताह का आगाज, कबड्डी में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

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चितबड़ागांव (बलिया)। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव में 29 अगस्त से खेल-कूद सप्ताह का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के तहत विद्यालय के चारों हाउस—रेड, ग्रीन, ब्लू और येलो—के बालक एवं बालिका वर्ग के बीच कबड्डी प्रतियोगिता कराई गई।

बालिका वर्ग में ग्रीन हाउस ने रेड हाउस को 12-10 के रोमांचक मुकाबले में हराया, जबकि येलो हाउस ने ब्लू हाउस को 20-15 से शिकस्त दी। बालिका वर्ग का खिताबी मुकाबला अगले दिन खेला जाएगा।

वहीं, बालक वर्ग में ब्लू हाउस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए येलो हाउस को 15-8 के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने जोश, अनुशासन और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन अनुशासन, समर्पण और देशप्रेम की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि खेल केवल हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण और टीम भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों की प्रतिभा को निखरने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान इंचार्ज अरविंद चौबे, इंचार्ज नीतू मिश्रा और हैंडबॉल प्रशिक्षक मनोज कुमार पाण्डेय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

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बलिया। जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव में 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उमंग और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर धर्मात्मा नंद ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं ध्वजारोहण के साथ किया।

ध्वजारोहण के बाद विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी। बच्चों ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतीकात्मक रूप धारण कर उनके त्याग, संघर्ष और देशभक्ति की गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत नंदिनी मिश्रा की मधुर आवाज में प्रस्तुत गीत ‘चिट्ठी आई है’ से हुई। उनकी प्रस्तुति ने मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद ‘जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया’ और ‘भारत की जान है तिरंगा’ जैसे देशभक्ति गीतों ने पूरे विद्यालय परिसर को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया।

कक्षा 11 के शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों ने योग के विभिन्न आसनों का शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वहीं प्री-प्राइमरी एवं प्राइमरी के बच्चों ने ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में देशभक्ति के रंग भर दिए। कक्षा 8 की छात्राओं द्वारा पारंपरिक कजरी गीत पर प्रस्तुत नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।

विद्यालय के प्रबंध निदेशक तुषार नंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। उन्होंने बच्चों से अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्य अतिथि, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीनियर कोऑर्डिनेटर अरविंद चौबे, जूनियर कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया।

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